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पहाड़ों पर बारिश से बढ़ रहा घाघरा का स्तर 

Sun, 18 Jun 2017 10:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 18 Jun 2017 10:12 PM IST
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Rain on hills, increase water lavel
- फोटो : amar ujala

पहाड़ों पर हो रही बारिश से घाघरा नदी का जल स्तर बढ़ने लगा है, इससे तटीय क्षेत्र में बसने वाले परिवारों की धडक़नें तेज हो गई हैं। नदी के बीच टापू पर व नदी किनारे बसे परिवार बाढ़ आने की संभावना से दहशत में हैं।

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यही वजह है कि वे परिवार भी से ही बाढ़ से निपटने के इंतजाम में जुट गए हैं। टापू के बाशिंदों ने जानवरों का चारा व अन्य सामान नदी पार लाना शुरू कर दिया है। ताकि बाढ़ जैसी मुसीबत आने पर उनके जानवर व परिवार के सामने भोजन की दिक्कतें न आने पाएं। हालांकि प्रशासन अब बाढ़ आने की आशंका से इंकार कर रहा है।
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बाढ़ से सबसे प्रभावित इलाका रेउसा क्षेत्र का है। इस क्षेत्र में जहां पचीसा व बदहाली पुरवा जैसे गांव बीच टापू पर बसे हैं। वहीं दुर्गा पुरवा, चौकीपुरवा, पासिनपुर, लोधनपुरवा, परमेश्वर पुरवा, ठेकेदार पुरवा, रामलाल पुरवा, नगीना पुरवा आदि गांव नदी के किनारे बसे हुए हैं।
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टापू पर बसे गांवों में करीब 400 की संख्या में परिवार रहते हैं। इधर दो दिनों से घाघरा नदी के जल स्तर में तेजी से इजाफा हो रहा है। तटीय क्षेत्र में बसने वाले परिवारों की मानें तो बीते दो दिनों में घाघरा नदी के जल स्तर में करीब 4 फीट तक का इजाफा हुआ है।

जल स्तर बढ़ने का सिलसिला जारी है। रविवार को पचीसा गांव के राजू, रामसिंह, स्वामी दयाल आदि ग्रामीण एक नाव पर भूसा व घर के कुछ जरूरी सामान लेकर टापू से नदी के पार आ रहे थे। पूछने पर बताने लगे कि उन्होंने नदी के कि नारे मौजूद चौकी पुरवा में भी झोपड़ी डाल रखी है।

नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इससे टापू पर संकट नजर आ रहा है। जानवरों के लिए चारे की कमी न पड़े, इसलिए समय रहते उसे सुरक्षित कर रहे हैं। यह भूसा व घरेलू सामान टापू से चौकी पुरवा ले जा रहे हैं।

टापू के कुछ अन्य ग्रामीण भी इसी तरह से अपना घरेलू सामान समेटकर नाव से नदी पार कर रहे थे। इन ग्रामीणों का कहना था, कि हालात बिगड़ने से पहले ही वे अपने परिवारों को नाव से सुरक्षित स्थान पर पहुंचा देंगे। पचीसा टापू पर भी नदी में पानी बढ़ने को लेकर हलचल देखी गई। गांव के बचन लाल व जीवन लाल आदि की झोपड़ी टापू पर नदी के किनारे ही पड़ी थी।

यहां करीब एक दर्जन परिवार झोपड़ी को उजाड़ते और अपना घरेलू सामान समेटते नजर आए। जो लोग झोपड़ियों को उजाड़ रहे थे, उनका कहना था कि वे टापू पर ऊंचे स्थान पर अपनी झोपड़ी व सामान लेकर जाने की तैयारी में हैं।


गांव के लोगों का कहना है कि पहली बात तो प्रशासन समय पर अलर्ट जारी नहीं करता है, और जब बाढ़ आ जाती है, तब प्रशासन को टापू तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में खुद ही सतर्क रहना पड़ता है। इन दिनों नदी का पानी बढ़ रहा है, जिसकी वजह से गांव में हलचल तेज है। लोग खुद को व अपने परिवार तथा जानवरों को सुरक्षित कर रहे हैं। ताकि बाढ़ जैसी नौबत आने पर वे बच सकें।

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