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Sitapur News: ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रिफ्लेक्टर नहीं, हादसे का बढ़ा खतरा
Fri, 29 Nov 2024 12:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 29 Nov 2024 12:00 AM IST
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गन्ने से लदी ट्रॉली पर नहीं लगा था रिफ्लेक्टर।
सीतापुर। जिले में गन्ने से लदे वाहन नियमों को रौंदकर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। गन्ना ढुलाई कर रहे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रिफ्लेक्टर न लगने से रात के समय व कोहरा पड़ने पर हादसे का खतरा बना रहता है। अधिकारियों के साथ बैठक में डीएम ने गत बुधवार को गन्ना ढोने वाली सभी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों में रिफ्लेक्टर लगाने के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देशों का असर फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
जिले में एक सहकारी समेत पांच चीनी मिलें हैं। सरकारी को छोड़कर अन्य चारों चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू हो चुका है। इसके बाद से हाईवे और सभी संपर्क मार्गों पर गन्ना लदे वाहन दौड़ने लगे हैं। गन्ना ढुलाई में सबसे अधिक संख्या ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की है।
गन्ना लदी अधिकांश ट्रॉलियों पर पीछे रिफ्लेक्टर नहीं लगा है। रात के अंधेरे में सामने जा रही ट्रॉली नजर नहीं आती हैं। जब पीछे वाहन की हेडलाइट ट्रॉली पर पड़ती है तब चालक को आगे वाहन होने का आभास होता है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है।
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इन दिनों सर्दी बढ़ने पर कोहरा भी पड़ने लगा है। कोहरे में दृश्यता घटने से हादसे का अधिक खतरा रहता है। हाईवे के अलावा सिधौली-मिश्रिख, सीतापुर-मिश्रिख, लहरपुर-हरगांव, बिसवां-रेउसा आदि संपर्क मार्गों पर दिन-रात सैकड़ों गन्ना लदे वाहनों का आवागमन होता है।
संदना के रामेंद्र ने बताया कि गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियाें पर रिफ्लेक्टर लगा होना आवश्यक है। क्योंकि ट्रॉली में पीछे बैक लाइट भी नहीं होती है। ऐसे में रात के समय अथवा कोहरे के दौरान पीछे से वाहन दिखाई नहीं देता है। रामकोट के अनुज बताते हैं कि इन दिनों सहालग चल रही है। शादी-बरात से देर रात वापसी होती है। रिफ्लेक्टर के बगैर दौड़ रहे गन्ना लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली सुरक्षित सफर में बड़ी बाधा बनते हैं। बावजूद इसके परिवहन विभाग और पुलिस इनसे बेपरवाह बना है।
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जिले में एक सहकारी समेत पांच चीनी मिलें हैं। सरकारी को छोड़कर अन्य चारों चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू हो चुका है। इसके बाद से हाईवे और सभी संपर्क मार्गों पर गन्ना लदे वाहन दौड़ने लगे हैं। गन्ना ढुलाई में सबसे अधिक संख्या ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की है।
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गन्ना लदी अधिकांश ट्रॉलियों पर पीछे रिफ्लेक्टर नहीं लगा है। रात के अंधेरे में सामने जा रही ट्रॉली नजर नहीं आती हैं। जब पीछे वाहन की हेडलाइट ट्रॉली पर पड़ती है तब चालक को आगे वाहन होने का आभास होता है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है।
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इन दिनों सर्दी बढ़ने पर कोहरा भी पड़ने लगा है। कोहरे में दृश्यता घटने से हादसे का अधिक खतरा रहता है। हाईवे के अलावा सिधौली-मिश्रिख, सीतापुर-मिश्रिख, लहरपुर-हरगांव, बिसवां-रेउसा आदि संपर्क मार्गों पर दिन-रात सैकड़ों गन्ना लदे वाहनों का आवागमन होता है।
संदना के रामेंद्र ने बताया कि गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियाें पर रिफ्लेक्टर लगा होना आवश्यक है। क्योंकि ट्रॉली में पीछे बैक लाइट भी नहीं होती है। ऐसे में रात के समय अथवा कोहरे के दौरान पीछे से वाहन दिखाई नहीं देता है। रामकोट के अनुज बताते हैं कि इन दिनों सहालग चल रही है। शादी-बरात से देर रात वापसी होती है। रिफ्लेक्टर के बगैर दौड़ रहे गन्ना लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली सुरक्षित सफर में बड़ी बाधा बनते हैं। बावजूद इसके परिवहन विभाग और पुलिस इनसे बेपरवाह बना है।