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बुखार से पीड़ित छह और बच्चे भर्ती
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सीतापुर। बदलते मौसम में ज्यादातर बच्चे निमोनिया के शिकार हो रहे हैं। इसी वजह से उनको ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। शुक्रवार को तेज बुखार के कारण छह बच्चे अस्पताल में भर्ती कराए गए है। तीन बच्चों को ऑक्सीजन दी जा रही है। हालांकि इलाज के बाद इनकी हालत में काफी सुधार है।
इस दिनों वायरल बुखार व मलेरिया का प्रकोप जिले में फैला हुआ है। इसकी चपेट में बच्चे भी खूब आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 150 बच्चे आते हैं। इनमें से करीब 60-70 बच्चे वायरल फीवर से पीड़ित होते हैं। इनमें से छह से आठ बच्चों की हालात ऐसी होती है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करके इलाज शुरू किया जाए। इसी वजह से चिल्ड्रेन वार्ड में बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है।
शुक्रवार को रामकोट इलाके के गुलजारपुर निवासी रेहान (5), परतापुर निवासी शिवानी (4), पिसावां के जलालपुर निवासी आशीष (4), नैपालापुर निवासी अर्मित श्रीवास्तव (9) व देहात कोतवाली इलाके के पेरिया निवासी अनिरुद्ध (6) को भर्ती किया गया है। ये बच्चे बुखार के चलते अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। तीन बच्चों को निमोनिया के चलते ऑक्सीजन दी जा रही है। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में 31 बच्चे भर्ती है।
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चिल्ड्रेन वार्ड में बच्चों की संख्या अधिक होने से बेड की किल्लत हो जा रही है। शुक्रवार को लहरपुर इलाके के मोहम्मद उमर (2) व शहर के तरीनपुर इलाके के मुकीम (2 माह) को एक ही बेड पर लिटाया गया था। कारण यह था वार्ड में खाली बेड ही नहीं थे। वार्ड पूरी तरह से भरा हुआ था। मलेरिया से संक्रमित बच्चे अलग भर्ती किए गए थे। इससे मरीजों को अस्पताल में इलाज कराने में दिक्कतें आ रही हैं।
जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र का कहना है निमोनिया दो कारणों से होती है। एक तो वातावरण में फैले बैक्टीरिया व दूसरा बदलते समय के कारण खानपान की वजह से। निमोनिया के कारण फेफड़ों में सूजन आ जाती है। इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है।
वहीं दिमागी बुखार में भी ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। ऐसे हालात में बच्चों को ऑक्सीजन दी जाती है। जब बच्चों को अस्पताल में भर्ती करके इलाज शुरू किया जाता है, तभी उनकी हालत सामान्य हो पाती है।
इस समय बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र का कहना है बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दें। उनके खानपान का ख्याल रखें। बेवजह बाहर निकलने से बचाएं। जरूरी न होने पर आवागमन न करें। खुले आसमान के नीचे सोने से बचें। मच्छरों से भी बचाव करें।
सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि बच्चों में निमोनिया के कारण ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में वेंटीलेटर सहित ऑक्सीजन की पूरी व्यवस्था है। सभी बच्चों का इलाज चल रहा है।
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इस दिनों वायरल बुखार व मलेरिया का प्रकोप जिले में फैला हुआ है। इसकी चपेट में बच्चे भी खूब आ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 150 बच्चे आते हैं। इनमें से करीब 60-70 बच्चे वायरल फीवर से पीड़ित होते हैं। इनमें से छह से आठ बच्चों की हालात ऐसी होती है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करके इलाज शुरू किया जाए। इसी वजह से चिल्ड्रेन वार्ड में बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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शुक्रवार को रामकोट इलाके के गुलजारपुर निवासी रेहान (5), परतापुर निवासी शिवानी (4), पिसावां के जलालपुर निवासी आशीष (4), नैपालापुर निवासी अर्मित श्रीवास्तव (9) व देहात कोतवाली इलाके के पेरिया निवासी अनिरुद्ध (6) को भर्ती किया गया है। ये बच्चे बुखार के चलते अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। तीन बच्चों को निमोनिया के चलते ऑक्सीजन दी जा रही है। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में 31 बच्चे भर्ती है।
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चिल्ड्रेन वार्ड में बच्चों की संख्या अधिक होने से बेड की किल्लत हो जा रही है। शुक्रवार को लहरपुर इलाके के मोहम्मद उमर (2) व शहर के तरीनपुर इलाके के मुकीम (2 माह) को एक ही बेड पर लिटाया गया था। कारण यह था वार्ड में खाली बेड ही नहीं थे। वार्ड पूरी तरह से भरा हुआ था। मलेरिया से संक्रमित बच्चे अलग भर्ती किए गए थे। इससे मरीजों को अस्पताल में इलाज कराने में दिक्कतें आ रही हैं।
जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र का कहना है निमोनिया दो कारणों से होती है। एक तो वातावरण में फैले बैक्टीरिया व दूसरा बदलते समय के कारण खानपान की वजह से। निमोनिया के कारण फेफड़ों में सूजन आ जाती है। इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है।
वहीं दिमागी बुखार में भी ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। ऐसे हालात में बच्चों को ऑक्सीजन दी जाती है। जब बच्चों को अस्पताल में भर्ती करके इलाज शुरू किया जाता है, तभी उनकी हालत सामान्य हो पाती है।
इस समय बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र का कहना है बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दें। उनके खानपान का ख्याल रखें। बेवजह बाहर निकलने से बचाएं। जरूरी न होने पर आवागमन न करें। खुले आसमान के नीचे सोने से बचें। मच्छरों से भी बचाव करें।
सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि बच्चों में निमोनिया के कारण ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में वेंटीलेटर सहित ऑक्सीजन की पूरी व्यवस्था है। सभी बच्चों का इलाज चल रहा है।