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बाघ की दहशत से खेत नहीं जा रहे ग्रामीण
सीतापुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Dec 2015 11:12 PM IST
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मिश्रिख क्षेत्र के धनधारी जंगल में बाघ की मौजूदगी की खबर से किसान दहशत में हैं। उनके खेतों में फसल लहलहा रही है। बावजूद इसके किसानों ने खेत पर जाना छोड़ दिया है। वहीं क्षेत्र में बहादुरपुर के निकट ग्रामीणों ने वनरोज के अवशेेष देखे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वनरोज का शिकार इस क्षेत्र में मौजूद बाघ ने ही किया है। वनरोज के अवशेष देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत है। किसान बाघ से इस कदर खौफ खा रहे हैं, उन्होंने फसल की रखवाली करना छोड़ दिया है। हालांकि इस दौरान उनकी फसलों को कोई जानवर नुकसान नहीं पहुंचा रहा है। यह देखकर किसानों का संदेह विश्वास में बदल रहा है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में वनरोज व अन्य जानवर फसलों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन बाघ आने के कारण वे जानवर भाग गए हैं।
क्षेत्र के बहादुरपुर निवासी वशीर अहमद, लाल मोहम्मद, अनवर, नई बस्ती निवासी किशोर, विकास, विशाल, ढखिया निवासी राकेश आदि ग्रामीण झुंड बनाकर गांव से निकले थे। किसी के हाथ में लाठी थी, किसी के हाथ में डंडा, तो किसी के हाथ में बेल्चा व कुल्हाड़ी और बांका था। ये सभी ग्रामीण गांव के बाहर स्थित खेत पर फसल देखने जा रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि वे लाठी व डंडा इसलिए लेकर चल रहे हैं, ताकि बाघ से सामना होने पर वे अपना बचाव कर सकें। उन्होंने बताया कि पहले वनरोजों से फसल की रखवाली करने के लिए उन्हें ठिठुरती रातों में भी खेतों में ही रुकना पड़ता था, लेकिन जब से इस क्षेत्र में बाघ आया है, तब से वे खेत पर नहीं जाते हैं। ग्रामीणों को भय है कि कहीं खेत पर अकेला पाकर बाघ उन पर हमला न कर दें।
ग्रामीणों का कहना है कि जब से बाघ इस क्षेत्र में आया है, तब से वनरोज इस क्षेत्र से भाग गए हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र से अब वनरोज फसल को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं। इसी तरह से करीब के काशीपुर, राजेपारा, बहादुरपुर, छावन, अमटामऊ, सूरजपुर, अजगरा, समरहिया, गदखेरवा, ठाकुरगंज, मलनिया, कुमायू ग्रंट, जिहुरा, गोलई पुरवा, उदईपुर पश्चिमी आदि गांवों के किसानों ने भी खेत पर जाना छोड़ दिया है। इससे किसान दहशत में हैं और वे खेत नहीं जाना चाह रहे हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारी इस क्षेत्र में बाघ न होने की बात कह रहे हैं।
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क्षेत्र के बहादुरपुर निवासी वशीर अहमद, लाल मोहम्मद, अनवर, नई बस्ती निवासी किशोर, विकास, विशाल, ढखिया निवासी राकेश आदि ग्रामीण झुंड बनाकर गांव से निकले थे। किसी के हाथ में लाठी थी, किसी के हाथ में डंडा, तो किसी के हाथ में बेल्चा व कुल्हाड़ी और बांका था। ये सभी ग्रामीण गांव के बाहर स्थित खेत पर फसल देखने जा रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि वे लाठी व डंडा इसलिए लेकर चल रहे हैं, ताकि बाघ से सामना होने पर वे अपना बचाव कर सकें। उन्होंने बताया कि पहले वनरोजों से फसल की रखवाली करने के लिए उन्हें ठिठुरती रातों में भी खेतों में ही रुकना पड़ता था, लेकिन जब से इस क्षेत्र में बाघ आया है, तब से वे खेत पर नहीं जाते हैं। ग्रामीणों को भय है कि कहीं खेत पर अकेला पाकर बाघ उन पर हमला न कर दें।
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ग्रामीणों का कहना है कि जब से बाघ इस क्षेत्र में आया है, तब से वनरोज इस क्षेत्र से भाग गए हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र से अब वनरोज फसल को नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं। इसी तरह से करीब के काशीपुर, राजेपारा, बहादुरपुर, छावन, अमटामऊ, सूरजपुर, अजगरा, समरहिया, गदखेरवा, ठाकुरगंज, मलनिया, कुमायू ग्रंट, जिहुरा, गोलई पुरवा, उदईपुर पश्चिमी आदि गांवों के किसानों ने भी खेत पर जाना छोड़ दिया है। इससे किसान दहशत में हैं और वे खेत नहीं जाना चाह रहे हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारी इस क्षेत्र में बाघ न होने की बात कह रहे हैं।
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