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नवीनीकरण में रुचि नहीं ले रहे प्राइवेट अस्पताल
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सीतापुर। जिले में चल रहे ज्यादातर प्राइवेट अस्पताल नवीनीकरण के लिए आवेदन करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। अगर 30 अप्रैल तक ये आवेदन नहीं करेंगे तो इनके संचालन पर रोक लगा दी जाएगी। अभी तक 230 में से सिर्फ 10 फीसद अस्पतालों ने ही आवेदन किया है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में 80 नर्सिंग होम व 150 क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों को 30 अप्रैल 2022 तक संचालित करने की अनुमति दी गई है। प्रत्येक साल अस्पतालों का नवीनीकरण कराना होता है। इस अवधि से पहले अस्पतालों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। नवीनीकरण के लिए आवेदन करते समय अस्पताल में मौजूदा सभी चिकित्सकों का ब्योरा, सुविधाएं व बायो वेस्ट के बारे में जानकारी दी जाती है। इस जानकारी के आधार पर ही अफसर अस्पताल जाकर पड़ताल करते हैं। इस प्रक्रिया के बाद ही अस्पतालों को स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन की अनुमति दी जाती है।
स्वास्थ्य विभाग ने 15 दिन पहले ही सभी अस्पतालों को नवीनीकरण कराने के लिए निर्देशित कर दिया था। इस निर्देश का असर अस्पतालों पर होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। अप्रैल माह आधा बीत जाने के बावजूद करीब 10 फीसद अस्पतालों ने ही नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। अगर बाकी अस्पताल अप्रैल माह में आवेदन नहीं करेंगे तो इनके संचालन पर रोक लगा दी जाएगी।
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जिले में बिना लाइसेंस के तमाम अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसकी हकीकत कई बार स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण में सामने आ चुकी है। अप्रैल में ही एसीएमओ सुरेंद्र शाही को मछरेहटा में तीन अस्पताल बिना लाइसेंस के चलते हुए मिले थे। इसी तरह कमलापुर इलाके में एक नर्सिंग होम छह माह से बिना लाइसेंस के चल रहा था। सूत्रों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य विभाग सही ढंग से पूरे जिले में अस्पतालों की जांच करे तो पंजीकरण से कहीं अधिक अस्पताल बिना पंजीकरण वाले मिल जाएंगे।
नवीनीकरण के लिए 30 तक कर दें आवेदन
जिले में चल रहे सभी अस्पताल 30 अप्रैल तक हर हाल में अपना नवीनीकरण कराने के लिए आवेदन कर दें। इस समय सीमा के बाद किसी भी अस्पताल का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस दौरान अगर अस्पताल संचालित होता मिला तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. सुरेंद्र शाही, एसीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में 80 नर्सिंग होम व 150 क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों को 30 अप्रैल 2022 तक संचालित करने की अनुमति दी गई है। प्रत्येक साल अस्पतालों का नवीनीकरण कराना होता है। इस अवधि से पहले अस्पतालों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। नवीनीकरण के लिए आवेदन करते समय अस्पताल में मौजूदा सभी चिकित्सकों का ब्योरा, सुविधाएं व बायो वेस्ट के बारे में जानकारी दी जाती है। इस जानकारी के आधार पर ही अफसर अस्पताल जाकर पड़ताल करते हैं। इस प्रक्रिया के बाद ही अस्पतालों को स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन की अनुमति दी जाती है।
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स्वास्थ्य विभाग ने 15 दिन पहले ही सभी अस्पतालों को नवीनीकरण कराने के लिए निर्देशित कर दिया था। इस निर्देश का असर अस्पतालों पर होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। अप्रैल माह आधा बीत जाने के बावजूद करीब 10 फीसद अस्पतालों ने ही नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। अगर बाकी अस्पताल अप्रैल माह में आवेदन नहीं करेंगे तो इनके संचालन पर रोक लगा दी जाएगी।
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जिले में बिना लाइसेंस के तमाम अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसकी हकीकत कई बार स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण में सामने आ चुकी है। अप्रैल में ही एसीएमओ सुरेंद्र शाही को मछरेहटा में तीन अस्पताल बिना लाइसेंस के चलते हुए मिले थे। इसी तरह कमलापुर इलाके में एक नर्सिंग होम छह माह से बिना लाइसेंस के चल रहा था। सूत्रों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य विभाग सही ढंग से पूरे जिले में अस्पतालों की जांच करे तो पंजीकरण से कहीं अधिक अस्पताल बिना पंजीकरण वाले मिल जाएंगे।
नवीनीकरण के लिए 30 तक कर दें आवेदन
जिले में चल रहे सभी अस्पताल 30 अप्रैल तक हर हाल में अपना नवीनीकरण कराने के लिए आवेदन कर दें। इस समय सीमा के बाद किसी भी अस्पताल का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस दौरान अगर अस्पताल संचालित होता मिला तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. सुरेंद्र शाही, एसीएमओ