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सपा ने दिग्गजों पर फिर जताया भरोसा

Fri, 25 Mar 2016 10:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सीतापुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सीतापुर Updated Fri, 25 Mar 2016 10:50 PM IST
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समाजवादी पार्टी ने मिशन-2017 के लिए बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को पार्टी ने हरगांव और लहरपुर विधानसभा सीट से अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। हरगांव विधानसभा क्षेत्र से प्रदेश के कारागार राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी के पुत्र मनोज राजवंशी तथा लहरपुर विधानसभा सीट से पूर्व विधायक अनिल वर्मा को प्रत्याशी बनाया गया है।  

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सीतापुर में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं। इनमें से जिन दो सीटों पर सपा ने प्रत्याशी घोषित किए हैं, वह बसपा का मजबूत गढ़ मानी जाती हैं। 2012 में सपा की लहर के दौरान भी इन सीटों पर बसपा ने कब्जा जमाया था। हरगांव से रामहेत भारती और लहरपुर से जासमीर अंसारी विधायक चुने गए। जबकि अन्य सात सीटें सपा की झोली में आईं। इस बार सपा ने इन सीटों को हथियाने के लिए जिन धुरंधरों पर दांव लगाया है, उनकी राह आसान नहीं होगी। सूची जारी होने के बाद सियासी गलियारों में तपिश बढ़ गई है। 
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हरगांव में राज्यमंत्री के बेटे पर दांव

हरगांव विधानसभा से प्रत्याशी बनाए गए मनोज राजवंशी को सियासत विरासत में मिली है। इनके पिता सूबे में कारागार राज्यमंत्री हैं। जबकि मनोज खुद वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं। राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी ने 2012 में तीसरी बार विधानसभा का चुनाव जीता। सरकार बनी तो इन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। इससे पहले भी रामपाल राजवंशी भाजपा व लोजपा के गठबंधन की सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं। जिले से लेकर प्रदेश की सियासत में रामपाल राजवंशी का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है। हरगांव में बसपा के कद्दावर नेता रामहेत भारती विधायक हैं। बसपा सरकार में इन्हें भी राज्यमंत्री का दर्जा मिल चुका है। रामहेत भारती के कब्जे से हरगांव विधानसभा सीट हथियाना सपा के लिए आसान नहीं होगा।
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अनिल को विरासत में मिली सियासत
अनिल वर्मा लहरपुर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। सियासत इन्हें भी विरासत में मिली है। पिता स्व. हरगोविंद वर्मा जनता पार्टी से सांसद बने थे। 90 के दशक में अनिल की माता चंद्रकली भाजपा के टिकट से विधायक चुनी गईं। उनकी मृत्यु के बाद अनिल ने उनका क्षेत्र संभाला।


पहली बार भाजपा से विधायक बने। बाबरी मस्जिद विध्वंस से आहत होकर भाजपा से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद सपा के टिकट से चुनाव जीते। 2012 में पहले सपा ने अनिल वर्मा को टिकट दिया था फिर सपा के दिग्गज नेता मुख्तार अनीस के बेटे जहीर अब्बास को प्रत्याशी बनाया। जिसके चलते अनिल वर्मा ने कांग्रेस का दामन थामकर चुनाव लड़ा, लेकिन यहां बसपा के जासमीर अंसारी जीत गए। चुनाव बाद अनिल ने कांग्रेस छोड़कर घर वापसी कर ली।

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