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किसानों की मेहनत पर फिरने लगा पानी

Wed, 20 Oct 2021 12:09 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 12:09 AM IST
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The water started turning on the hard work of the farmers
सीतापुर के खैराबाद में आमखेड़ा गांव में बारिश से धान से भीगी भीगी धान की फसल। -संवाद - फोटो : SITAPUR
अच्छी पैदावार की थी उम्मीद
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महमूदाबाद क्षेत्र के किसान राम प्रसाद व तुलसी राम ने बताया कि लगातार हो रही बारिश ने धान की फसल बर्बाद कर दी है। प्रकृति का कोप कहर बनकर किसानों पर टूट रहा है। अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के माथे पर चिता की लकीरें गहराने लगी हैं। अगर बारिश बंद न हुई तो किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर जाएगा।
दिया जाए मुआवजा
ब्लॉक गोंदलामऊ के ग्राम जैनापुर निवासी किसान संतोष कुमार का कहना है कि लगभग आठ बीघा तिल्ली की फसल कर्ज लेकर बोई थी। लेकिन तेज हवा के साथ बारिश होने से तिल्ली खेतों में ही गिर गई है। फसल में पानी भरा है। कुछ दिन बाद उसमें अंकुर आना शुरू हो जाएगा। उन्होंने सरकार से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
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लागत निकालना मुश्किल
जैनापुर निवासी राजकुमार का कहना है कि बारिश के कारण कटी पड़ी धान की फसल खेत में सड़ने लगी है। धान की बालियों में अंकुर जमने लगे हैं। खेतों में पानी भरा है। इससे नुकसान और भी अधिक बढ़ जाएगा। अब तो लागत निकलना भी मुश्किल दिख रहा है।
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बर्बाद हुई फसल
महोली क्षेत्र के ढखिया निवासी किसान राम सिंह की एक एकड़ धान की कटी हुई फसल बारिश से भीगकर बर्बाद हो गई है। उनका कहना है कि एक एकड़ में धान की पौध लगाई थी। फसल तैयार होने तक करीब 20 हजार लागत आई थी। इस बार धान की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद थी। इससे तकरीबन 25 क्विंटल धान तैयार होता। इसकी अनुमानित कीमत 45 हजार से ऊपर होती। बारिश से नष्ट हुई फसल में लागत समेत 65 हजार का नुकसान होना तय है।
सीतापुर। जिले में दो दिन से हो रही बारिश व तेज हवा ने किसानों का बड़ा नुकसान कर दिया है। करीब 33 हजार हेक्टेअर धान की फसल खराब हो गई है। बारिश से धान की कटी फसल खेत में भीगने से संकट पैदा हो गया है। कुछ किसानों के खेतों में धान अंकुरित हो गया है। तिल, सरसों, गन्ना, केला, उर्द, मूंगफली, सब्जियों के किसानों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुदरत के कहर ने फसल से मुनाफा तो दूर, मेहनत व लागत पर ही पानी फेर दिया है। इससे छोटे किसानों के समक्ष संकट आ गया है।
जिले में खरीफ के तहत एक लाख 85 हजार 535 हेक्टेअर भूमि में धान की फसल बोई गई थी। फसल की कटाई हो रही है। दो दिन से हो रही बारिश ने किसानों की मेहनत व लागत पर पानी फेर दिया। जिन किसानों के खेत में कटी फसल पड़ी थी, उन्हेें अधिक नुकसान हुआ है। तमाम खेतों में पानी भर गया है।
महोली संवाद के अनुसार रविवार शाम को आई तेज आंधी के बाद लगातार हो रही बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई है। खासकर उन किसानों के लिए यह बारिश मुसीबत का कहर लेकर आई है, जिन्होंने धान की फसल काटकर सूखने के लिए खेतों में फैला रखी थी। लगातार हुई बारिश से उनकी कटी हुई धान की फसल जलमग्न हो गई। जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
पैलाकीशा व ढखिया निवासी किसान प्रताप सिंह, रामनाथ, सुंदरलाल, जसवंत, घनश्याम, धनीराम, रामसिंह, भगवती प्रसाद, देशराज महावीर ने बताया कि उन्होंने बारिश के दो दिन पूर्व अपनी फसल को काटकर खेतों में सूखने के लिए फैलाया था। अचानक आई तेज आंधी व लगातार हो रही बारिश से वह अपनी फसल को सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंचा सके।
मिश्रिख संवाद के अनुसार ग्राम जसरथपुर के उदय राज मिश्रा, कैलाश राठौर, ग्राम फुलवारी निवासी रामाधार, ग्राम शिवपुरी, किशनपुर, गंगापुर लखनापुर, वृंदावन, गणेशपुर, अकबरपुर आदि दर्जनों गांव के किसानों का धान खेतों में कटी पडी है। पानी भर जाने से नुकसान हो रहा है। बरसात के पूर्व सरसों बोई गई थी, पानी भर जाने से खराब हो गई।
पिसावां व महमूदाबाद संवाद के अनुसार लगातार हो रही बारिश से किसानों की अधिकतर फसल चौपट हो गई है। किसानों का कहना है कि जिन खेतों में पानी भर गया है, सरसों का जमाव नहीं होगा। गोंदलामऊ संवाद के अनुसार तेज बारिश व हवाओं के चलते कटी पड़ी तिल्ली की फसल खेतों में सड़ने लगी है।
सेउता संवाद के अनुसार किसान सोबरनलाल का कहना है कि उड़द की फसल में फूल आ रहा था। बारिश के चलते सारा फूल नष्ट हो गए। खैराबाद, मास्टरबाग व लहरपुर संवाद के अनुसार क्षेत्र में तीन दिनों से हो रही बारिश ने किसानों की तैयार धान की फसल को बर्बाद कर दी है।
जिला कृषि अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि तकरीबन पांच प्रतिशत धान की फसल की कटाई हुई है। खेतों में कटे पड़े धान को बारिश से अधिक नुकसान हुआ है।
धान की फसल को हो रहा नुकसान
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष वातावरण में अत्यधिक नमी होने व रुक-रुक कर बरसात होने से कडुंवा रोग ने धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। मशरूम उत्पादन के लिए खुले में तैयार हो रहे कंपोस्ट भीगने एवं पानी बाहर निकलने से पोषक तत्व बाहर जा रहे हैं। बारिश होने से आलू की बुआई भी नहीं हो पा रही है। जिन किसानों ने दो दिन पहले ही सरसों की बुआई की थी, उनके बीज जमीन में नष्ट हो रहे हैं।

खेत में जलनिकासी की करें व्यवस्था
मौसम की विषम परिस्थिति को देखते हुए किसान खेत में कटी हुई फसल न छोड़ें। तत्काल खेतों से जल निकासी की व्यवस्था करें। केले की फसल को बांस से सहारा देकर तनों को बांध दें। फसल की कटाई व सरसों की बुआई को तत्काल रोक दें। खुले में पड़ी मशरूम कंपोस्ट को पॉलीथिन से ढक दें। गन्ने की बंधाई कर दें। मौसम साफ होने पर ही आलू की बुआई करें। फसल बीमा कराया है तो 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी, जिला कृषि अधिकारी एवं क्षेत्रीय कृषि कर्मचारी को सूचित करें।
- डॉ. दया श्रीवास्तव, प्रभारी अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र कटिया
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