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दस हजार संक्रमितों ने घर में रहकर कोरोना को दी मात

Sun, 27 Jun 2021 11:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jun 2021 11:06 PM IST
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Ten thousand infected beat Corona by staying at home
सीतापुर। कोरोना काल में साहस, धैर्य और एहतियात की डोज से मरीज संक्रमण को पटकनी देकर जंग जीतने में कामयाब रहे। ऐसे में तीसरी लहर की सुगबुगाहट के बीच आपको घबराने की नहीं बल्कि बुलंद हौसलों से कोरोना के खिलाफ लड़ने की जरूरत है। यकीन मानिए, अगर आप ऐसा करने में कामयाब रहे तो दोनों लहरों को काबू करने के बाद तीसरी लहर को भी काबू में कर लेंगे। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में संक्रमित करीब दस हजार लोगों ने घर पर धैर्य और नियम का पालन करते हुए कोरोना से जंग जीत ली।
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जी हां, होम आइसोलेेशन में दोनों लहरों में कोरोना से जंग जीतने वाले मरीजों की बड़ी तादात इस बात की तस्दीक कर रही है। कोरोना की पहली लहर हो या फिर दूूसरी, इसका कहर सबने झेला है। शायद ही कोई ऐसा घर, परिवार हो जो इस मुश्किल दौर से नहीं गुजरा है। हर व्यक्ति पर विपदा पड़ी, लेकिन पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर का प्रकोप कई गुना अधिक रहा। कोरोना के चरम पर पहुंचने के दौरान अस्पतालों में बेड का संकट हो या फिर अचानक आई आक्सीजन की किल्लत, सभी को इसका सामना करना पड़ा।
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एक-एक बेड और एक ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए हाहाकार मचा रहा। ऐसे में कोरोना की चपेट में आने वाले करीब जिले के 10,064 ऐसे मरीज थे, जिन्होंने होम आइसोलेशन में कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए जंग जीती। ये संख्या कोरोना की दोनों लहरों में संक्रमित होने के बाद होम आइसोलेशन में ठीक हुए मरीजों की है। ऐसे में तीसरी लहर की आहट को लेकर लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि बस, आपको कोविड प्रोटोकॉल के सारे नियमों का पालन करना है।
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दूसरी लहर में ज्यादा हुए संक्रमित
जिले में पहली लहर की अपेक्षा कोरोना की दूसरी लहर में अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो पहली लहर में पांच हजार के करीब ही लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे, जबकि दूसरी लहर में सात हजार से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। कुल संक्रमितों की संख्या 12 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है।
सेहत के लिए संजीवनी बैक्टीरिया मुक्त वातावरण
कोरोना की दूसरी लहर में इलाज में मरीज के परिवेश की बड़ी भूमिका साबित हुई है। घर पर इलाज करने वाले मरीजों की रिकवरी भी बढ़ी। जानकारों की माने तो इसके पीछे की वजह है कि अस्पताल की तुलना में घर का वातावरण साफ यानी बैक्टीरिया मुक्त रहता है। इसी वजह से लोग जल्द रिकवर हो गए।

होम आइसोलेशन में ऐसे जीती जंग
होम आइसोलेशन में रहने के दौरान मरीज डरे नहीं। दिन में तीन बार शरीर का तापमान मापते रहे। प्लस ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन सेेचुरेशन देखते रहे। 94 तक रहा तो कोई परेशान होने की बात नहीं। घर के सभी सदस्यों से दूरी बनाकर रहे। समय-समय पर डॉक्टरों से सेहत के बारे में सलाह लेते रहे। घर में रहने के दौरान भी मास्क लगाए रहे।
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