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Sitapur News: कलश स्थापना कर हुई मां शैलपुत्री की उपासना
Sun, 30 Mar 2025 11:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 30 Mar 2025 11:50 PM IST
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सीतापुर। चैत्र नवरात्र के पहले दिन रविवार को देवी मंदिरों व घरों में कलश स्थापना के साथ भक्तों ने मां शैलपुत्री की आराधना कर सुख समृद्धि का आशीष मांगा। पूरे दिन मंदिरों में घंटा-घड़ियाल की आवाज गूंजते रही। घरों पर श्रद्धालुओं ने बालू और मिट्टी में जौं मिलाकर कलश की स्थापना की। इसके बाद आटा से नवग्रह और चौक बनाया। इसके बाद देवी मां को फूलमाला, पान, सुपाड़ी, नारियल, घी, मेवा, मिष्ठान, चुनरी, रोली और चंदन आदि अर्पित कर मां सप्तशती का पाठ करने के बाद मां की आरती उतारी गई।
शहर के प्राचीन दुर्गा मंदिर आलमनगर, पराग डेरी के करीब स्थित मां काली मंदिर, आंख अस्पताल मार्ग स्थित देवी मंदिर, पंजाबी धर्मशाला के दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। नवरात्र के पहले दिन नैमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी के दरबार में भोर से ही भक्तों की भीड़ पूजा अर्चना के लिए जुट गई थी। पुजारी अटल शास्त्री ने माता की आरती उतारी। चैत्र नवरात्र का पहला दिन होने के कारण भक्तों ने शैल पुत्री के रूप में मां ललिता का ध्यान पूजन कर आशीष मांगा।
आचार्यों ने दुर्गा सप्तसती व ललिता सहस्त्रनाम आदि धर्म ग्रन्थों के पाठ का क्रम प्रारंभ किया। मंदिर स्थित प्राचीन हवन कुण्ड में श्रद्धालुओं ने प्रारंभिक हवन भी किया। मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुगणों ने मनोकामना के अनुसार बच्चों के मुंडन संस्कार संपन्न कराए। इस दौरान मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं को पंचामृत और प्रसाद वितरण का वितरण भी किया गया। कालीपीठ मे पुजारी भास्कर शास्त्री ने विधि-विधान से कलश स्थापना कर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। इसके बाद देवी के दर्शन-पूजन का क्रम देर शाम तक चलता रहा।
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108 कन्याओं को कराया भोजन
नैमिषारण्य के ललिता आश्रम में पुजारी लाल बिहारी शास्त्री ने कन्या भोज का आयोजन किया। पुजारी ने कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा प्रदान की। लाल बिहारी ने बताया कि पूरे नवरात्र भर प्रतिदिन 108 कन्याओं को भोजन कराया जाता है।
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शहर के प्राचीन दुर्गा मंदिर आलमनगर, पराग डेरी के करीब स्थित मां काली मंदिर, आंख अस्पताल मार्ग स्थित देवी मंदिर, पंजाबी धर्मशाला के दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। नवरात्र के पहले दिन नैमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी के दरबार में भोर से ही भक्तों की भीड़ पूजा अर्चना के लिए जुट गई थी। पुजारी अटल शास्त्री ने माता की आरती उतारी। चैत्र नवरात्र का पहला दिन होने के कारण भक्तों ने शैल पुत्री के रूप में मां ललिता का ध्यान पूजन कर आशीष मांगा।
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आचार्यों ने दुर्गा सप्तसती व ललिता सहस्त्रनाम आदि धर्म ग्रन्थों के पाठ का क्रम प्रारंभ किया। मंदिर स्थित प्राचीन हवन कुण्ड में श्रद्धालुओं ने प्रारंभिक हवन भी किया। मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुगणों ने मनोकामना के अनुसार बच्चों के मुंडन संस्कार संपन्न कराए। इस दौरान मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं को पंचामृत और प्रसाद वितरण का वितरण भी किया गया। कालीपीठ मे पुजारी भास्कर शास्त्री ने विधि-विधान से कलश स्थापना कर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। इसके बाद देवी के दर्शन-पूजन का क्रम देर शाम तक चलता रहा।
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108 कन्याओं को कराया भोजन
नैमिषारण्य के ललिता आश्रम में पुजारी लाल बिहारी शास्त्री ने कन्या भोज का आयोजन किया। पुजारी ने कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा प्रदान की। लाल बिहारी ने बताया कि पूरे नवरात्र भर प्रतिदिन 108 कन्याओं को भोजन कराया जाता है।