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Sitapur News: बाघ फिर खा गया पड़वा, ताकते रह गए अफसर
Thu, 18 Sep 2025 12:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 18 Sep 2025 12:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी महोली (सीतापुर)। नरनी गांव में किसान को निवाला बनाने वाला बाघ अब तक पकड़ से दूर है। कमांड सेंटर बनाकर वन विभाग व दुधवा टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञ उसे ट्रेंकुलाइज करने की फिराक में हैं, लेकिन हर बार बाघ उन्हें चकमा दे रहा है।
वन कर्मियों की ओर से बांधा गया चौथा पड़वा भी मंगलवार रात बाघ खा गया लेकिन वह पकड़ में नहीं आ सका। कमांड सेंटर से महज 200 मीटर की दूरी पर बंधे पड़वे काे निवाला बनाने की खबर से ग्रामीण दहशत में हैं। डीएफओ नवीन खंडेलवाल का कहना है कि बाघ ने चार नहीं तीन पड़वों का शिकार किया है। जल्द उसे पकड़ा जाएगा। नरनी गांव में 22 अगस्त को किसान सौरभ को बाघ ने निवाला बनाया था। इसके बाद दुधवा टाइगर रिजर्व व वन विभाग लाव-लश्कर के साथ गांव की पीएचसी में डेरा जमाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद वन विभाग द्वारा दो बार में पांच पड़वे खरीदे गए थे, जिनमें तीन पड़वे अलग-अलग स्थानों पर बांधे गए थे। दो को कमांड सेंटर में रखा गया था। इसमें से बाघ ने सबसे पहले सीतारामपुर के पास बंधे पड़वे का शिकार किया था। इसके बाद विभाग ने पिंजरे की लोकेशन बदलकर नरनी गांव के निकट बरगद के पेड़ के नीचे लगाया था। इसके कुछ दूरी पर पड़वा बांधा गया था। पिछले एक सप्ताह में बाघ ने पिंजरे वाले स्थान के करीब बांधे गए दो और पड़वों को निवाला बना लिया।
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सूत्र बताते हैं कि इसके बाद विशेषज्ञों व वन विभाग की टीम ने शिकार वाले स्थान के पास बाघ की निगरानी की। मंगलवार रात बाघ ने चौथे पड़वे का शिकार कर लिया, लेकिन टीम उसे पकड़ नहीं सकी। इससे ग्रामीणों में दहशत है। डीएफओ नवीन खंडेलवाल का कहना है कि बाघ ने अब तक तीन पड़वों का ही शिकार किया है। जल्द उसे पकड़ा जाएगा। झाड़ियों की वजह से अभियान में दिक्कत आ रही है।
वनरोज के मिले अवशेष तेंदुए के हमले की आशंका
पिसावां (सीतापुर)। चौखड़िया गांव में गोमती नदी के किनारे बुधवार को वनरोज के बच्चे के अवशेष मिलने से हड़कंप मच गया। प्रधान आमिर खान की सूचना पर वन दरोगा विनीत सक्सेना टीम के साथ वहां पहुंचे। बताया जाता है कि टीम आने के पहले जंगली जानवर उन अवशेषों को भी उठा ले गया। ग्रामीणों ने तेंदुए के हमले की आशंका जताई है। वहीं टीम के काफी प्रयास के बावजूद जंगली जानवर की लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी।
वन दरोगा ने बताया कि नदी किनारे घनी झाड़ियां और घास होने के कारण जंगली जानवर का पता लगाना मुश्किल हो रहा है। क्षेत्र में काॅम्बिंग जारी है, लेकिन कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। पिछले चार महीनों से गोमती नदी की कछार में तेंदुए की चहलकदमी से आसपास के कई गांवों में दहशत का माहौल है। प्रेमपुर गांव में तेंदुए ने कुछ दिनों पहले कुत्तों को शिकार बनाया था। चौखड़िया से दो किलोमीटर दूर भकुरहा पुल पर तेंदुआ देखे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ रात के समय सक्रिय होता है, जिससे लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं।
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वन कर्मियों की ओर से बांधा गया चौथा पड़वा भी मंगलवार रात बाघ खा गया लेकिन वह पकड़ में नहीं आ सका। कमांड सेंटर से महज 200 मीटर की दूरी पर बंधे पड़वे काे निवाला बनाने की खबर से ग्रामीण दहशत में हैं। डीएफओ नवीन खंडेलवाल का कहना है कि बाघ ने चार नहीं तीन पड़वों का शिकार किया है। जल्द उसे पकड़ा जाएगा। नरनी गांव में 22 अगस्त को किसान सौरभ को बाघ ने निवाला बनाया था। इसके बाद दुधवा टाइगर रिजर्व व वन विभाग लाव-लश्कर के साथ गांव की पीएचसी में डेरा जमाए हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद वन विभाग द्वारा दो बार में पांच पड़वे खरीदे गए थे, जिनमें तीन पड़वे अलग-अलग स्थानों पर बांधे गए थे। दो को कमांड सेंटर में रखा गया था। इसमें से बाघ ने सबसे पहले सीतारामपुर के पास बंधे पड़वे का शिकार किया था। इसके बाद विभाग ने पिंजरे की लोकेशन बदलकर नरनी गांव के निकट बरगद के पेड़ के नीचे लगाया था। इसके कुछ दूरी पर पड़वा बांधा गया था। पिछले एक सप्ताह में बाघ ने पिंजरे वाले स्थान के करीब बांधे गए दो और पड़वों को निवाला बना लिया।
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सूत्र बताते हैं कि इसके बाद विशेषज्ञों व वन विभाग की टीम ने शिकार वाले स्थान के पास बाघ की निगरानी की। मंगलवार रात बाघ ने चौथे पड़वे का शिकार कर लिया, लेकिन टीम उसे पकड़ नहीं सकी। इससे ग्रामीणों में दहशत है। डीएफओ नवीन खंडेलवाल का कहना है कि बाघ ने अब तक तीन पड़वों का ही शिकार किया है। जल्द उसे पकड़ा जाएगा। झाड़ियों की वजह से अभियान में दिक्कत आ रही है।
वनरोज के मिले अवशेष तेंदुए के हमले की आशंका
पिसावां (सीतापुर)। चौखड़िया गांव में गोमती नदी के किनारे बुधवार को वनरोज के बच्चे के अवशेष मिलने से हड़कंप मच गया। प्रधान आमिर खान की सूचना पर वन दरोगा विनीत सक्सेना टीम के साथ वहां पहुंचे। बताया जाता है कि टीम आने के पहले जंगली जानवर उन अवशेषों को भी उठा ले गया। ग्रामीणों ने तेंदुए के हमले की आशंका जताई है। वहीं टीम के काफी प्रयास के बावजूद जंगली जानवर की लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी।
वन दरोगा ने बताया कि नदी किनारे घनी झाड़ियां और घास होने के कारण जंगली जानवर का पता लगाना मुश्किल हो रहा है। क्षेत्र में काॅम्बिंग जारी है, लेकिन कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। पिछले चार महीनों से गोमती नदी की कछार में तेंदुए की चहलकदमी से आसपास के कई गांवों में दहशत का माहौल है। प्रेमपुर गांव में तेंदुए ने कुछ दिनों पहले कुत्तों को शिकार बनाया था। चौखड़िया से दो किलोमीटर दूर भकुरहा पुल पर तेंदुआ देखे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ रात के समय सक्रिय होता है, जिससे लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं।