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Sitapur News: 50 मिनट तक खड़ी रही एंबुलेंस, रेफर करने के लिए जूझते रहे चिकित्सक

Thu, 19 Feb 2026 12:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Thu, 19 Feb 2026 12:19 AM IST
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The ambulance remained parked for 50 minutes, doctors struggled to refer the patient.
सीतापुर। नैमिषारण्य के ठाकुरनगर निवासी हरीश (40), पत्नी पूनम (38) और भाई रामू (27) पर बुधवार देर रात उनके भाई श्यामू ने मामूली विवाद में धारदार हथियार से हमला कर दिया। सूचना पर तीनों घायलों को गंभीर हालत में एंबुलेंस से सीएचसी नैमिषारण्य पहुंचाया गया। वहां परीक्षण के बाद चिकित्सक ने पूनम काे मृत घोषित कर दिया। वहीं, हरीश और रामू का उपचार शुरू किया। पांच मिनट बाद दोनों की हालात बिगड़ने लगी। इस पर चिकित्सकों ने दोनों को जिला अस्पताल रेफर करना चाहा। एंबुलेंस चालक ने चिकित्सकों को 108 मुख्यालय बात कर वहां से निर्देशित कराने के लिए कहा। इस कवायद में करीब 50 मिनट लग गए। तब तक हरीश की भी मौत हो गई। इसके बाद एंबुलेंस से रामू को जिला अस्पताल रेफर किया गया।
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घटना के बाद हरीश के सबसे बड़े पुत्र आर्यन (10) ने रात 8 बजकर 23 मिनट पर एंबुलेंस बुलाने के लिए 108 नंबर पर फोन मिलाया। सूचना पर वाहन संख्या यूपी 32 एफजी 2310 घायलों के घर पहुंची। तीनों घायलों को एंबुलेंस रात 8 बजकर 45 मिनट पर सीएचसी नैमिषारण्य लेकर पहुंची। माैजूद चिकित्सक डॉ. अयम मिश्रा ने एंबुलेंस से दोनों को जिला अस्पताल ले जाने के लिए कहा। इस पर एंबुलेंस चालक ने मुख्यालय से निर्देशित कराने को कहा। जब चिकित्सक के कहने पर आर्यन ने अपने फोन से 108 नंबर डायल किया तो उन्हें कुतुबनगर की एक एंबुलेंस उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाते हुए इस एंबुलेंस से हरीश और रामू को जिला अस्पताल भेजने के लिए मना कर दिया गया। इसके बाद सीएचसी में मौजूद एक व्यक्ति ने मिश्रिख के सीएचसी अधीक्षक डाॅ. प्रखर से एंबुलेंस चालक की फोन पर बात कराई।
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सीएचसी अधीक्षक के फटकारने पर एंबुलेंस चालक हरीश व रामू को जिला अस्पताल ले जाने के लिए तैयार हुआ। इस दौरान समय पर इलाज न मिलने से हरीश ने दम तोड़ दिया। इसके बाद रात 9 बजकर 40 मिनट पर रामू को जिला अस्पताल भेजा गया। इसके करीब पच्चीस मिनट बाद कुतुबनगर वाली एंबुलेंस सीएचसी पहुंची। सीएचसी में मौजूद लोग चर्चा करते रहे कि यदि समय पर हरीश को जिला अस्पताल ले जाते तो शायद उसकी जान बच जाती।
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श्यामू से डर कर कर छिप गए थे बच्चे
हरीश के सबसे बड़े पुत्र आर्यन ने बताया कि जब श्यामू ने उनके माता पिता व चाचा पर हमला किया तो वह काफी डर गए थे। डरकर आर्यन अपनी छोटी बहन तन्वी (9), भाई आरोह (7) व सबसे छोटी बहन आरोही (2.5) के साथ एक कोने में छिप गए। अपने चाचा श्यामू के भागने के बाद ही बच्चे बाहर आए और एंबुलेंस को फोन किया।


स्टॉफ नर्स ने बच्चों को संभाला
घटना के बाद हरीश के घर में उनके बच्चों को संभालने वाला कोई नहीं बचा। एंबुलेंस से बच्चे भी सीएचसी पहुंच गए थे। इस पर वहां मौजूद स्टॉफ नर्स मानसी ने बच्चों को दूध व बिस्किट देने के साथ ओढ़ने की चादर भी दी। वहीं, बच्चों की देखभाल करती नजर आई।
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