{"_id":"6011af1c8ebc3e5bb1143a24","slug":"negligence-in-disposal-of-complaints-sitapur-news-lko561880123","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही
विज्ञापन
सीतापुर। जनता की समस्याओं के निस्तारण में अफसर लापरवाही बरत रहे हैं। इससे समस्या का निदान सही प्रकार से नहीं हो पा रहा है। बिना शिकायतकर्ता की संतुष्टि के कारण मामला निस्तारित कर दिया जाता है, उसका पक्ष जानने की भी जरूरत नहीं समझी जाती है। इससे एक ही शिकायत कई बार दर्ज होती हैं। आईजीआरएस पोर्टल पर अपठनीय आख्या अपलोड कर दी जाती हैं।
आईजीआरएस प्रक्रिया के तहत शिकायतों का निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। इसकी समीक्षा प्रत्येक माह प्रथम एवं द्वितीय सोमवार मुख्य सचिव के स्तर से की जाती है। बावजूद इसके जिले के अफसर इस कार्य में लापरवाही बरत रहे हैं, क्योंकि शासन स्तर पर की गई समीक्षा में यह पाया गया, शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता अत्यधिक खराब है। डीएम स्तर से भी इसकी समीक्षा की गई तो उसमें तमाम खामियां पाई गईं।
बिना जिम्मेदार अफसर के हस्ताक्षर से शिकायतों का निस्तारण कर दिया जाता है। रिपोर्ट पढ़ने में भी नहीं आती है। तमाम मामलों में यह लिखकर निपटारा कर दिया जाता, प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। जबकि कोर्ट का नाम, वाद संख्या, नियत तिथि आज का उल्लेख नहीं किया जाता है। निस्तारण की जानकारी शिकायकर्ता को भी नहीं दी जाती। बिना पीड़ित पक्ष को सुने व समस्या समाधान के ही समस्या हल कर दी जाती है, जिससे प्रभावित पक्ष परेशान होता है। अन्य कई कारण हैं, जिनके कारण फरियादी की समस्या निस्तारित नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
होगी कार्रवाई
आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का निस्तारण शासन के द्वारा तय मानकों पर न किए जाने पर संबंधित अफसरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में डीएम के निर्देश पर एडीएम न्यायिक प्रभारी अफसर आईजीआरएस हरिशंकर लाल शुक्ल ने सभी दफ्तरों के मुखिया एवं नोडल अफसर को 16 बिन्दुओं पर निर्देश जारी किए हैं। जिनका पालन करते हुए समस्या का समाधान किया जाना है। अन्यथा की स्थिति में पोर्टल पर शिकायतों की रेंडम जांच के दौरान पाई गई कमियों पर संबंधित अफसर व कर्मी पर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
आईजीआरएस प्रक्रिया के तहत शिकायतों का निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। इसकी समीक्षा प्रत्येक माह प्रथम एवं द्वितीय सोमवार मुख्य सचिव के स्तर से की जाती है। बावजूद इसके जिले के अफसर इस कार्य में लापरवाही बरत रहे हैं, क्योंकि शासन स्तर पर की गई समीक्षा में यह पाया गया, शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता अत्यधिक खराब है। डीएम स्तर से भी इसकी समीक्षा की गई तो उसमें तमाम खामियां पाई गईं।
विज्ञापन
बिना जिम्मेदार अफसर के हस्ताक्षर से शिकायतों का निस्तारण कर दिया जाता है। रिपोर्ट पढ़ने में भी नहीं आती है। तमाम मामलों में यह लिखकर निपटारा कर दिया जाता, प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। जबकि कोर्ट का नाम, वाद संख्या, नियत तिथि आज का उल्लेख नहीं किया जाता है। निस्तारण की जानकारी शिकायकर्ता को भी नहीं दी जाती। बिना पीड़ित पक्ष को सुने व समस्या समाधान के ही समस्या हल कर दी जाती है, जिससे प्रभावित पक्ष परेशान होता है। अन्य कई कारण हैं, जिनके कारण फरियादी की समस्या निस्तारित नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
होगी कार्रवाई
आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का निस्तारण शासन के द्वारा तय मानकों पर न किए जाने पर संबंधित अफसरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में डीएम के निर्देश पर एडीएम न्यायिक प्रभारी अफसर आईजीआरएस हरिशंकर लाल शुक्ल ने सभी दफ्तरों के मुखिया एवं नोडल अफसर को 16 बिन्दुओं पर निर्देश जारी किए हैं। जिनका पालन करते हुए समस्या का समाधान किया जाना है। अन्यथा की स्थिति में पोर्टल पर शिकायतों की रेंडम जांच के दौरान पाई गई कमियों पर संबंधित अफसर व कर्मी पर कार्रवाई की जाएगी।