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दो ब्लॉक प्रमुखों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में फंसा पेच
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सीतापुर। पहला और महमूदाबाद ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव में पेच फंस गया है। इसकी पूरी प्रक्रिया पर नए अध्यादेश के बाद असमंजस की स्थिति है। प्रशासनिक अधिकारी भी फिलहाल यह साफ नहीं कर पा रहे हैं कि अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया आगे बढ़ेेगी अथवा इसे स्थगित करना पड़ेगा। इस मामले में कार्रवाई को लेकर अब शासन स्तर से दिशा निर्देश मांगा गया है। इसके चलते इन दोनों ही ब्लॉक में प्रमुख की कुर्सी को हथियाने व बचाने की रस्साकसी भी चरम पर दिखने लगी है।
नए अध्यादेश के तहत जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के नियमों में बदलाव किया गया है। अब तक जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव निर्वाचन के एक साल बाद लाया जा सकता था।
बीते दिनों हुए संशोधन के बाद अब इस एक साल की मियाद को बढ़ाकर दो साल कर दिया गया है। साथ ही अविश्वास प्रस्ताव लाने के समर्थन में अब दो तिहाई सदस्यों की सहमति भी जरूरी हो गई है। पूर्व में इसके लिए आधे से अधिक सदस्यों की सहमति ही होती थी। राज्यपाल की मंजूरी के बाद नया अध्यादेश लागू हो जाने के बाद जिले के पहला और महमूदाबाद ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ चल रही अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया में पेंच फंस गया है।
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दोनों ही ब्लॉक में सपा समर्थित ब्लॉक प्रमुखों के खिलाफ 29 सितंबर को बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए इस संबंध में डीएम को एक हलफनामा भी सौंपा था। डीएम ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए पहला ब्लॉक में 18 अक्तूबर और महमूदाबाद ब्लॉक में 20 अक्तूबर की तारीख भी निर्धारित कर दी है।
इस बीच नया अध्यादेश लागू हो गया। चूंकि दोनों ही ब्लॉक में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा चुका है और डीएम ने प्रस्ताव पर चर्चा व मतदान के लिए प्रस्तावित बैठक की तिथि भी घोषित कर दी है तो ऐसे में प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी अथवा प्रक्रिया स्थगित करना होगी, इसे लेकर संशय की स्थिति व्याप्त है। डीएम अनुज सिंह का कहना है कि अब इस मामले में शासन स्तर से दिशा निर्देश लेकर ही आगे की प्रक्रिया तय होगी। इससे दोनों ही ब्लॉक में प्रमुख की कुर्सी को लेकर चल रही चर्चाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है।
कुर्सी हथियाने को भाजपा खेमा मोर्चाबंदी में जुटा
जिले के कुल 19 ब्लॉक में से सिर्फ पहला और महमूदाबाद में ही सपा समर्थित ब्लॉक प्रमुख हैं। इन दोनों ब्लॉक के प्रमुखों की कुर्सी हथियाने को लेकर भाजपा खेमा पूरी तरह मोर्चाबंदी में जुटा है। विगत 29 सितंबर को महमूदाबाद विधायक आशा मौर्या व भाजपा जिलाध्यक्ष अचिन मेहरोत्रा की अगुवाई में बीडीसी सदस्यों ने डीएम से मुलाकात कर शपथ पत्र सौंपते हुए अविश्वास लाए जाने की इजाजत मांगी थी। महमूदाबाद में 83 बीडीसी हैं, इनमें से 63 सदस्यों जबकि पहला में 95 के सापेक्ष 65 सदस्यों ने अविश्वास व्यक्त किया है।
पहला और महमूदाबाद ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। डीएम ने इस पर चर्चा के लिए बैठक की तारीख भी घोषित कर दी है। इसी बीच नया अध्यादेश आ जाने के बाद अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए अथवा स्थगित किया जाए, इस पर कोई भी निर्णय शासन के निर्देशानुसार ही तय होगा।
मनोज कुमार, डीपीआरओ
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नए अध्यादेश के तहत जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के नियमों में बदलाव किया गया है। अब तक जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव निर्वाचन के एक साल बाद लाया जा सकता था।
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बीते दिनों हुए संशोधन के बाद अब इस एक साल की मियाद को बढ़ाकर दो साल कर दिया गया है। साथ ही अविश्वास प्रस्ताव लाने के समर्थन में अब दो तिहाई सदस्यों की सहमति भी जरूरी हो गई है। पूर्व में इसके लिए आधे से अधिक सदस्यों की सहमति ही होती थी। राज्यपाल की मंजूरी के बाद नया अध्यादेश लागू हो जाने के बाद जिले के पहला और महमूदाबाद ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ चल रही अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया में पेंच फंस गया है।
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दोनों ही ब्लॉक में सपा समर्थित ब्लॉक प्रमुखों के खिलाफ 29 सितंबर को बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए इस संबंध में डीएम को एक हलफनामा भी सौंपा था। डीएम ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए पहला ब्लॉक में 18 अक्तूबर और महमूदाबाद ब्लॉक में 20 अक्तूबर की तारीख भी निर्धारित कर दी है।
इस बीच नया अध्यादेश लागू हो गया। चूंकि दोनों ही ब्लॉक में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा चुका है और डीएम ने प्रस्ताव पर चर्चा व मतदान के लिए प्रस्तावित बैठक की तिथि भी घोषित कर दी है तो ऐसे में प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी अथवा प्रक्रिया स्थगित करना होगी, इसे लेकर संशय की स्थिति व्याप्त है। डीएम अनुज सिंह का कहना है कि अब इस मामले में शासन स्तर से दिशा निर्देश लेकर ही आगे की प्रक्रिया तय होगी। इससे दोनों ही ब्लॉक में प्रमुख की कुर्सी को लेकर चल रही चर्चाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है।
कुर्सी हथियाने को भाजपा खेमा मोर्चाबंदी में जुटा
जिले के कुल 19 ब्लॉक में से सिर्फ पहला और महमूदाबाद में ही सपा समर्थित ब्लॉक प्रमुख हैं। इन दोनों ब्लॉक के प्रमुखों की कुर्सी हथियाने को लेकर भाजपा खेमा पूरी तरह मोर्चाबंदी में जुटा है। विगत 29 सितंबर को महमूदाबाद विधायक आशा मौर्या व भाजपा जिलाध्यक्ष अचिन मेहरोत्रा की अगुवाई में बीडीसी सदस्यों ने डीएम से मुलाकात कर शपथ पत्र सौंपते हुए अविश्वास लाए जाने की इजाजत मांगी थी। महमूदाबाद में 83 बीडीसी हैं, इनमें से 63 सदस्यों जबकि पहला में 95 के सापेक्ष 65 सदस्यों ने अविश्वास व्यक्त किया है।
पहला और महमूदाबाद ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। डीएम ने इस पर चर्चा के लिए बैठक की तारीख भी घोषित कर दी है। इसी बीच नया अध्यादेश आ जाने के बाद अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए अथवा स्थगित किया जाए, इस पर कोई भी निर्णय शासन के निर्देशानुसार ही तय होगा।
मनोज कुमार, डीपीआरओ