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लकड़ी के पुल से गुजरते 20 गांवों के लोग
amar ujala
Updated Thu, 16 Feb 2017 12:08 AM IST
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करीब दो दशक से क्षेत्र के लोग छले जा रहे हैं। हर चुनाव में वोट मांगने वाले नेता केवानी नदी पर पुल बनवाने का वादा करते हैं। लेकिन जीतने के बाद लोग इस मुद्दे को भूल जाते हैं। मजबूर होकर लोग नदी पर बने पुराने लकड़ी के पुल की मरम्मत करते हैं और उस से फिर गुजरने लगते हैं।
अब चुनाव आया है, तब एक बार फिर से यह लकड़ी का पुल मुद्दा बन गया है। वोट मांगने आने वाले नेता फिर से वादा कर रहे हैं कि इस बार तो वे जरूर पक्का पुल बनवा देंगे। जिले के गांजरी इलाके सकरन क्षेत्र के बेलवा गांव के निकट केवानी नदी बहती है।
इस नदी पर लकड़ी का पुल बनाया गया है। इसी पुल से बिसवां और लहरपुर विधान सभा क्षेत्रों के ग्रामीण आवागमन करते हैं। क्षेत्र के कुछलैया, बेलवा, रंधीरपुर , ताजपुर सलौली, रौवापुर, बाचेपुर, मंडोर आदि करीब 20 गांवों के लोगों का प्रमुख मार्ग इसी पुल से होकर गुजरता है।
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भारी वाहन न सही, लेकिन लोग बाइक, साइकिल व पैदल इस पुल पर से होकर गुजरते हैं। यदि लोग पक्के पुल से होकर गुजरें तो उन्हें सकरन, लहरपुर,तंबौर, मतुवा और लालपुर बाजार जाने के लिए सांडा होकर एक लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इसमें उन्हें 10 से 15 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।
यही वजह है कि ज्यादातर लोग इसी पुल का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इस पर चलना भी कम जोखिम भरा नहीं है। पुल के किनारों पर रेलिंग की व्यवस्था नहीं है। इस कारण लोग जान जोखिम में डालकर अपना सफर तय करते हैं।
हाल ही में बेलवा ग्राम सभा के प्रधान राम खेलावन गौर ने निजी संसाधनों (लकड़ी के पटरे व बांस ) से इस पुल को दुरुस्त कराया है। इस पुल को हर साल बारिश में ठीक कराया जाता है। इसकी मरम्मत के लिए स्थानीय लोगों का भी सहयोग लिया जाता है।
लोग इस पुल के निर्माण में श्रमदान भी करते हैं। ग्राम ताजपुर के निवाशी महेश, बेलवा के अनुपम आदि ग्रामीणों का कहना है कि काश नेता अपने वादों पर खरा उतरते और वे लकड़ी के पुल की जगह पक्के पुल का निर्माण करते, तब लोगों को नदी पार करने के लिए जान जोखिम में न डालनी पड़ती।
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अब चुनाव आया है, तब एक बार फिर से यह लकड़ी का पुल मुद्दा बन गया है। वोट मांगने आने वाले नेता फिर से वादा कर रहे हैं कि इस बार तो वे जरूर पक्का पुल बनवा देंगे। जिले के गांजरी इलाके सकरन क्षेत्र के बेलवा गांव के निकट केवानी नदी बहती है।
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इस नदी पर लकड़ी का पुल बनाया गया है। इसी पुल से बिसवां और लहरपुर विधान सभा क्षेत्रों के ग्रामीण आवागमन करते हैं। क्षेत्र के कुछलैया, बेलवा, रंधीरपुर , ताजपुर सलौली, रौवापुर, बाचेपुर, मंडोर आदि करीब 20 गांवों के लोगों का प्रमुख मार्ग इसी पुल से होकर गुजरता है।
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भारी वाहन न सही, लेकिन लोग बाइक, साइकिल व पैदल इस पुल पर से होकर गुजरते हैं। यदि लोग पक्के पुल से होकर गुजरें तो उन्हें सकरन, लहरपुर,तंबौर, मतुवा और लालपुर बाजार जाने के लिए सांडा होकर एक लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इसमें उन्हें 10 से 15 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।
यही वजह है कि ज्यादातर लोग इसी पुल का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इस पर चलना भी कम जोखिम भरा नहीं है। पुल के किनारों पर रेलिंग की व्यवस्था नहीं है। इस कारण लोग जान जोखिम में डालकर अपना सफर तय करते हैं।
हाल ही में बेलवा ग्राम सभा के प्रधान राम खेलावन गौर ने निजी संसाधनों (लकड़ी के पटरे व बांस ) से इस पुल को दुरुस्त कराया है। इस पुल को हर साल बारिश में ठीक कराया जाता है। इसकी मरम्मत के लिए स्थानीय लोगों का भी सहयोग लिया जाता है।
लोग इस पुल के निर्माण में श्रमदान भी करते हैं। ग्राम ताजपुर के निवाशी महेश, बेलवा के अनुपम आदि ग्रामीणों का कहना है कि काश नेता अपने वादों पर खरा उतरते और वे लकड़ी के पुल की जगह पक्के पुल का निर्माण करते, तब लोगों को नदी पार करने के लिए जान जोखिम में न डालनी पड़ती।