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Sitapur News: 50 हजार में कराई थी हत्या, खेत में दफना दिया था सिर
Wed, 29 Jul 2026 12:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Wed, 29 Jul 2026 12:07 AM IST
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भुपई की फाइल फोटो व पुलिस की गिरफ्त में दोनों आरोपी। संवाद
सीतापुर। संदना के नेवादाखुर्द गांव में 26 जुलाई को युवक की सिर कटी लाश मिलने की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। मृतक की पहचान खैराबाद के बहूनगर निवासी भुपई यादव (42) के रूप में हुई है। भुपई की अपने ट्यूबवेल के कर्मचारी की पत्नी से नजदीकी थी। इससे नाराज कर्मचारी ने ही हत्या की साजिश रची। उसने भुपई के साथ ही रहने वाली एक महिला व उसके भाई को 50 हजार रुपये का लालच देकर हत्या करा दी। शव की पहचान न हो सके, इसलिए सिर काटकर घटनास्थल से 200 मीटर दूर खेत में दफना दिया था। पुलिस ने वारदात में शामिल महिला व उसके भाई को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया है। साजिश रचने वाले युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
एएसपी (दक्षिणी) दुर्गेश ने बताया कि 26 जुलाई को नेवादाखुर्द में भुपई यादव की सिर कटी लाश मिली थी। मौके पर मिले झोले व अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदना के नईगढ़ी निवासी शशी देवी व भरौना निवासी उसके भाई रिंकू का नाम प्रकाश में आया। दोनों को गिरफ्तार किया गया। शशी देवी ने पूछताछ में बताया कि उसकी लंबे समय से भुपई से नजदीकी थी। कुछ समय से भुपई के संबंध उसके ट्यूबवेल पर काम करने वाले राजेश की पत्नी से हो गए थे। इसकी जानकारी होने से राजेश नाराज था। राजेश ने भुपई की हत्या के लिए शशी व उसके भाई रिंकू को 50 हजार रुपये का लालच दिया था। इस वजह से शशी ने रिंकू के साथ मिलकर भुपई की हत्या कर दी। इसके बाद लगभग 200 मीटर दूर खेत के कोने में गड्ढा खोदकर सिर दफन कर दिया था। एएसपी ने बताया कि खेत से भुपई का सिर, झाड़ियों से मृतक की शर्ट, बनियान व हत्या में प्रयुक्त बांका बरामद कर लिया गया है।
इस तरह अंजाम दी वारदात
पुलिस की जांच में पता चला कि साजिश के तहत तीनों आरोपियों ने 25 जुलाई की रात 10 बजे भुपई यादव को अत्यधिक शराब पिलाई। इसके बाद खेत में ले जाकर शशी व रिंकू ने बांके से हमला करके भुपई की हत्या कर दी। फिर सिर धड़ से अलग करके खेत में गड्ढा खोदकर दफना दिया। शशी ने बांका और भुपई के कपड़े झाड़ियों में फेंक दिए थे।
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शशी ने भुपई संग मिलकर की थी पति की हत्या
पूछताछ में सामने आया कि शशी को उसके पति गोविंद ने 50 हजार रुपये में भुपई के हाथों बेच दिया था। इसके बाद भी गोविंद अक्सर भुपई के पास आकर शशी से मिलने की कोशिश करता था। इससे शशी व भुपई नाराज थे। वर्ष 2014 में शशी देवी व भुपई यादव ने मिलकर गोविंद की हत्या कर दी थी। इस संबंध में लखनऊ के बक्शी का तालाब थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने शशी व भुपई को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। शशी छह महीने बाद ही जमानत पर जेल से रिहा हो गई थी। जबकि भुपई को वर्ष 2024 में जमानत मिल गई थी।
सिपाही ने की थी शव की पहचान
भुपई के सिर कटे शव की पहचान सबसे पहले एक सिपाही ने की थी। दरअसल, गोविंद की हत्या के बाद जमानत पर छूटे भुपई का पुलिस नियमित तौर पर सत्यापन करती थी। वह सिपाही अक्सर भुपई का सत्यापन करने आता था। उसने शव देखते ही सहकर्मी सिपाही से आशंका जताई थी कि वह भुपई का है। कुछ समय बाद ही शव की पहचान हो गई थी।
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एएसपी (दक्षिणी) दुर्गेश ने बताया कि 26 जुलाई को नेवादाखुर्द में भुपई यादव की सिर कटी लाश मिली थी। मौके पर मिले झोले व अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदना के नईगढ़ी निवासी शशी देवी व भरौना निवासी उसके भाई रिंकू का नाम प्रकाश में आया। दोनों को गिरफ्तार किया गया। शशी देवी ने पूछताछ में बताया कि उसकी लंबे समय से भुपई से नजदीकी थी। कुछ समय से भुपई के संबंध उसके ट्यूबवेल पर काम करने वाले राजेश की पत्नी से हो गए थे। इसकी जानकारी होने से राजेश नाराज था। राजेश ने भुपई की हत्या के लिए शशी व उसके भाई रिंकू को 50 हजार रुपये का लालच दिया था। इस वजह से शशी ने रिंकू के साथ मिलकर भुपई की हत्या कर दी। इसके बाद लगभग 200 मीटर दूर खेत के कोने में गड्ढा खोदकर सिर दफन कर दिया था। एएसपी ने बताया कि खेत से भुपई का सिर, झाड़ियों से मृतक की शर्ट, बनियान व हत्या में प्रयुक्त बांका बरामद कर लिया गया है।
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इस तरह अंजाम दी वारदात
पुलिस की जांच में पता चला कि साजिश के तहत तीनों आरोपियों ने 25 जुलाई की रात 10 बजे भुपई यादव को अत्यधिक शराब पिलाई। इसके बाद खेत में ले जाकर शशी व रिंकू ने बांके से हमला करके भुपई की हत्या कर दी। फिर सिर धड़ से अलग करके खेत में गड्ढा खोदकर दफना दिया। शशी ने बांका और भुपई के कपड़े झाड़ियों में फेंक दिए थे।
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शशी ने भुपई संग मिलकर की थी पति की हत्या
पूछताछ में सामने आया कि शशी को उसके पति गोविंद ने 50 हजार रुपये में भुपई के हाथों बेच दिया था। इसके बाद भी गोविंद अक्सर भुपई के पास आकर शशी से मिलने की कोशिश करता था। इससे शशी व भुपई नाराज थे। वर्ष 2014 में शशी देवी व भुपई यादव ने मिलकर गोविंद की हत्या कर दी थी। इस संबंध में लखनऊ के बक्शी का तालाब थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने शशी व भुपई को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। शशी छह महीने बाद ही जमानत पर जेल से रिहा हो गई थी। जबकि भुपई को वर्ष 2024 में जमानत मिल गई थी।
सिपाही ने की थी शव की पहचान
भुपई के सिर कटे शव की पहचान सबसे पहले एक सिपाही ने की थी। दरअसल, गोविंद की हत्या के बाद जमानत पर छूटे भुपई का पुलिस नियमित तौर पर सत्यापन करती थी। वह सिपाही अक्सर भुपई का सत्यापन करने आता था। उसने शव देखते ही सहकर्मी सिपाही से आशंका जताई थी कि वह भुपई का है। कुछ समय बाद ही शव की पहचान हो गई थी।