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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Reading children in 2,500 schools on the floor

2500 स्कूलों में जमीन पर पढ़ते बच्चे

Wed, 19 Aug 2015 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर Updated Wed, 19 Aug 2015 10:32 PM IST
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जर्जर भवन, बदहाल लाइब्रेरी, टूटी-फूटी प्रयोगशाला। खेल मैदान में उगी झाड़ियां। जिले में सरकारी स्कूल-कॉलेजों की कुछ ऐसी ही बदहाल तस्वीर दिखती है।

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हाईकोर्ट ने भले ही शिक्षा की गिरती गुणवत्ता को लेकर मंत्रियों, विधायकों, जजों व अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने का फरमान सुनाया हो मगर सुविधाओं के नजरिए से इन बीमार स्कूलों को संवारने की जरूरत है।
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अफसरों की लापरवाही से सरकारी स्कूल अब मजबूरी के स्कूल बनते जा रहे हैं। कोर्ट के इस फैसले से लोगों में आस जगी है मगर स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं न होने से हर कोई मायूस है।
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जिले के अधिसंख्य स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। स्कूलों में पेयजल, विद्युत, खेल का मैदान, प्रकाश व्यवस्था, लाइब्रेरी, प्रयोगशाला, शौचालय इत्यादि बुनियादी सुविधाओं का टोटा है।

शिक्षकों का संकट अलग से। ऐसे में नौनिहालों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिलने के आसार दिख नहीं रहे हैं। प्राथमिक स्तर के सरकारी स्कूल में खाना, ड्रेस, किताबें सहित अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं।


इसके बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो रहा है। जहां कॉन्वेंट स्कूल के बच्चे शानदार वातानुकूलित कमरों में बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वही सरकारी स्कूल के बच्चों को पंखे की हवा मिलना भी मुश्किल हो रहा है।

कई स्कूलों में जमीन पर ही बैठाकर बच्चों को पढ़ाया जाता है। वहीं माध्यमिक स्तर के सरकारी स्कूलों में कहने को तो प्रयोगशालाएं, लाइब्रेरी व खेल का मैदान हैं, लेकिन पर्याप्त बजट न मिलने के कारण यह सब सिर्फ शोपीस बने हुए है।

अधिसंख्य स्कूल पुराने भवनों में चल रहे हैं। कुछ तो गिरने की कगार पर हैं। साफ-सफाई व पेयजल के इंतजाम भी नाकाफी हैं।

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