फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Tiger's footprints found near Lakhimpur border

लखीमपुर सीमा पास मिले बाघ के पगचिह्न

Mon, 24 Jan 2022 12:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 12:00 AM IST
विज्ञापन
Tiger's footprints found near Lakhimpur border
महोली इलाके के रुस्तम नगर कोल्हौरा के मध्य तेंदुआ के पगचिन्हो की जांच करती वन विभाग की टीम। - संवा? - फोटो : SITAPUR
महोली (सीतापुर)। पिछले पांच दिनों से महोली इलाके में जानवर की जारी चहलकदमी के बीच रविवार को मामले में नया मोड़ सामने आया है। लखीमपुर खीरी जिले की सीमा के करीबी गांव के पास रविवार को फिर से नए पग चिह्न पाए गए हैं। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने पग चिह्नों को देेखने के बाद तेंदुए की जगह बाघ की पुष्टि की है। इससे इलाके में दहशत और बढ़ गई है।
विज्ञापन

हालांकि, वन विभाग की टीम लोगों को जागरूक करते हुए एहतियात बरतने की अपील कर रही है। महोली इलाके में पांच दिन पूर्व चंद्रा गांव के करीब कठिना नदी की तलहटी में जंगली जानवर के पग चिह्न पाए गए थे। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने पग चिह्नों के आधार पर जानवर के तेंदुआ होने की बात कही थी। पिछले पांच दिनों से क्षेत्र में तेंदुआ की चहलकदमी हो रही थी।
विज्ञापन

वन विभाग की टीम की कांबिंग में अलग-अलग स्थानों पर तेंदुआ के नए पग चिह्न पाए जा रहे थे, इससे आसपास के लोगों के अलावा वन विभाग की टीम भी हैैरान-परेशान थी। गुरुवार को टीम को लखीमपुर की ओर जाते हुए तेंदुआ के पग चिह्न हरैया फत्तेपुर गांव के पास मिले थे, लेकिन रविवार को वन विभाग टीम की कांबिंग में महोली इलाके के आखिरी और लखीमपुर के करीबी जिले की सीमा पर बसे गांव रुस्तमनगर कोल्हौरा के बीच नदी की तलहटी में नए पग चिह्न मिले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

वन दरोगा राहुल यादव ने बताया कि बारिश के बाद रविवार को रुस्तम नगर कोल्हौरा के मध्य नदी की तलहटी में जो नए पग चिह्न पाए गए हैं, वह 12-13 सेंटीमीटर आयताकार हैं। पग मार्क की नाप-जोख करने के बाद तेंदुआ नहीं बल्कि बाघ के पग चिह्न लग रहे हैं। रुस्तम नगर-कोल्हौरा गांव के बीच नदी के किनारे-किनारे लखीमपुर की सीमा की तरफ बाघ बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि मादा बाघ के पग चिह्न वर्गाकार होते हैं, जबकि नर बाघ के पग चिह्न आयताकार होते हैं। अभी तक बाघ द्वारा कोई शिकार का साक्ष्य नहीं मिला है। वन विभाग की टीम लगातार लाइफ जैकेट पहनकर क्षेत्र में कांबिंग कर रही है।

लखीमपुर के दुधवा से आया बाघ
डीएफओ बीएम शुक्ला ने बताया कि सर्दियों के मौसम में लखीमपुर के दुधवा के जंगलों से बाघ आ जाते हैं। दुधवा में काफी बाघ हैं। अनुमान है कि यह वहीं से आया है। अब धीरे-धीरे लखीमपुर की ओर बढ़ रहा है। लोगों को जागरूक किया गया है। अकेले नहीं निकलने की अपील की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed