{"_id":"5d408b4d8ebc3e6cc8026333","slug":"trains-from-delliganj-to-sitapur-will-run-at-double-speed-from-november-sitapur-news-lko473725495","type":"story","status":"publish","title_hn":"डालीगंज से सीतापुर के बीच नवंबर से दोगुनी रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डालीगंज से सीतापुर के बीच नवंबर से दोगुनी रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीतापुर। डालीगंज से सीतापुर तक इलेक्ट्रिक ट्रैक का काम अंतिम चरण में है। रेल विद्युतीकरण कार्य के तहत सीतापुर में बिजली के खंभे लगाने का काम शुरू हो गया है। इसके बाद खंभों पर तारों का जाल बिछाने और फिनिशिंग का काम होगा। इसमें करीब तीन महीने का समय लग सकता है।
रेलवे के अधिकारी सीतापुर-डालीगंज विद्युत ट्रैक नवंबर तक बनकर तैयार होने की उम्मीद जता रहे हैं। अभी करीब 70 से 80 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनें विद्युतीकरण के बाद दोगुनी रफ्तार से दौड़ेंगी। इससे मुसाफिरों को मंजिल पर पहुंचने में कम वक्त लगेगा।
सीतापुर में पूर्वोत्तर और उत्तर रेलवे के दो ट्रैक हैं। इनमें पूर्वोत्तर रेलवे का बुढ़वल वाया सीतापुर, सीतापुर जंक्शन, ऐशबाग वाया सीतापुर-लखीमपुर मैलानी, उत्तर रेलवे का सीतापुर सिटी वाया महोली-रोजा और सीतापुर सिटी वाया नैमिषारण्य-बालामऊ शामिल हैं।
विज्ञापन
उत्तर रेलवे का ट्रैक कई साल पहले ब्रॉडगेज में तब्दील हो चुका है। पूर्वोत्तर रेलवे का ऐशबाग वाया सीतापुर-लखीमपुर मीटर गेज ट्रैक अब ब्रॉडगेज में परिवर्तित किया जा रहा है। ऐशबाग-सीतापुर तक ट्रैक मीटर गेज से ब्रॉडगेज में तब्दील हो चुका है। इस रूट पर चार जोड़ी ट्रेनें भी दौड़ने लगी हैं।
सीतापुर-लखीमपुर-मैलानी-पीलीभीत ट्रैक को मीटर गेज से ब्रॉडगेज बदलने का कार्य भी अंतिम चरण में है। सीतापुर-लखीमपुर तक आमान परिवर्तन कार्य पूरा होने के बाद सीआरएस मुआयना भी हो चुका है। 10 अगस्त से इस ट्रैक पर रेल सेवा शुरू होने की उम्मीद है।
इस ट्रैक पर मालगाड़ियां दौड़ाई भी जा चुकी हैं। इस समूचे ट्रैक का विद्युतीकरण भी कराने में महकमा जुटा है। रेल विद्युतीकरण में करीब अस्सी फीसदी फाउंडेशन कार्य पूरा कर लिया गया है। महज बीस फीसदी कार्य बचा है।
खंभे लगने के बाद बिछेगा तारों का जाल
मंगलवार को सीतापुर यार्ड में रेल विकास निगम लिमिटेड के साइट इंजीनियर अभय कांत झा और बीरेन्द्र सिंह की देखरेख में खंभे लगाने का काम कराया जा रहा है। इसके बाद विद्युत खंभों पर बिजली के तारों का जाल बिछाया जाएगा।
इसकी फिनिशिंग भी की जाएगी। यह कार्य लगभग तीन माह में पूरा होने की उम्मीद है। विद्युतीकरण के बाद वर्तमान ट्रेनों की स्पीड के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से ट्रेनें दौड़ने की उम्मीद है।
विज्ञापन
रेलवे के अधिकारी सीतापुर-डालीगंज विद्युत ट्रैक नवंबर तक बनकर तैयार होने की उम्मीद जता रहे हैं। अभी करीब 70 से 80 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनें विद्युतीकरण के बाद दोगुनी रफ्तार से दौड़ेंगी। इससे मुसाफिरों को मंजिल पर पहुंचने में कम वक्त लगेगा।
विज्ञापन
सीतापुर में पूर्वोत्तर और उत्तर रेलवे के दो ट्रैक हैं। इनमें पूर्वोत्तर रेलवे का बुढ़वल वाया सीतापुर, सीतापुर जंक्शन, ऐशबाग वाया सीतापुर-लखीमपुर मैलानी, उत्तर रेलवे का सीतापुर सिटी वाया महोली-रोजा और सीतापुर सिटी वाया नैमिषारण्य-बालामऊ शामिल हैं।
विज्ञापन
उत्तर रेलवे का ट्रैक कई साल पहले ब्रॉडगेज में तब्दील हो चुका है। पूर्वोत्तर रेलवे का ऐशबाग वाया सीतापुर-लखीमपुर मीटर गेज ट्रैक अब ब्रॉडगेज में परिवर्तित किया जा रहा है। ऐशबाग-सीतापुर तक ट्रैक मीटर गेज से ब्रॉडगेज में तब्दील हो चुका है। इस रूट पर चार जोड़ी ट्रेनें भी दौड़ने लगी हैं।
सीतापुर-लखीमपुर-मैलानी-पीलीभीत ट्रैक को मीटर गेज से ब्रॉडगेज बदलने का कार्य भी अंतिम चरण में है। सीतापुर-लखीमपुर तक आमान परिवर्तन कार्य पूरा होने के बाद सीआरएस मुआयना भी हो चुका है। 10 अगस्त से इस ट्रैक पर रेल सेवा शुरू होने की उम्मीद है।
इस ट्रैक पर मालगाड़ियां दौड़ाई भी जा चुकी हैं। इस समूचे ट्रैक का विद्युतीकरण भी कराने में महकमा जुटा है। रेल विद्युतीकरण में करीब अस्सी फीसदी फाउंडेशन कार्य पूरा कर लिया गया है। महज बीस फीसदी कार्य बचा है।
खंभे लगने के बाद बिछेगा तारों का जाल
मंगलवार को सीतापुर यार्ड में रेल विकास निगम लिमिटेड के साइट इंजीनियर अभय कांत झा और बीरेन्द्र सिंह की देखरेख में खंभे लगाने का काम कराया जा रहा है। इसके बाद विद्युत खंभों पर बिजली के तारों का जाल बिछाया जाएगा।
इसकी फिनिशिंग भी की जाएगी। यह कार्य लगभग तीन माह में पूरा होने की उम्मीद है। विद्युतीकरण के बाद वर्तमान ट्रेनों की स्पीड के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से ट्रेनें दौड़ने की उम्मीद है।