{"_id":"66ce967c1d71d8d3178434c4d9bbaf2a","slug":"not-holding-a-single-case-of-fake-fertilizer-seed-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नकली खाद-बीज के नहीं पकड़े एक भी मामले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नकली खाद-बीज के नहीं पकड़े एक भी मामले
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Wed, 29 Jul 2015 11:21 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसानों को जरूरत पर खाद-बीज के लिए फसली सीजन में हर बार मारामारी झेलनी पड़ती है। रबी व खरीफ के फसली सीजन में खाद-बीज की उपलब्धता न होने का निजी उर्वरक विक्रेता फायदा उठाते हैं।
विज्ञापन
बढ़ी दरों पर बिक्री व रसीद न देने सरीखी समस्याओं से अन्नदाता को रूबरू होना पड़ता है। काफी हो-हल्ला मचने पर कृषि विभाग छापेमारी की रस्म अदायगी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है।
विज्ञापन
जिले में 1595 थोक व फुटकर लाइसेंस धारकर उर्वरक विक्रेता हैं। इनमें से 292 सहकारिता क्षेत्र के जबकि 1303 निजी केन्द्र हैं।
विभाग का दावा है, कि पिछले दो वर्षो में यहां नकली खाद के कारोबार का कोई मामला सामने नहीं आया है। लेकिन बढ़ी दरों पर खाद-बीज की बिक्री, किसानों को रसीद न देना और विक्रेताओं द्वारा स्टाक रजिस्टर दुरुस्त न रखना इत्यादि कमियां छापेमारी के दौरान पाई गई हैं।
विज्ञापन
गठित टीमों ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में 151 नमूने बीज के और 41 नमूने फर्टिलाइजर्स के लिए थे। जिन्हें जांच के लिए भेजा गया। विभाग के मुताबिक सभी नमूने पास हो गए।
इसके अलावा नियमों को दर-किनार कर बिक्री करने वाले 52 विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की गई। गौर करने वाली बात यह है कि विभागीय कार्रवाई के बाद भी खाद-बीज व पेस्टीसाइड की जरूरत पर उपलब्धता हर बार नगण्य हो जाती है।
वजह, साफ कालाबाजारी में लिप्त बड़े मगरमच्छों पर कार्रवाई करने से जिम्मेदार कतराते हैं। हाय-तौबा मचने पर फुटकर दुकानदारों पर कार्रवाई की चाबुक चलाकर कागजों का पेट भर दिया जाता है।