फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Patients reached hospital and home by paying two to three thousand rupees

दो से तीन हजार रुपये देकर अस्पताल और घर पहुंचे मरीज

Tue, 27 Jul 2021 11:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jul 2021 11:54 PM IST
विज्ञापन
Patients reached hospital and home by paying two to three thousand rupees
जिला महिला अस्पताल में एंबुलेंस न मिलने पर ऑटो रिक्शा से अपने नवजात बच्चे के साथ घर जाती महिला। (स - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल से जनपद में स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई है। घर से अस्पताल तक एंबुलेंस के जरिए मुफ्त में पहुंचने वाले लोगों को दो से तीन हजार रुपये तक खर्च करने पड़े। वाहन तलाशने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। मंगलवार को कुछ इस तरह के नजारे जिला व महिला अस्पताल के बाहर दिखाई दिए। वहीं ग्रामीण इलाकों के लोगों ने पहले एंबुलेंस को फोन किया, जब उन्हें सुविधा नहीं मिल सकी तो वह बाइक व अन्य साधनों का इंतजाम करके अस्पताल पहुंचे। ऐसे में दिन भर लोगों को एंबुलेंस की मदद याद आती रही।
विज्ञापन

जिले में 102 व 108 नंबर की 97 एंबुलेंस चल रही हैं। इन एंबुलेंस कर्मियों ने ठेका प्रथा बंद करने सहित अन्य मांगों को लेकर दो दिन की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इससे जिले में एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से बाधित हो गई है, जबकि इन एंबुलेंसों के जरिए रोजाना तीन सौ मरीज अस्पताल से घर व घर से अस्पताल तक पहुंचते थे।
विज्ञापन

इससे एक तो उनको समय से सुविधा मिल जाती थी। वहीं उन्हे अपनी जेब से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ता था। लेकिन अब पैसा भी खर्च करना पड़ रहा है, समय से सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। अमर उजाला ने इस हड़ताल की मंगलवार को हकीकत देखी तो लोग एंबुलेंस की याद करते हुए दिखाई दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

अस्पताल पहुंचने में खर्च हुए तीन हजार रुपए
जिला अस्पताल में रेउसा से आए अवनीश ने बताया पिता जी बहुत बीमार थे। एंबुलेंस नहीं मिली तो पड़ोस के गांव जाकर एक चार पहिया वाहन बुक कराया था। जिसने अस्पताल से घर व घर से अस्पताल तक लाने के लिए दो हजार रूपये बचत व डीजल मांगा था। टोल टैक्स अलग से देना था। इससे करीब तीन हजार रूपये अस्पताल तक आने में ही खर्च हो गए।
जिला महिला अस्पताल में भर्ती मीरनगर निवासी सूरजपाल की पत्नी को दो दिन पहले बेटा हुआ था। अस्पताल से पत्नी की छुट्टी कर दी गई थी। इनके पास घर तक जाने का कोई साधन नहीं था। पहले एंबुलेंस को फोन किया, तब पता चला आज एंबुलेंस हड़ताल पर है। ऐसे में सूरजपाल के पास अधिक पैसे भी नहीं थे तो पत्नी को ऑटो रिक्शा से ही घर तक ले गए।

बिसवां निवासी कपिल शुक्ला भी एंबुलेंस पाने के लिए भटक रहे थे। वह भी अस्पताल में बार-बार लोगों से एंबुलेंस कैसे मिलेगी, जानकारी कर रहे थे। जब यह सुविधा नहीं मिली तो वह ट्रैवेल एजेंसी गए। वहां से करीब दो हजार रुपये में चार पहिया वाहन बुक कराया। उसके जरिए पत्नी को लेकर घर गए। कपिल ने बताया कि अस्पताल में इलाज कराने में ही अधिक पैसे खर्च हो गए थे। अब मजबूरी में दो हजार खर्च कर घर जा रहा हूं। कोरोना काल में वैसे भी पैसे की आर्थिक तंगी थी, अब यह और बढ़ गई है। इसी तरह अन्य भी लोग एंबुलेंस के चक्कर में भटकते हुए दिखाई दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed