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Sitapur News: सरयू का जलस्तर बढ़ा, 10 गांवों में बाढ़ का खतरा
Fri, 05 Jul 2024 02:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 05 Jul 2024 02:52 AM IST
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रामपुर मथुरा (सीतापुर)। सरयू के जलस्तर में लगातार इजाफा हो रहा है। इससे तराई क्षेत्र के लोग सहमे हुए हैं। सरयू का जलस्तर 63 सेमी बढ़कर बृहस्पतिवार को 117.30 मीटर पर पहुंच गया। नदी खतरे के निशान से महज 1.70 मीटर नीचे बह रही है।
सरयू में उफान आने से अखरी गांव के पास लगे जिओ बैग पूरी तरह से पानी में समा गए हैं। इससे तटवर्ती 10 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इससे ग्रामीणों की धड़कनें तेज हो गईं हैं। बेकाबू लहरें अखरी के पास लगातार कटान भी कर रही हैं। उधर, बैराजों से 1 लाख 72 हजार 965 क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। यह पानी जब जिले में पहुंचेगा तो हालात बिगड़ सकते हैं।
पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक तीन दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी से सरयू नदी के जलस्तर में लगातार तीसरे दिन भी वृद्धि दर्ज की गई। बुधवार को नदी का जलस्तर 116.67 मीटर दर्ज किया गया। बृहस्पतिवार को नदी का पानी 117.30 मीटर पर पहुंच गया।
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पिछले 24 घंटे में पानी 63 सेमी बढ़ा है। फत्तेपुरवा गांव के पास लगे मीटर गेज पर खतरे का निशान 119 मीटर पर है। हालांकि, पानी अभी नदी के दायरे में है लेकिन निचले भू-भाग की तरफ पानी का बहाव शुरू हो गया है। इससे तटवर्ती अंगरौरा, अखरी, बाबा कुटी, कनरखी, शुकुलपुरवा, अटौरा, शंकरपुरवा, बंगालीपुरवा समेत करीब 10 गांवों के ग्रामीणों में हलचल बढ़ा दी है। इन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
अंगरौरा के पिंटू व मिश्रीलाल ने बताया कि सरयू का पानी इसी गति से बढ़ता रहा तो दो से तीन दिनों में बाढ़ के हालात बन सकते हैं। इसे लेकर सरयू के पास वाले गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण सुरक्षित ठिकाना तलाशने लगे हैं, ताकि बाढ़ आने पर वहां शरण ले सकें। रामरती व टहलू ने बताया कि अखरी के पास बाढ़ की रोकथाम के लिए लगाए गए जिओ बैग बुधवार तक कुछ नजर भी आ रहे थे। अब पूरी तरह से नदी में समा गए हैं। इससे तटीय क्षेत्र के ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
बांस की बाड़ के करीब कटान जारी
सरयू की लहरें कटान करती हुई अखरी के पास लगी बांस की बाड़ के लगातार पहुंचती जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि बृहस्पतिवार को करीब चार से पांच मीटर जमीन का हिस्सा कटकर सरयू में समा गया। कटान इसी तरह होता रहा तो बांस की बाड़ भी जद में आ जाएगी। ग्रामीण बोले, कि कटान रोकने के लिए लगाई गई बांस की बाड़ ही जब असुरक्षित है तो गांव कैसे सुरक्षित रहेंगे।
कटान से बचाव के कर रहे उपाय
सरयू का जलस्तर अभी नदी के दायरे में ही बह रहा है। बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का लगातार दौरा कर गांवों को कटान से बचाने के उपाय किए जा रहे हैं।
- विशाल पोरवाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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सरयू में उफान आने से अखरी गांव के पास लगे जिओ बैग पूरी तरह से पानी में समा गए हैं। इससे तटवर्ती 10 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इससे ग्रामीणों की धड़कनें तेज हो गईं हैं। बेकाबू लहरें अखरी के पास लगातार कटान भी कर रही हैं। उधर, बैराजों से 1 लाख 72 हजार 965 क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। यह पानी जब जिले में पहुंचेगा तो हालात बिगड़ सकते हैं।
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पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक तीन दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी से सरयू नदी के जलस्तर में लगातार तीसरे दिन भी वृद्धि दर्ज की गई। बुधवार को नदी का जलस्तर 116.67 मीटर दर्ज किया गया। बृहस्पतिवार को नदी का पानी 117.30 मीटर पर पहुंच गया।
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पिछले 24 घंटे में पानी 63 सेमी बढ़ा है। फत्तेपुरवा गांव के पास लगे मीटर गेज पर खतरे का निशान 119 मीटर पर है। हालांकि, पानी अभी नदी के दायरे में है लेकिन निचले भू-भाग की तरफ पानी का बहाव शुरू हो गया है। इससे तटवर्ती अंगरौरा, अखरी, बाबा कुटी, कनरखी, शुकुलपुरवा, अटौरा, शंकरपुरवा, बंगालीपुरवा समेत करीब 10 गांवों के ग्रामीणों में हलचल बढ़ा दी है। इन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
अंगरौरा के पिंटू व मिश्रीलाल ने बताया कि सरयू का पानी इसी गति से बढ़ता रहा तो दो से तीन दिनों में बाढ़ के हालात बन सकते हैं। इसे लेकर सरयू के पास वाले गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण सुरक्षित ठिकाना तलाशने लगे हैं, ताकि बाढ़ आने पर वहां शरण ले सकें। रामरती व टहलू ने बताया कि अखरी के पास बाढ़ की रोकथाम के लिए लगाए गए जिओ बैग बुधवार तक कुछ नजर भी आ रहे थे। अब पूरी तरह से नदी में समा गए हैं। इससे तटीय क्षेत्र के ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
बांस की बाड़ के करीब कटान जारी
सरयू की लहरें कटान करती हुई अखरी के पास लगी बांस की बाड़ के लगातार पहुंचती जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि बृहस्पतिवार को करीब चार से पांच मीटर जमीन का हिस्सा कटकर सरयू में समा गया। कटान इसी तरह होता रहा तो बांस की बाड़ भी जद में आ जाएगी। ग्रामीण बोले, कि कटान रोकने के लिए लगाई गई बांस की बाड़ ही जब असुरक्षित है तो गांव कैसे सुरक्षित रहेंगे।
कटान से बचाव के कर रहे उपाय
सरयू का जलस्तर अभी नदी के दायरे में ही बह रहा है। बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का लगातार दौरा कर गांवों को कटान से बचाने के उपाय किए जा रहे हैं।
- विशाल पोरवाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग