फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Not a single bed increased in six months, lessons not learned from the second wave of Corona

छह माह में नहीं बढ़े एक भी बेड, कोरोना की दूसरी लहर से नहीं लिया सबक

Thu, 30 Dec 2021 11:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Dec 2021 11:57 PM IST
विज्ञापन
Not a single bed increased in six months, lessons not learned from the second wave of Corona
सीतापुर के जिला अस्पताल में मेडिकल बी वार्ड में मरीजों से फुल बेड। - संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। कोविड के नए वायरस ओमिक्रॉन का भले ही जिले में अभी कोई मामला न आया हो लेकिन दिल्ली व लखनऊ में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जिले में संक्रमण की आशंका बढ़ती जा रही है। पर स्वास्थ्य महकमे ने दूसरी लहर से कोई सबक नहीं लिया है। इसकी गवाही जिला अस्पताल की आधी-अधूरी तैयारी कर रही है। दूसरी लहर में जहां बेड़ों का संकट खड़ा हो गया था, वहीं छह माह बाद भी जिला अस्पताल उसी जगह पर खड़ा हुआ है। इस दौरान एक भी बेड नहीं बढ़ाए जा सके हैं। फरवरी माह में तीसरी लहर की आशंका है। ऐसे में जिले में फिर बेडों का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
विज्ञापन

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिले में ऑक्सीजन व बेड़ों का संकट खड़ा हो गया था। एक-एक बेड व ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए मारामारी मची थी। हालात इतने खराब हो गए थे कि लखनऊ से मरीज सीतापुर को लौटाए जा रहे थे। सीतापुर में भी बाहरी मरीजों को भर्ती करने से इंकार किया जा रहा था। हर तरफ बेड की मारामारी थी। ऐसे में तमाम मरीजों को बेड न मिलने की वजह से उनकी मौत भी हो गई।
विज्ञापन

इस लहर को गए हुए छह माह से अधिक का समय हो गया है। इसके बावजूद स्वास्थ्य महकमे ने अपनी कोई तैयारी नहीं की है। अब फरवरी माह में ओमिक्रॉन की तीसरी लहर आने की संभावना है तो ऐसे में महकमा अपनी पुरानी जगह पर ही खड़ा हुआ नजर आ रहा है। जिला अस्पताल की क्षमता 220 बेड की है। जबकि अस्पताल पर रोजाना भार बढ़ता जा रहा है। एल-टू अस्पताल भी जिला अस्पताल में ही बनाया जाता है। इससे बेड़ों की किल्लत हो जाती है। अगर यह लहर आ जाती है तो फिर से अस्पताल में बेड़ों का संकट खड़ा हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिससे मरीजों को अस्पताल में भर्ती होना मुश्किल हो जाएगा। छह माह बाद भी अस्पताल में एक भी बेड नहीं बढ़ाया जा सका है। केवल कागजों पर ही तैयारियां चल रही है। स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही आम लोगों पर भारी पड़ सकती है।
दूसरी लहर के दौरान जब बेड़ों की संख्या कम पड़ने लगी थी तो खैराबाद में एमजे पैलेस को कोविड अस्पताल बनाया गया था। उसके बाद सीएचसी सिधौली को भी एल-टू अस्पताल के रूप में शुरू करने की तैयारी की गई थी। लेकिन यहां पर सुविधाओं के अभाव में यह अस्पताल शुरू नहीं हो सका था। यहां पर भी नए बेड न बढ़वाकर पहले से मरीजों के लिए आरक्षित बेड़ों में ही कटौती करके कोविड अस्पताल बनाने का प्लान था।
नॉन कोविड मरीजों के लिए कम पड़ जाते बेड
अगर जिला अस्पताल की बात की जाए तो ओपीडी में रोजाना करीब दो हजार मरीज आते हैं। इसके अलावा महिला वार्ड, पेइंग वार्ड, मेडिकल वार्ड, हड्डी वार्ड, चिल्ड्रेन वार्ड में हर समय मरीज भर्ती रहते हैं। इससे अस्पताल में बहुत ही कम ऐसे दिन आते है जब मरीजों की संख्या 200 से कम हो। रोजाना 200 से अधिक ही मरीज भर्ती रहते हैं। कोविड अस्पताल जब जिला अस्पताल में बनाया जाता है तो 60 से 80 बेड कोविड के लिए आरक्षित कर दिए जाते हैं। इससे नॉन कोविड मरीजों के लिए बेड कम पड़ जाते हैं। फिर उनको अस्पताल में भर्ती करना मुश्किल हो जाता है।
सीएचसी खैराबाद के हालात भी जस के तस
कोरोना की पहली व दूसरी लहर की बात की जाए तो जिला अस्पताल व सीएचसी खैराबाद में एल-टू अस्पताल बनाया गया था। सीएचसी खैराबाद में 50 बेड मरीजों के लिए आरक्षित किए गए थे। उसके बाद यहां पर भी बेड बढ़ाने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। ऐसे में अगर फिर से सीएचसी खैराबाद एल-टू बनता है तो अन्य मरीजों को यहां पर भर्ती करना मुश्किल होगा।

ओमिक्रॉन का जिले में अभी कोई मामला सामने नहीं आया है। तैयारियां पूरी हैं। जिले में बेडों की कोई किल्लत नहीं है। सीएचसी सहित जिला अस्पताल में पर्याप्त संख्या में बेड मौजूद हैं।
- डॉ. मधु गैरोला, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed