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टिड्डी दल के सीतापुर की ओर रुख करने की आशंका
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मिश्रिख (सीतापुर)। टिड्डी दल के जिले में आने की आशंका है। हरदोई जनपद के प्रताप नगर चौराहे पर इन्हें देखा गया है। अब इनके सीतापुर की ओर रुख करने की आशंका व्यक्त की जा रही है। जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को सतर्क किया है। उन्होंने टिड्डी दल से फसलों की सुरक्षा के उपाय बताए हैं।
टिड्डी कीट किसानों का सबसे बड़ा शत्रु है। टिड्डी दल एक दिन में 100 से 200 किमी. की दूरी तय कर सकता है। पर इनके आगे बढ़ने की दिशा हवा की गति पर निर्भर करती है। टिड्डी दल सामूहिक रूप से लाखों की संख्या में समूह बनाकर पेड़-पौधे एवं वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यह दल 15 से 20 मिनट में फसलों की पत्तियों को खाकर नष्ट कर देते हैं। यह सभी प्रकार के हरे पत्तों पर आक्रमण करते हैं। टिड्डी दल खेतों में शाम 6 से 8 बजे के आसपास पहुंचकर जमीन पर बैठ जाते हैं और वहीं पर रात गुजारते हैं।
रातभर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ान भरते हैं। अंडा देने की अवधि में इनका दल एक स्थान पर 3 से 4 दिन तक रुकता है। जौनपुर होते हुए आजमगढ़, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ आदि जिलों में इनका भारी प्रकोप हुआ है, जहां पर इनको काफी संख्या मारा भी गया है। इससे ये छोटे-छोटे दल में बट गए हैं। इस समय एक दल फिरोजाबाद के मदनपुर विकासखंड में भी दिखाई दिया है। कुछ लोगों का कहना है कि हरदोई जनपद के प्रताप नगर चौराहे से होकर सीतापुर जनपद की तरफ जाते हुए देखा गया है।
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ये फसलों को क्षति पहुंचा सकते है। लेकिन इनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि सजग रहने की आवश्यकता है। टिड्डी दल का समूह जब भी आकाश में दिखाई पड़े तो उनको भगाने के लिए खेत के आसपास मौजूद घासफूस का उपयोग करके धुआं करें। जिससे टिड्डी दल खेत में न बैठकर आगे निकल जाएगा। टिड्डी दल ऊपर उड़ता दिखाई दे तो खेतों में पटाखे फोड़े, थाली ढोल-नगाड़े आदि बजाकर तेज आवाज करें, ट्रैक्टर के साइलेंसर को निकाल कर भी तेज आवाज कर सकते हैं, यह कीट डरपोक स्वभाव का होता है।
जिला कृषि अधिकारी अखिलेशानंद पांडेय ने बताया कि टिड्डी दल के नियंत्रण को क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी या बेन्डियोकार्ब 80 प्रतिशत, क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत ईसी 480 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 प्रतिशत ईसी 625 मिली या डेल्टामेथरिन 1.25 प्रतिशत एससी 1400 मिली या डाईफ्लूबेनज्यूरॉन 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 120 ग्राम या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 10 प्रतिशत डब्ल्यूपी 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर फसल पर छिड़काव के लिए उपयोग किया जा सकता है।
मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल या फेनवेलरेट धूल की 25 किलो मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव किया जा सकता है। आपके क्षेत्र में कहीं पर टिड्डी दल दिखाई दे तो ये उपाय को अपनाते हुए तत्काल अपने क्षेत्र के उद्यान विभाग एवं कृषि विभाग के अधिकारियों व प्राविधिक सहायकों / सलाहकारों या कृषि विज्ञान केंद्र अंबंरपुर को जानकारी दें।
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टिड्डी कीट किसानों का सबसे बड़ा शत्रु है। टिड्डी दल एक दिन में 100 से 200 किमी. की दूरी तय कर सकता है। पर इनके आगे बढ़ने की दिशा हवा की गति पर निर्भर करती है। टिड्डी दल सामूहिक रूप से लाखों की संख्या में समूह बनाकर पेड़-पौधे एवं वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यह दल 15 से 20 मिनट में फसलों की पत्तियों को खाकर नष्ट कर देते हैं। यह सभी प्रकार के हरे पत्तों पर आक्रमण करते हैं। टिड्डी दल खेतों में शाम 6 से 8 बजे के आसपास पहुंचकर जमीन पर बैठ जाते हैं और वहीं पर रात गुजारते हैं।
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रातभर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ान भरते हैं। अंडा देने की अवधि में इनका दल एक स्थान पर 3 से 4 दिन तक रुकता है। जौनपुर होते हुए आजमगढ़, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ आदि जिलों में इनका भारी प्रकोप हुआ है, जहां पर इनको काफी संख्या मारा भी गया है। इससे ये छोटे-छोटे दल में बट गए हैं। इस समय एक दल फिरोजाबाद के मदनपुर विकासखंड में भी दिखाई दिया है। कुछ लोगों का कहना है कि हरदोई जनपद के प्रताप नगर चौराहे से होकर सीतापुर जनपद की तरफ जाते हुए देखा गया है।
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ये फसलों को क्षति पहुंचा सकते है। लेकिन इनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि सजग रहने की आवश्यकता है। टिड्डी दल का समूह जब भी आकाश में दिखाई पड़े तो उनको भगाने के लिए खेत के आसपास मौजूद घासफूस का उपयोग करके धुआं करें। जिससे टिड्डी दल खेत में न बैठकर आगे निकल जाएगा। टिड्डी दल ऊपर उड़ता दिखाई दे तो खेतों में पटाखे फोड़े, थाली ढोल-नगाड़े आदि बजाकर तेज आवाज करें, ट्रैक्टर के साइलेंसर को निकाल कर भी तेज आवाज कर सकते हैं, यह कीट डरपोक स्वभाव का होता है।
जिला कृषि अधिकारी अखिलेशानंद पांडेय ने बताया कि टिड्डी दल के नियंत्रण को क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी या बेन्डियोकार्ब 80 प्रतिशत, क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत ईसी 480 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 प्रतिशत ईसी 625 मिली या डेल्टामेथरिन 1.25 प्रतिशत एससी 1400 मिली या डाईफ्लूबेनज्यूरॉन 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 120 ग्राम या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 10 प्रतिशत डब्ल्यूपी 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर फसल पर छिड़काव के लिए उपयोग किया जा सकता है।
मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल या फेनवेलरेट धूल की 25 किलो मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव किया जा सकता है। आपके क्षेत्र में कहीं पर टिड्डी दल दिखाई दे तो ये उपाय को अपनाते हुए तत्काल अपने क्षेत्र के उद्यान विभाग एवं कृषि विभाग के अधिकारियों व प्राविधिक सहायकों / सलाहकारों या कृषि विज्ञान केंद्र अंबंरपुर को जानकारी दें।