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15 को मनाई जाएगी मकर संक्रांति

Thu, 13 Jan 2022 12:15 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jan 2022 12:15 AM IST
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Makar Sankranti will be celebrated on 15th
नैमिषारण्य में चक्रतीर्थ में नहाते श्रद्घालु। - संवाद - फोटो : SITAPUR
नैमिषारण्य (सीतापुर)। इस बार मकर संक्रांति का पर्व जिले में 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इसके साथ ही मांगलिक कार्यक्रम भी शुरू हो जाएंगे। मकर संक्रांति के दिन से सूर्य देव के उत्तरायण होते ही शुभ लग्नें शुरू हो जाएंगी। आचार्य विवेक द्विवेदी का कहना है कि सूर्य शाम आठ बजे 14 जनवरी को मकर राशि में जाएंगे। इस कारण मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय काल के साथ शुरू होगा। इस दिन खिचड़ी दान कर खिचड़ी खाने का विशेष महत्व है।
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सूर्य एक महीने में एक राशि से दूसरी राशि पर संक्रमण करते हैं। जिसके कारण संक्रांति होती है। मकर संक्रांति का आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र तीर्थ स्थानों व पुण्य नदियों में स्नान दान का शास्त्रों में विशेष महत्व बतलाया गया है। सूर्योदय काल में तीर्थ में स्नानकर ब्राह्मणों व जरूरतमंद लोगों को अवश्य दान देना चाहिए। मकर संक्रांति से दिन बड़ा और रात छोटी होना शुरू हो जाती हैं। इस दिन से हेमन्त ऋतु समाप्त होकर शिशिर ऋतु का आगमन होता है। खर मास समाप्त होता है और मांगलिक कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं।
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मकर संक्रांति का है विशेष महत्व
सूर्य पर आधारित हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बहुत महत्व है। वेद और पुराणों में भी इस दिन का विशेष उल्लेख मिलता है। होली, दीपावली, दुर्गोत्सव व शिवरात्रि और अन्य कई त्योहार जो विशेष कथा पर आधारित हैं। वहीं, मकर संक्रांति खगोलीय घटना है, जिससे जड़ और चेतन की दशा और दिशा तय होती है। मकर संक्रांति का महत्व हिंदू धर्मावलंबियों के लिए वैसा ही है जैसे वृक्षों में पीपल, हाथियों में ऐरावत और पहाड़ों में हिमालय।
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खिचड़ी दान व खिचड़ी खाने की है परंपरा
मकर संक्रांति का आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इस दिन दान-पुण्य, पूजा पाठ करने से अधिक पुण्य मिलता है। इस दिन 14 वस्तुओं के दान करने का महत्व है। तुलादान करना चाहिए। पवित्र तीर्थ स्थानों व पुण्य नदियों में स्नान दान का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। सूर्योदय काल में तीर्थ में स्नानकर ब्राह्मणों व जरूरतमंद लोगों को दान करना चाहिए।
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