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कनवर्जन कास्ट के बिल देने में शिक्षकों परेशान
सीतापुर / अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2015 11:45 PM IST
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मुख्य विकास अधिकारी का फरमान शिक्षकों के लिए मुसीबत बन गया है। सीडीओ ने शिक्षकों से पिछले वर्ष में मध्याह्न भोजन योजना के तहत खर्च हुए कनवर्जन कास्ट के बिल मांगे है। इसमें सब्जी, मसाले सहित अन्य खाद्य पदार्थों के बिल देने है। ऐसे में नया फरमान शिक्षकों के लिए दिक्कतें पैदा कर रहा है, क्यों कि उन्होंने इन सामाग्रियों को खरीदने के बाद बिल लिए नहीं थे। शिक्षकों का कहना है कि अगर इसके बिल लेने थे तो पहले जानकारी देनी थी। वहीं प्रधान भी इसमें रुचि नहीं ले रहे है।
मुख्य विकास अधिकारी शिवेंद्र सिंह ने शैक्षिक सत्र 2014-15 में खर्च हुई कनवर्जन कास्ट के बिल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। निर्देश मिलते ही शिक्षकों के होश उड़ गए है। शिक्षकों का कहना है अमूमन सब्जी व मसाले खरीदते वक्त बिल लिए नहीं लिए जाते है। वहीं ग्रामीण इलाकों में सब्जी वालों के पास बिल कहां होते है। यह फरमान अब सुनाया गया है जब शैक्षिक सत्र समाप्त हो चुका है। ऐसे में इन बिलों को दे पाना मुश्किल हो रहा है। वहीं अगर बिल लेने थे तो पहले निर्देश दिए जाते है। इसके अलावा प्रधान भी बिल नहीं दे रहे है। जबकि शिक्षकों को बिल जमा करना है।
बिल मांगे गए है
कनवर्जन कास्ट के तहत खर्च हुई धनराशि के बिल मुख्य विकास अधिकारी ने मांगे है। इसकी जानकारी शिक्षकों व ग्राम प्रधानों को दी जा चुकी है।
- बृजमोहन सिंह, जिला समन्यवक, एमडीएम
बर्दाश्त नहीं होगा उत्पीड़न
सब्जी व मसालों का बिल देना मुश्किल है। ग्राम प्रधान इसमें सहायता नहीं कर रहे है। प्रशासन को पहले ही जानकारी देनी चाहिए थी। अगर शिक्षकों का उत्पीड़न किया जाता है तो इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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राजकिशोर सिंह, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
सड़क पर उतरकर होगा आंदोलन
इन निर्देशों पर अमल करना मुश्किल है। पुराने बिल कहां से आएंगे यह बड़ी समस्या है। अगर बिल न प्रस्तुत करने पर कार्रवाई की जाएगी तो इसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
मनीष पांडेय, जिलामंत्री, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ
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मुख्य विकास अधिकारी शिवेंद्र सिंह ने शैक्षिक सत्र 2014-15 में खर्च हुई कनवर्जन कास्ट के बिल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। निर्देश मिलते ही शिक्षकों के होश उड़ गए है। शिक्षकों का कहना है अमूमन सब्जी व मसाले खरीदते वक्त बिल लिए नहीं लिए जाते है। वहीं ग्रामीण इलाकों में सब्जी वालों के पास बिल कहां होते है। यह फरमान अब सुनाया गया है जब शैक्षिक सत्र समाप्त हो चुका है। ऐसे में इन बिलों को दे पाना मुश्किल हो रहा है। वहीं अगर बिल लेने थे तो पहले निर्देश दिए जाते है। इसके अलावा प्रधान भी बिल नहीं दे रहे है। जबकि शिक्षकों को बिल जमा करना है।
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बिल मांगे गए है
कनवर्जन कास्ट के तहत खर्च हुई धनराशि के बिल मुख्य विकास अधिकारी ने मांगे है। इसकी जानकारी शिक्षकों व ग्राम प्रधानों को दी जा चुकी है।
- बृजमोहन सिंह, जिला समन्यवक, एमडीएम
बर्दाश्त नहीं होगा उत्पीड़न
सब्जी व मसालों का बिल देना मुश्किल है। ग्राम प्रधान इसमें सहायता नहीं कर रहे है। प्रशासन को पहले ही जानकारी देनी चाहिए थी। अगर शिक्षकों का उत्पीड़न किया जाता है तो इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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राजकिशोर सिंह, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
सड़क पर उतरकर होगा आंदोलन
इन निर्देशों पर अमल करना मुश्किल है। पुराने बिल कहां से आएंगे यह बड़ी समस्या है। अगर बिल न प्रस्तुत करने पर कार्रवाई की जाएगी तो इसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
मनीष पांडेय, जिलामंत्री, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ