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Sitapur News: परिक्रमा के तीसरे पड़ाव में साधु-संतों ने डाला डेरा
Thu, 21 May 2026 11:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 21 May 2026 11:51 PM IST
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सीतापुर। नैमिषधाम की 84 कोसी परिक्रमा बृहस्पतिवार को तीसरे पड़ाव कोथावां पहुंच गई। परिक्रमा का तीसरा पड़ाव भी हरदोई जनपद में पड़ता है। यहां स्थानीय लोगों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ परिक्रमा का स्वागत किया। संतों ने डेरा डाला तो भजन-कीर्तन और जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
परिक्रमा का तीसरा पड़ाव कोथावां धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यह क्षेत्र प्राचीन समय से साधु-संतों की तपस्थली रहा है। यहां कई पुराने धार्मिक स्थल और मंदिर हैं। परिक्रमार्थी यहां डेरा डालकर धार्मिक स्थलों के दर्शन करते हैं। क्षेत्रीय ग्रामीणों के अनुसार कोथावां में वर्षों से परिक्रमार्थियों की सेवा और स्वागत की परंपरा चली आ रही है। परिक्रमा में शामिल संत-महात्माओं के लिए ग्रामीणों ने जलपान, प्रसाद और विश्राम की व्यवस्था की। पड़ाव स्थल पर डेरा डालकर संत-महंत व श्रद्धालु रामनाम का जाप करने लगे। कोई अपने खाने-पीने का सामान जुटाने में लगा रहा तो कोई भोजन बनाने के लिए लकड़ियां खोजता दिखाई दिया।
श्रद्धालुओं के समूह देर रात तक भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना में लीन रहे। इस बीच बड़ी संख्या में परिक्रमार्थियों ने हत्याहरण तीर्थ में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस पवित्र तीर्थ में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और मन को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि 84 कोसी परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और लोक परंपराओं से जुड़ने का माध्यम भी है।
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परिक्रमा का तीसरा पड़ाव कोथावां धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यह क्षेत्र प्राचीन समय से साधु-संतों की तपस्थली रहा है। यहां कई पुराने धार्मिक स्थल और मंदिर हैं। परिक्रमार्थी यहां डेरा डालकर धार्मिक स्थलों के दर्शन करते हैं। क्षेत्रीय ग्रामीणों के अनुसार कोथावां में वर्षों से परिक्रमार्थियों की सेवा और स्वागत की परंपरा चली आ रही है। परिक्रमा में शामिल संत-महात्माओं के लिए ग्रामीणों ने जलपान, प्रसाद और विश्राम की व्यवस्था की। पड़ाव स्थल पर डेरा डालकर संत-महंत व श्रद्धालु रामनाम का जाप करने लगे। कोई अपने खाने-पीने का सामान जुटाने में लगा रहा तो कोई भोजन बनाने के लिए लकड़ियां खोजता दिखाई दिया।
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श्रद्धालुओं के समूह देर रात तक भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना में लीन रहे। इस बीच बड़ी संख्या में परिक्रमार्थियों ने हत्याहरण तीर्थ में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस पवित्र तीर्थ में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और मन को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि 84 कोसी परिक्रमा केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और लोक परंपराओं से जुड़ने का माध्यम भी है।
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