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Sitapur News: तालाबों में पानी नहीं, प्यासे भटक रहे पशु-पक्षी
Sun, 04 May 2025 12:50 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 04 May 2025 12:50 AM IST
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रामकोट क्षेत्र में सूखा पड़ा पियना तालाब। -संवाद
रामकोट (सीतापुर)। भीषण गर्मी में सभी के लिए पेयजल पहली जरूरत है। इसके लिए जहां आमजन हैंडपंप या अन्य विकल्प तलाशते दिखते हैं, वहीं पशु-पक्षियों के लिए तालाब-पोखर सहारा बनते हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी से क्षेत्र के तमाम तालाब सूखे पड़े हैं। निराश्रित गोवंश हों या अन्य पशु-पक्षी, पानी के लिए भटकते दिखते हैं।
विकास खंड पिसावां की ग्राम पंचायत बीहट गौर, लिल्सी व अर्थाना सहित कई गांवों में मनरेगा से खोदे गए तालाबों में पानी की जगह दरारें दिख रही हैं। इन दिनों तेज हवा के चलते आए दिन आग लगने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में तालाबों में पानी न होना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय है।
ग्रामीणों का कहना है कि आग लगने पर दमकल कर्मियों को पानी की जरूरत पड़ती है। अर्थाना के तीन तालाबों में पानी नहीं है। मनरेगा के तहत खोदा गया पियना तालाब इन दिनों सूखा पड़ा है।
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लोक रीतियां भी प्रभावित
अर्थाना के ग्रामीणों के अनुसार पियना तालाब मंदिर के किनारे होने के चलते और ज्यादा महत्व रखता है। गांव में कोई वैवाहिक कार्यक्रम होता है तो उसके उपरांत महिलाएं मंडप प्रवाह इसी तालाब में करती हैं लेकिन इन दिनों इसमें पानी न होने से लोक रीति पर भी असर पड़ रहा है। महिलाएं केवल औपचारिकता पूरी कर चली जाती हैं।
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विकास खंड पिसावां की ग्राम पंचायत बीहट गौर, लिल्सी व अर्थाना सहित कई गांवों में मनरेगा से खोदे गए तालाबों में पानी की जगह दरारें दिख रही हैं। इन दिनों तेज हवा के चलते आए दिन आग लगने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में तालाबों में पानी न होना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय है।
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ग्रामीणों का कहना है कि आग लगने पर दमकल कर्मियों को पानी की जरूरत पड़ती है। अर्थाना के तीन तालाबों में पानी नहीं है। मनरेगा के तहत खोदा गया पियना तालाब इन दिनों सूखा पड़ा है।
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लोक रीतियां भी प्रभावित
अर्थाना के ग्रामीणों के अनुसार पियना तालाब मंदिर के किनारे होने के चलते और ज्यादा महत्व रखता है। गांव में कोई वैवाहिक कार्यक्रम होता है तो उसके उपरांत महिलाएं मंडप प्रवाह इसी तालाब में करती हैं लेकिन इन दिनों इसमें पानी न होने से लोक रीति पर भी असर पड़ रहा है। महिलाएं केवल औपचारिकता पूरी कर चली जाती हैं।