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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Notice issued 12 Secretaries due to negligence

लापरवाही पर 12 सचिवों से जवाब तलब

Sun, 12 May 2019 11:44 PM IST
आलोक alok न्यूज डेस्क, सीतापुर
न्यूज डेस्क, सीतापुर Published by: आलोक alok Updated Sun, 12 May 2019 11:44 PM IST
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जिले में शौचालय निर्माण में बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है। कारण, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय तो बना दिए गए मगर बतौर सबूत निर्मित शौचालयों के फोटो अपलोड नहीं किए गए।  इस कार्य में अनियमितता के लिए 12 सचिवों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। जवाब न देने पर सात सचिवों को रिमाइंडर भी जारी किया जा चुका है।
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केंद्र सरकार ने गांवों में स्वच्छता के लिए स्वच्छ भारत मिशन योजना चला रखी है। इस योजना में सीतापुर जिले में भी भारी संख्या में शौचालय निर्मित कराए गए हैं। बावजूद इसके बनवाए गए शौचालयों की शत प्रतिशत जियो टैग नहीं की गई। जबकि इस मद की धनराशि खर्च की जा चुकी है। शौचालयों की फोटो अपलोड करने में कई प्रकार की गड़बड़ियां की जा रही हैं।
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मसलन एक ही शौचालय की जियो टैग का इस्तेमाल कई शौचालयों में किया जा रहा है। नाम पट्टी समेत अन्य बिन्दुओं की जानकारी बदल दी जाती है। इसकी ऑनलाइन बारीकी से जांच में खुलासा भी हो चुका है। स्वच्छ भारत मिशन की डीपीसी ऋतु तिवारी बताती हैं कि जियो टैग की निरंतर मॉनीटरिंग हो रही है। अपूर्ण, डुप्लीकेट, मानक विहीन जियो टैग की पुष्टि होने पर संबंधित कर्मचारी का तत्काल सचेत करते हुए सही जियो टैग करने के निर्देश दिए जाते हैं।
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इस कार्य में लापरवाही बरतने पर तीन ब्लॉक के 12 सचिवों को जवाब तलब किया है। साथ ही मिश्रिख के छह एवं परसेंडी ब्लॉक के एक पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी की गई थी। इसका जवाब न देने पर उन्हें रिमाइंडर भेजा गया है। इसके मार्फत सचेत किया गया है कि यदि संतोषजनक समय से नहीं दिया तो कार्रवाई की जाएगी।

धन का दुरुपयोग करने वाले महफूज
गांवों में पात्र परिवारों को शौचालय की सुविधा देने को जिले में पंचायत राज विभाग ने अरबों रुपये खर्च किए हैं। बावजूद इसके बड़ी संख्या में शौचालय नहीं बन सके। तमाम बने शौचालयों की गुणवत्ता खराब है। ग्राम निधि-6 में इसके लिए भेजी गई धनराशि को भी अधिकांश प्रधान एवं पंचायत सचिवों ने खर्च कर दिया है।

शौचालय निर्माण में गड़बड़ी एवं अनियमितता करने पर संबंधित जिम्मेदारों को मात्र चेतावनी एवं कारण बताओ नोटिस जारी कर फाइल बंद हो जाती है। नतीजतन, शौचालय की धनराशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। कहीं धन निकालने के बाद शौचालय बनवाए नहीं गए तो कहीं ठेकेदारी प्रथा से खराब गुणवत्ता के शौचालय बने। 


निरंतर हो रही समीक्षा
शौचालय निर्माण कार्य में अनियमितता की निरंतर समीक्षा की जा रही है। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित पंचायत सचिव को डीपीआरओ की ओर जवाब तलब किया जाता है। जवाब न देेने पर कार्रवाई की जाएगी।
- ऋतु तिवारी, डीपीसी एसबीएम
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