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Sitapur News: पहुंचा बावन डंडे का ताजिया
Sun, 06 Jul 2025 11:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 06 Jul 2025 11:35 PM IST
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खैराबाद (सीतापुर)। कौमी एकता के प्रतीक ऐतिहासिक बावन डंडे का ताजिया रविवार को रौजा दरवाजा की युसूफ खान गाजी की दरगाह के बाहर बने चौक पर पहुंचा। यहां अकीदतमंदों ने फूलमाला, लइय, खुटिया व शरबत चढ़ाकर मन्नतें मांगीं।
यहां का बावन डंडे का ताजिया विदेशों तक प्रसिद्ध है। मुहर्रम पर नगर के रौजा दरवाजा स्थित युसूफ खान गाजी की दरगाह परिसर में बावन डंडे का ताजिया बनाने का काम शुरू होता है। ताजिये के बारे में कहा जाता है कि इसकी शुरुआत में 400 वर्ष पूर्व नगर के बावन मोहल्लों से एक-एक डंडा आकर लगाया जाता था। इसलिए यह बावन डंडे का ताजिये के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
ताजिया कमेटी के अध्यक्ष जावेद मुस्तफा उर्फ टीटू ने बताया कि यह कौमी एकता का गुलदस्ता है। यह ताजिया रविवार को दरगाह के बाहर बने चौक पर आ गया। अकीदतमंद ताजिया की झलक पाने को बेताब दिखे। हिंदू-मुस्लिम सभी ने ताजिया पर फूलमाला, लइया, खुटिया, शरबत चढ़ाकर मन्नतें मांगी। उसके बाद देर शाम को बिसवां रोड से मिठाई वाली गली से होते हुए देर रात दादा मियां दरगाह पर विश्राम उसके बाद सात जुलाई को देर शाम कर्बला में हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी में सुपर्द-ए-खाक किया जाएगा।
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यहां का बावन डंडे का ताजिया विदेशों तक प्रसिद्ध है। मुहर्रम पर नगर के रौजा दरवाजा स्थित युसूफ खान गाजी की दरगाह परिसर में बावन डंडे का ताजिया बनाने का काम शुरू होता है। ताजिये के बारे में कहा जाता है कि इसकी शुरुआत में 400 वर्ष पूर्व नगर के बावन मोहल्लों से एक-एक डंडा आकर लगाया जाता था। इसलिए यह बावन डंडे का ताजिये के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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ताजिया कमेटी के अध्यक्ष जावेद मुस्तफा उर्फ टीटू ने बताया कि यह कौमी एकता का गुलदस्ता है। यह ताजिया रविवार को दरगाह के बाहर बने चौक पर आ गया। अकीदतमंद ताजिया की झलक पाने को बेताब दिखे। हिंदू-मुस्लिम सभी ने ताजिया पर फूलमाला, लइया, खुटिया, शरबत चढ़ाकर मन्नतें मांगी। उसके बाद देर शाम को बिसवां रोड से मिठाई वाली गली से होते हुए देर रात दादा मियां दरगाह पर विश्राम उसके बाद सात जुलाई को देर शाम कर्बला में हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी में सुपर्द-ए-खाक किया जाएगा।
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