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घाघरा में पानी बढ़ा, 24 गांवों में हलचल तेज

Sat, 01 Jul 2017 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 01 Jul 2017 11:47 PM IST
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River increase
river - फोटो : demo pic

पहाड़ों पर हो रही बारिश व बैराजों से छोड़े गए पानी के चलते गांजरी क्षेत्र में बहने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इससे तटीय क्षेत्र में बसने वाले ग्रामीणों में हलचल तेज हो गई है।

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इस क्षेत्र के बाशिंदे बाढ़ आने के संशय से परेशान हैं। यही वजह है कि तटीय क्षेत्र के लोग बाढ़ से बचने के जुगाड़ में जुट गए हैं। तटीय क्षेत्र में करीब 24 गांव ऐसे हैं, जिनके बाशिंदे कटान के भय से भयभीत हैं।
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रेउसा में बहने वाली घाघरा अभी से ही अपना भयावह रूप दिखाने लगी है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदों की मानें तो पानी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। घाघरा के बीच अभी तक रेतीले मैदान नजर आते थे, वे मैदान अब पानी में समा गए हैं।
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नदी के पानी में करीब 10 फीट तक का उछाल आया है। नदी के तेवर देख तटीय क्षेत्र के दुर्गा पुरवा, कोनी, मरेली, नगीनापुरवा, गार्गी पुरवा, ठेकेदार पुरवा आदि 24 गांवों में हलचल तेज हो गई है। इन गांव के बाशिंदों का कहना है कि नदी का पानी अगर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो चार से पांच दिनों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

बहरहाल नदी अभी तटीय इलाके में आहिस्ता-आहिस्ता कटान कर रही है। इससे तटीय क्षेत्र के दुर्गापुरवा व कोनी के बाशिंदे काफी भयभीत हैं। नदी के निशाने पर दुर्गापुरवा का मार्ग है, जो कभी भी कटकर घाघरा में समा सकता है।

वहीं आबादी के घर बमुश्किल 25 मीटर ही नदी से दूर हैं। ऐसे में कटान का कहर उन घरों पर बरप सकता है। गांव के राम नरेश, रामपाल, संतोष, लालाराम आदि ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते, हरकत में आ जाए, तो इस मुसीबत से तटीय क्षेत्र के बाशिंदों को बचाया जा सकता है।


सबसे बुरे हालात तो टापू पर बसे पचीसा, रेती पुरवा व बर्बादी पुरवा का है। इन गांवों में करीब 500 की संख्या में परिवार रहते हैं। यहां रहने वाले लोग नदी के बढ़ते जलस्तर से भयभीत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो बहुत जल्द ही टापू पर भी बाढ़ आ जाएगी। ऐसे में टापू पर बसे परिवारों को जान बचाने भर का मौका भी नहीं मिल पाएगा। हालांकि प्रशासन अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं होने की बात कह रहा है। 

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