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Sitapur News: पिंजरा व मचान के आसपास मिले बाघिन के पगचिह्न

Mon, 24 Aug 2026 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Mon, 24 Aug 2026 12:55 AM IST
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Tigress pugmarks found near the cage and machan.
बाघिन को तलाश में कॉम्बिंग करते वनकर्मी। - संवाद 
संदना। कोडरीपुरवा में रविवार को पिंजरे और मचान के आसपास बाघिन के ताजा पगचिह्न मिले हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बाघिन पिंजरे तक पहुंची, लेकिन बाहर से ही लौट गई। मचान पर बैठकर बाघिन की गतिविधियों पर नजर रखने वाली वन विभाग की टीम की सक्रियता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
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बाघिन इलाके में घूम रही है, पर 39 दिन बाद भी वन विभाग उसे पकड़ नहीं पाया। इससे ग्रामीणों में दहशत के साथ आक्रोश भी बढ़ रहा है। मिश्रिख रेंज में बाघिन ने 15 जुलाई को रसुलवा निवासी किसान कमल किशोर पर हमला किया था। किसान की मौत हो गई थी। इसके बाद वन विभाग ने मधवापुर में कमांड सेंटर बनाते हुए पिंजरा व ट्रैप कैमरे लगाए।
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बाघिन को लालच देने के लिए पड़वा बांधा गया और निगरानी करने के लिए मचान भी बनाया गया। ड्रोन कैमरे के जरिये भी बाघिन की तलाश की जा रही है।

इन सारी कवायद के बाद भी बाघिन 39 दिनों से वन विभाग को चकमा देते हुए इलाके में स्वछंद होकर घूम रही है। अब तक दो बार वन विभाग की ओर से बांधे गए पड़वा का शिकार कर चुकी है। कमांड सेंटर के करीब एक बकरे को निवाला बना चुकी है।
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उधर, वन विभाग की कार्रवाई सिर्फ कॉम्बिंग करने तक तक ही सीमित है। रविवार को कोडरीपुरवा के आसपास फिर बाघिन के ताजा पगचिह्न मिले हैं। खास बात यह है कि पगचिह्न उसी क्षेत्र में मिले हैं, जहां पिछले दिनों वन विभाग की ओर से बांधे गए पड़वे को बाघिन मारकर गन्ने के खेत में ले गई थी। कोडरीपुरवा क्षेत्र में पिंजरा लगा है और मचान भी बनाया गया है। बाघिन लगातार इसी इलाके के आसपास विचरण कर रही है, लेकिन वन विभाग उसे पकड़ नहीं पा रहा है।


एक ही क्षेत्र में बार-बार उसकी मौजूदगी के संकेत मिलने के बाद अब ग्रामीण विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाघिन की सक्रियता के कारण पशुओं के लिए चारा लाना और खेती का काम करना मुश्किल हो गया है।
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