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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   The lack of facilities in the entrepreneur suffering

सुविधाओं के अभाव में उद्यमी बेहाल

Thu, 20 Aug 2015 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सीतापुर
अमर उजाला ब्यूरो/ सीतापुर Updated Thu, 20 Aug 2015 11:43 PM IST
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जिले का पहला औद्योगिक क्षेत्र खैराबाद में 1965 में स्थापित किया गया। यह औद्योगिक क्षेत्र 10 एकड़ भूभाग पर है। मौजूदा समय में यहां चारों ओर बदहाली का बोलबाला है। सुरक्षा के नजरिए से न यहां बाउंड्री है और न गेट दुरुस्त है। पूर्व में कई बार यहां चोरियां भी हो चुकी हैं। बावजूद इसके सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया।
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सड़क पर गहरे-गहरे गड्ढे हो गए हैं। जिनमें जलभराव बना रहता है। वाहन चालकों को गड्ढा नजर नहीं आता और अक्सर वाहन पलट जाते हैं। इस कारण कोई वाहन चालक यहां आने को जल्दी राजी नहीं होता है। ट्रांसपोर्ट सुविधा न मिलने से माल लाने व ले जाने में उद्यमियों को दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। यहां प्रवेश करने के तीन अलग-अलग रास्तों पर गेट लगाए गए थे। आज यह सभी गेट खंडहर बन चुके हैं। विद्युत आपूर्ति का संकट उद्यमियों पर भारी पड़ रहा है। तमाम तरह की समस्याओं से जूझ रहे खैराबाद औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों ने कई बार अफसरों से शिकायत दर्ज कराई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
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औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों की स्थिति
खैराबाद औद्योगिक क्षेत्र में छोटे व मझोले किस्म की कुल 17 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। इनमें ज्यादातर दरी उद्योग की यूनिटें हैं। इसके अलावा चावल व स्टील की अलमारी बनाने वाली मिलें हैं। एक मिनी प्लाईवुड फ्रैक्टी भी है। उद्यमियों की सबसे बड़ी समस्या यहां कच्चा माल न मिलना है। हरियाणा व पंजाब आदि गैर प्रांतों से कच्चा माल लाना पड़ता है। इस वजह से लागत बढ़ जाती है।
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कागजों पर चल रहा यूपी हैंडलूम सूत बिक्री केंद्र
यहां 90 के दशक में यूपी हैंडलूम का सूत बिक्री केंद्र गुलजार हुआ करता था। सूत यहीं से मिल जाने पर दरी उद्योग संचालन में आसानी रहती थी। उद्यमियों को कच्चा माल बाहर से नहीं लाना पड़ता था। इससे लागत कम आती थी। दरी तैयार करने के बाद उद्यमी का माल भी इस केंद्र पर खरीद लिया जाता था। वर्ष 1998 में यह केंद्र बंद हो गया। हालांकि सूत्रों के मुताबिक यह सूत बिक्री केंद्र्र कागजों पर आज भी संचालित है।

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रात में लगता अपराधियों का जमावड़ा
बंद यूनिट व खाली टीन शेडो पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। सुरक्षा गार्ड न होने से रात में यहां अपराधियों का जमावड़ा लगता है। सूत्रों के अनुसार अपराधी यहां एकत्र होकर अपराधों को अंजाम देने की योजनाएं बनाते हैं। उद्यमियों ने अवैध कब्जा हटवाने के लिए कई बार डीएम कार्यालय व जिला उद्योग केंद्र में शिकायत की, पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।

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मूलभूत सुविधाओं के बगैर होती दिक्कतें
औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के वक्त यहां जो काम कराए गए, आज भी उन्हीं के सहारे उद्यमी अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। स्थापना के बाद से न सड़कों का जीर्णोद्घार कराया गया और न ही आज तक सुरक्षा के लिहाज से बाउंड्री बनवाई जा सकी है। स्ट्रीट लाइटें न होने से शाम ढलते ही यहां अंधेरा पसर जाता है। बुनियादी सुविधाओं के लिए कई बार जिम्मेदारों से कहा गया, पर नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा।
इश्तियाक हुसैन, अध्यक्ष औद्योगिक विकास समिति खैराबाद

शासन नहीं उठा रहा ठोस कदम
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए शासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। देश-विदेश में सीतापुर की पहचान बनाने वाला दरी उद्योग शासन-प्रशासन की उपेक्षा से अंतिम सांसे ले रहा है। सबसे बड़ी समस्या बिजली न मिलना है। औद्योगिक क्षेत्र को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति का दावा किया जा रहा है। लेकिन बमुश्किल 12 से 14 घंटे बिजली मिल पाती है। वह भी किस्तों में दी जाती है।

 आमिर अंसारी, दरी उद्योग संचालक
 
दरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए स्थापित होगा कलस्टर
सड़के दुरुस्त कराने के लिए इस्टीमेट बनाकर पीडब्ल्यूडी को भेजा गया है। बजट मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। खैराबाद के दरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कलस्टर स्थापित करने की भूमिका बनाई जा रही है। इसके लिए जल्द ही व्यापारियों की बैठक बुलाई जाएगी।
अशोक कुमार श्रीवास्तव, उपायुक्त उद्योग
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