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मिटने की कगार पर फौजदारपुरवा का अस्तित्व
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रेउसा (सीतापुर)। गांजरी इलाके में एक बार फिर से बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं। शुक्रवार को बैराजों से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी से गांजर के बाशिदों की धड़कनें बढ़ गई हैं। देर रात तक पानी के शारदा और सरयू नदी में पहुंचने से जलस्तर काफी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। नदियों के उफनाने से बाढ़ का संकट लोगों के सामने खड़ा हो सकता है। वहीं, गुरुवार की रात घाघरा ने तीन परिवारों की खाली पड़ी मकान की जमीन को निगल लिया। तीन और मकान नदी के मुहाने पर हैं। फौजदारपुरवा गांव का अस्तित्व मिटने की कगार पर है। गांव के बाहर बने प्राथमिक विद्यालय पर संकट मंडराने लगा है। रात में स्कूल की बाउंड्रीवाल नदी में समा गई।
पिछले कुछ दिनों से तराई इलाके में नदियां शांत थी, इससे गांजर के लोग सुकून में थे, लेकिन बाढ़ का खतरा बरकरार था। बीते तीन दिनों से हालात फिर से बिगड़ने लगे हैं। बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने से नदियों का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। शुक्रवार को बनबसा, शारदा और गिरिजा बैराजों से दो लाख 70 हजार 55 क्यूूसेक पानी तराई इलाके में शारदा और सरयू नदी में छोड़ा गया है। बनबसा से 35 हजार 795, शारदा से 1 लाख 9 हजार 35, गिरजा से एक लाख 25 हजार 721 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हालांकि, यह पानी अभी तक गांजर में नहीं पहुंचा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि बैराजों से छोड़ा गया पानी रात 12 बजे तक शारदा और सरयू नदी में आ जाएगा, इसके बाद नदियों के उफनाने से गांजर में बाढ़ के हालात नजर आ सकते हैं। हालांकि, जिम्मेदार बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं होने की बात कह रहे हैं। जलस्तर बढ़ने से कटान में कमी हो रही है।
बताते हैं कि परमेश्वर पुरवा के भगौती, रमेश दोनों पक्के मकान, धनीराम झोपड़ी छोड़कर बाढ़ के डर से 15 दिन पहले ही यहां से पलायन कर गए थे, लेकिन उनके घरों की जो जमीन यहां पर बची थी, उसे गुरुवार की रात कटान कर रही घाघरा लील गई है। जबकि गांव के सियाराम, नरेश,श्रीकेशन आदि लोगों मकानों घाघरा के मुहाने पर हैं। ऐसे में कटान के डर से इन लोगों ने अपना समेटकर पलायन की तैयारी शुरू कर दी है। इलाके के जटपुरवा, मेवड़ी छोलहा, चौकीपुरवा, दर्जिनरेती आदि गांवों के पास परती पड़ी जमीनों को अहिस्ता-अहिस्ता घाघरा निगल रही है। इलाके के फौजदारपुरवा में बना प्राथमिक स्कूल की बाउंड्रीवाल गुरुवार की देर रात नदी की लहरों में समा गई। ऐसे में स्कूल पर संकट खड़ा हो गया है। फौजदारपुरवा प्राथमिक स्कूल के हेड मास्टर हेड मास्टर कमरुल हसन ने बताया कि स्कूल को तोड़ा नहीं जा सकता है, जब तक एक भी कमरा रहेगा उसकी देखभाल की जाती रहेगी। बताया कि हां, बाढ़ और कटान के डर से स्कूल में रखे सामान को यहां से निकालकर लोधनपुरवा प्राथ्रमिक विद्यालय में रखा गया है। बताया कि वह रोजाना स्कूल जाकर निगरानी कर रहे हैं।
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वहीं फौजदारपुरवा गांव का अस्तित्व भी मिटने की कगार पर है। गौलोक कोड़र सर्किल देख रहे बिसवां तहसील के लेखपाल सदानंद बताते हैं कि फौजदारपुरवा गांव में कुल 100 घर थे, जहां पर करीब 600 की आबादी रहती है। लेखपाल का कहना है कि अब तक घाघरा नदी 65 घरों को लील चुकी है, इसमें से 20 मकान पक्के हैं। बाकी झोपड़ी और कच्चे मकान हैं। 65 मकानों के नदी में समा जाने की रिपोर्ट प्रशासन को भेजी जा चुकी है। 35 घर बचे थे, जिसमें रह रहे 31 परिवार बाढ़ और कटान के डर से पहले ही पलायन कर चले गए हैं। बताया कि गांव में अभी चार परिवार शोभाराम, जनकलाल, सिपाही, गयाप्रसाद, जगदीश परिवार के साथ हैं, लेकिन बाढ़ के डर से इन लोगों ने भी पलायन करने की तैयारी शुरू कर दी है। समान समेटना शुरू कर दिया है।
पलायन कर फौजदारपुरवा के लोगों ने यहां डाला डेरा
फौजदारपुरवा से पलायन कर जाने वाले लोगों ने फौजदारपुरवा-आजादनगर संपर्क मार्ग पर डेरा डाला हैं। कुछ लोगों ने आशरामपुरवा मार्ग पर, बजहा, गौढ़ी के डेरा डालकर तंबू तानकर रह रहे हैं।
बैराजों से शुक्रवार को 2 लाख 70 हजार से अधिक क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। देर रात पानी आ जाएगा, इससे जलस्तर बढ़ने की पूरी उम्मीद है। हालांकि अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं। लेखपाल बराबर नजर बनाए हुए हैं। कटान में मामूली कमी आई है। पूरे हालात पर नजर रखी जा रही है। -ज्ञानेंद्र पांडेय, नायब तहसीलदार बिसवां
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पिछले कुछ दिनों से तराई इलाके में नदियां शांत थी, इससे गांजर के लोग सुकून में थे, लेकिन बाढ़ का खतरा बरकरार था। बीते तीन दिनों से हालात फिर से बिगड़ने लगे हैं। बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने से नदियों का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। शुक्रवार को बनबसा, शारदा और गिरिजा बैराजों से दो लाख 70 हजार 55 क्यूूसेक पानी तराई इलाके में शारदा और सरयू नदी में छोड़ा गया है। बनबसा से 35 हजार 795, शारदा से 1 लाख 9 हजार 35, गिरजा से एक लाख 25 हजार 721 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। हालांकि, यह पानी अभी तक गांजर में नहीं पहुंचा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि बैराजों से छोड़ा गया पानी रात 12 बजे तक शारदा और सरयू नदी में आ जाएगा, इसके बाद नदियों के उफनाने से गांजर में बाढ़ के हालात नजर आ सकते हैं। हालांकि, जिम्मेदार बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं होने की बात कह रहे हैं। जलस्तर बढ़ने से कटान में कमी हो रही है।
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बताते हैं कि परमेश्वर पुरवा के भगौती, रमेश दोनों पक्के मकान, धनीराम झोपड़ी छोड़कर बाढ़ के डर से 15 दिन पहले ही यहां से पलायन कर गए थे, लेकिन उनके घरों की जो जमीन यहां पर बची थी, उसे गुरुवार की रात कटान कर रही घाघरा लील गई है। जबकि गांव के सियाराम, नरेश,श्रीकेशन आदि लोगों मकानों घाघरा के मुहाने पर हैं। ऐसे में कटान के डर से इन लोगों ने अपना समेटकर पलायन की तैयारी शुरू कर दी है। इलाके के जटपुरवा, मेवड़ी छोलहा, चौकीपुरवा, दर्जिनरेती आदि गांवों के पास परती पड़ी जमीनों को अहिस्ता-अहिस्ता घाघरा निगल रही है। इलाके के फौजदारपुरवा में बना प्राथमिक स्कूल की बाउंड्रीवाल गुरुवार की देर रात नदी की लहरों में समा गई। ऐसे में स्कूल पर संकट खड़ा हो गया है। फौजदारपुरवा प्राथमिक स्कूल के हेड मास्टर हेड मास्टर कमरुल हसन ने बताया कि स्कूल को तोड़ा नहीं जा सकता है, जब तक एक भी कमरा रहेगा उसकी देखभाल की जाती रहेगी। बताया कि हां, बाढ़ और कटान के डर से स्कूल में रखे सामान को यहां से निकालकर लोधनपुरवा प्राथ्रमिक विद्यालय में रखा गया है। बताया कि वह रोजाना स्कूल जाकर निगरानी कर रहे हैं।
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वहीं फौजदारपुरवा गांव का अस्तित्व भी मिटने की कगार पर है। गौलोक कोड़र सर्किल देख रहे बिसवां तहसील के लेखपाल सदानंद बताते हैं कि फौजदारपुरवा गांव में कुल 100 घर थे, जहां पर करीब 600 की आबादी रहती है। लेखपाल का कहना है कि अब तक घाघरा नदी 65 घरों को लील चुकी है, इसमें से 20 मकान पक्के हैं। बाकी झोपड़ी और कच्चे मकान हैं। 65 मकानों के नदी में समा जाने की रिपोर्ट प्रशासन को भेजी जा चुकी है। 35 घर बचे थे, जिसमें रह रहे 31 परिवार बाढ़ और कटान के डर से पहले ही पलायन कर चले गए हैं। बताया कि गांव में अभी चार परिवार शोभाराम, जनकलाल, सिपाही, गयाप्रसाद, जगदीश परिवार के साथ हैं, लेकिन बाढ़ के डर से इन लोगों ने भी पलायन करने की तैयारी शुरू कर दी है। समान समेटना शुरू कर दिया है।
पलायन कर फौजदारपुरवा के लोगों ने यहां डाला डेरा
फौजदारपुरवा से पलायन कर जाने वाले लोगों ने फौजदारपुरवा-आजादनगर संपर्क मार्ग पर डेरा डाला हैं। कुछ लोगों ने आशरामपुरवा मार्ग पर, बजहा, गौढ़ी के डेरा डालकर तंबू तानकर रह रहे हैं।
बैराजों से शुक्रवार को 2 लाख 70 हजार से अधिक क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। देर रात पानी आ जाएगा, इससे जलस्तर बढ़ने की पूरी उम्मीद है। हालांकि अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं। लेखपाल बराबर नजर बनाए हुए हैं। कटान में मामूली कमी आई है। पूरे हालात पर नजर रखी जा रही है। -ज्ञानेंद्र पांडेय, नायब तहसीलदार बिसवां