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Sitapur News: 48 घंटे से केंद्र पर खड़ी ट्राॅलियां, धान खरीद में रोड़ा बनी व्यवस्था
Fri, 25 Oct 2024 12:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 25 Oct 2024 12:15 AM IST
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सीतापुर। जिले में धान खरीद शुरू हो गई है लेकिन तकनीकी दिक्कतें खरीद में अड़चने पैदा कर रही हैं। इसका सीधा खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। इस वजह से किसानों के धान की खरीद नहीं हो पा रही है। नवीन गल्लामंडी में किसानों की धान की ट्रॉलियां दो दिन से खड़ी हैं। वहीं दूसरी ओर बिचौलियों के हाथों किसान अपना धान बेचने को मजबूर हो रहे हैं। अधिकारी इस समस्या का हल नहीं निकाल पा रहे हैं।
दिवाली का त्योहार नजदीक होने के कारण जिले के किसान धान बेचने के लिए मंडियों का रुख कर रहे हैं। गल्लामंडी पहुंचने पर धान खरीद न होने से किसान मायूस हैं। बड़गांव के किसान रमेश सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह धान लेकर गल्लामंडी गए थे। आरएफसी सेंटर पर जगह न होने की बात बताई गई। इसके बाद एफसीआई सेंटर पर भी तौल नहीं हो सकी। पता चला कि धान मानक के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए ट्रॉली लेकर खड़े हैं।
शाहमहोली के किसान संजय भी धान के बिकने के इंतजार में खड़े नजर आए। उन्होंने बताया कि दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी हमारी ट्रॉली की तौल नहीं हो पाई है। यहां के सेंटर प्रभारी कोई सही जवाब नहीं दे रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो किसानों से जो धान खरीद नहीं हो पा रही है। इसमें सबसे बड़ी समस्या ऑटोमैटिक राइस मिल अटैंचमेंट की है।
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इसी वजह से ज्यादातर धान सेंटरों पर खरीद नहीं हो पा रही है। वहीं सेंटर प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि हमारे दो सेंटर को मिलाकर करीब ढाई हजार से तीन हजार क्विंटल तक खरीद हो चुकी है। उठान नहीं हो पाने से सेंटर पर जगह नहीं बची है। तकनीकी दिक्कतों की वजह से राइस मिलों को धान नहीं जा पा रहा है। किसान जो धान लेकर आ रहे हैं, वह खड़े हुए हैं। जिन सेंटरों पर जगह है, उन सेंटरों पर किसानों से बेचने के लिए कहा जा रहा है।
20 किलोमीटर दायरे वाली जुड़ेगी राइस मिल
जिले में धान खरीद के लिए 116 सेंटर बनाए गए है। इन सेंटरों पर धान की उठान के लिए ऑटोमैटिक राइस मिल अटैंचमेंट के तहत मात्र 53 केंद्र ही पोर्टल पर बुधवार तक पंजीकृत हो सके हैं। इसमें भी यह शर्त है कि धान खरीद सेंटर के 20 किलोमीटर के दायरे में जो राइस मिल होगी वही जुड़ पाएगी। जिसमें से अभी 63 सेंटर नहीं जुड़ सके हैं। बचे हुए सेंटरों से धान की उठान मिलर्स नहीं कर पा रहे हैं जिससे इन जगहों पर भी किसानों को धान बेचने में परेशानी हो रही है।
राइस मिलों के लिए भी बढ़ी सिरदर्दी
ऑटोमैटिक राइस मिल अटैचमेंट से सिर्फ किसान ही नहीं राइस मिल संचालकों के लिए भी सिरदर्दी बढ़ गई है। सरकारी पोर्टल पर राइस मिले शो होने के बाद भी उन्हें अभी धान नहीं दिया जा सकेगा। पाेर्टल पर जो मिल अटैचमेंट में दिख रही हैं वो पहले 290 क्विंटल चावल डिपो को भेजेंंगे। जब वह चावल डिपो में पास हो जाएगा, तभी उसे धान दिया जा सकेगा। वहीं मिल भी अपना चावल नहीं बेंच पाएगी। क्योंकि एफसीआई में एक विंग पोर्टल है जो नजदीकी डिपो को चयनित करता है। उसी विंग पोर्टल पर सारे डिपो अपना डाटा अपलोड करते हैं। फिर जो नजदीकी डिपो होगा तब उसे राइस मिलर्स अपना चावल दे पाएंगे।
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दिवाली का त्योहार नजदीक होने के कारण जिले के किसान धान बेचने के लिए मंडियों का रुख कर रहे हैं। गल्लामंडी पहुंचने पर धान खरीद न होने से किसान मायूस हैं। बड़गांव के किसान रमेश सिंह ने बताया कि बुधवार सुबह धान लेकर गल्लामंडी गए थे। आरएफसी सेंटर पर जगह न होने की बात बताई गई। इसके बाद एफसीआई सेंटर पर भी तौल नहीं हो सकी। पता चला कि धान मानक के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए ट्रॉली लेकर खड़े हैं।
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शाहमहोली के किसान संजय भी धान के बिकने के इंतजार में खड़े नजर आए। उन्होंने बताया कि दो दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी हमारी ट्रॉली की तौल नहीं हो पाई है। यहां के सेंटर प्रभारी कोई सही जवाब नहीं दे रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो किसानों से जो धान खरीद नहीं हो पा रही है। इसमें सबसे बड़ी समस्या ऑटोमैटिक राइस मिल अटैंचमेंट की है।
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इसी वजह से ज्यादातर धान सेंटरों पर खरीद नहीं हो पा रही है। वहीं सेंटर प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि हमारे दो सेंटर को मिलाकर करीब ढाई हजार से तीन हजार क्विंटल तक खरीद हो चुकी है। उठान नहीं हो पाने से सेंटर पर जगह नहीं बची है। तकनीकी दिक्कतों की वजह से राइस मिलों को धान नहीं जा पा रहा है। किसान जो धान लेकर आ रहे हैं, वह खड़े हुए हैं। जिन सेंटरों पर जगह है, उन सेंटरों पर किसानों से बेचने के लिए कहा जा रहा है।
20 किलोमीटर दायरे वाली जुड़ेगी राइस मिल
जिले में धान खरीद के लिए 116 सेंटर बनाए गए है। इन सेंटरों पर धान की उठान के लिए ऑटोमैटिक राइस मिल अटैंचमेंट के तहत मात्र 53 केंद्र ही पोर्टल पर बुधवार तक पंजीकृत हो सके हैं। इसमें भी यह शर्त है कि धान खरीद सेंटर के 20 किलोमीटर के दायरे में जो राइस मिल होगी वही जुड़ पाएगी। जिसमें से अभी 63 सेंटर नहीं जुड़ सके हैं। बचे हुए सेंटरों से धान की उठान मिलर्स नहीं कर पा रहे हैं जिससे इन जगहों पर भी किसानों को धान बेचने में परेशानी हो रही है।
राइस मिलों के लिए भी बढ़ी सिरदर्दी
ऑटोमैटिक राइस मिल अटैचमेंट से सिर्फ किसान ही नहीं राइस मिल संचालकों के लिए भी सिरदर्दी बढ़ गई है। सरकारी पोर्टल पर राइस मिले शो होने के बाद भी उन्हें अभी धान नहीं दिया जा सकेगा। पाेर्टल पर जो मिल अटैचमेंट में दिख रही हैं वो पहले 290 क्विंटल चावल डिपो को भेजेंंगे। जब वह चावल डिपो में पास हो जाएगा, तभी उसे धान दिया जा सकेगा। वहीं मिल भी अपना चावल नहीं बेंच पाएगी। क्योंकि एफसीआई में एक विंग पोर्टल है जो नजदीकी डिपो को चयनित करता है। उसी विंग पोर्टल पर सारे डिपो अपना डाटा अपलोड करते हैं। फिर जो नजदीकी डिपो होगा तब उसे राइस मिलर्स अपना चावल दे पाएंगे।