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Sitapur News: घास के उत्पाद बना ग्रामीण जिंदगियां संवार रहीं मंजू
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संदना में घास के उत्पाद बनातीं मंजू देवी व अन्य महिलाएं।
संदना। गोंदलामऊ ब्लॉक के महसुई गांव निवासी मंजू देवी ग्रामीण महिलाओं के लिए मिसाल बनी हैं। सात वर्षों से वह ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार की राह पर चलना सिखा रही हैं। उन्होंने बालाजी स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाओं को प्रशिक्षित करना भी शुरू किया है। उनका समूह अब नजीर बन चुका है।
मंजू देवी ने बताया कि उनके पति ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। करीब सात वर्ष पूर्व कोविड काल से पूर्व घास से उत्पाद बनाना शुरू किया। इसके तहत डलिया, टोकरी और घरेलू उपयोग के अन्य सामान तैयार कर बेचने शुरू किए।
करीब चार वर्ष पूर्व उन्होंने डालमिया भारत फाउंडेशन से आधुनिक ढंग से घास के उत्पाद तैयार करने का हुनर सीखा। वर्तमान में उनके द्वारा तैयार डलिया और अन्य सामान दिल्ली, हरियाणा और लखनऊ जैसे शहरों में भेजे जा रहे हैं।
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दस महिलाओं की बदली आर्थिक स्थिति : मंजू ने बताया कि बालाजी स्वयं सहायता समूह में उनके साथ सुनीता, रामगुनी, फूलमती, विजय कुमारी, शशि शर्मा, लीलावती समेत कुल 10 महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
मंजू ने सभी को यह हुनर सिखाया है। मंजू बताती हैं कि अब कई शहरों के लोग सीधे संपर्क कर सामान खरीदते हैं, जिससे आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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मंजू देवी ने बताया कि उनके पति ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। करीब सात वर्ष पूर्व कोविड काल से पूर्व घास से उत्पाद बनाना शुरू किया। इसके तहत डलिया, टोकरी और घरेलू उपयोग के अन्य सामान तैयार कर बेचने शुरू किए।
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करीब चार वर्ष पूर्व उन्होंने डालमिया भारत फाउंडेशन से आधुनिक ढंग से घास के उत्पाद तैयार करने का हुनर सीखा। वर्तमान में उनके द्वारा तैयार डलिया और अन्य सामान दिल्ली, हरियाणा और लखनऊ जैसे शहरों में भेजे जा रहे हैं।
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दस महिलाओं की बदली आर्थिक स्थिति : मंजू ने बताया कि बालाजी स्वयं सहायता समूह में उनके साथ सुनीता, रामगुनी, फूलमती, विजय कुमारी, शशि शर्मा, लीलावती समेत कुल 10 महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
मंजू ने सभी को यह हुनर सिखाया है। मंजू बताती हैं कि अब कई शहरों के लोग सीधे संपर्क कर सामान खरीदते हैं, जिससे आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।