{"_id":"5e0ce1ac8ebc3e87b3689e3f","slug":"mnrega-workers-sitapur-news-lko5007784146","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनरेगा मजदूरों को भुगतान में जिला फिसड्डी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनरेगा मजदूरों को भुगतान में जिला फिसड्डी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीतापुर। मनरेगा भुगतान में सीतापुर जिला सबसे फिसड्डी है। शासन की ओर से प्रदेश के 75 जिलों की जारी रैंकिंग में सीतापुर फिसड्डी जिलों में पहले नंबर पर है। 16 दिन से अधिक समय बीतने के बाद भी 5304 मस्टर रोल (एमआर) का मजदूरी भुगतान नहीं हुआ है। आठ दिन में मनरेगा मजदूरों को भुगतान हो जाना चाहिए। ऐसा न होने पर प्रतिदिन बकाया मजदूरी का 0.05 फीसदी प्रतिकर संबंधित जिम्मेदार के वेतन से मजदूर को दिया जाएगा।
जिले में मनरेगा मजदूरों को समय से भुगतान नहीं हो रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा विलंबित भुगतान की समीक्षा 8 दिवस पर की जा रही है। 30 दिसंबर को एमआईएस पर प्रदर्शित सूचना के आंकड़ों का परीक्षण करने पर पाया गया कि नौ दिन बीत जाने के बाद जिले के 415 एमआर भुगतान के लिए पेंडिंग हैं। इसका कारण एफटीओ (फंड ट्रांसफर आर्डर) पर बीडीओ द्वारा डिजिटल सिंग्नेचर न किया जाना है।
11 दिन बीतने के बाद 403 एमआर, 13 दिन बीतने के बाद 466 एमआर, 15 दिन बीतने के बाद 518 एमआए एवं 16 दिन बीतने के बाद 5304 एमआर भुगतान के लिए लंबित हैं। इसका उल्लेख अपर आयुक्त मनरेगा योगेश कुमार ने डीएम को भेजे गए पत्र में किया है। इसमें निर्देश दिए हैं कि इससे प्रतीत होता है कि जिले स्तर पर उच्च अधिकारियों द्वारा समुचित रूप से समीक्षा नहीं की जा रही है।
विज्ञापन
राज्य स्तर से आयोजित बैठकों एवं वीसी के माध्यम से निर्धारित समय सीमा में श्रमिकों का भुगतान करने के निरंतर निर्देश दिए गए हैं। जिले में दो दिन से लेकर 16 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी 8418 मस्टर रोल बीडीओ द्वारा एफटीओ पर डिजिटल सिग्नेचर न होने के कारण भुगतान के लिए पेंडिंग हैं।
मनरेगा मजदूरों को समय से भुगतान कराया जाएगा। ब्लॉकवार समीक्षा करने के बाद संबंधित बीडीओ को निर्देश दिए जाएंगे कि वे जल्द भुगतान करें।
- संदीप कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
विज्ञापन
जिले में मनरेगा मजदूरों को समय से भुगतान नहीं हो रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा विलंबित भुगतान की समीक्षा 8 दिवस पर की जा रही है। 30 दिसंबर को एमआईएस पर प्रदर्शित सूचना के आंकड़ों का परीक्षण करने पर पाया गया कि नौ दिन बीत जाने के बाद जिले के 415 एमआर भुगतान के लिए पेंडिंग हैं। इसका कारण एफटीओ (फंड ट्रांसफर आर्डर) पर बीडीओ द्वारा डिजिटल सिंग्नेचर न किया जाना है।
विज्ञापन
11 दिन बीतने के बाद 403 एमआर, 13 दिन बीतने के बाद 466 एमआर, 15 दिन बीतने के बाद 518 एमआए एवं 16 दिन बीतने के बाद 5304 एमआर भुगतान के लिए लंबित हैं। इसका उल्लेख अपर आयुक्त मनरेगा योगेश कुमार ने डीएम को भेजे गए पत्र में किया है। इसमें निर्देश दिए हैं कि इससे प्रतीत होता है कि जिले स्तर पर उच्च अधिकारियों द्वारा समुचित रूप से समीक्षा नहीं की जा रही है।
विज्ञापन
राज्य स्तर से आयोजित बैठकों एवं वीसी के माध्यम से निर्धारित समय सीमा में श्रमिकों का भुगतान करने के निरंतर निर्देश दिए गए हैं। जिले में दो दिन से लेकर 16 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी 8418 मस्टर रोल बीडीओ द्वारा एफटीओ पर डिजिटल सिग्नेचर न होने के कारण भुगतान के लिए पेंडिंग हैं।
मनरेगा मजदूरों को समय से भुगतान कराया जाएगा। ब्लॉकवार समीक्षा करने के बाद संबंधित बीडीओ को निर्देश दिए जाएंगे कि वे जल्द भुगतान करें।
- संदीप कुमार, मुख्य विकास अधिकारी