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Sitapur News: भगवान कृष्ण के वरदान से बर्बरीक बने खाटू श्याम
Tue, 11 Nov 2025 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Tue, 11 Nov 2025 12:13 AM IST
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पिसावां। बबुरदीपुर के सिद्धेश्वर नाथ मंदिर पर पंडित हरेराम शुक्ल की अध्यक्षता में चल रहे लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में सोमवार को प्रवाचक पंडित ब्रजेश शुक्ल महारथी ने खाटू श्याम की कथा सुनाई। प्रवाचक ने कहा कि अज्ञातवास के दौरान जब पांडव अपनी जान बचाते हुए भटक रहे थे, तब भीम का सामना हिडिम्बा से हुआ। हिडिम्बा ने भीम से एक पुत्र को जन्म दिया, जिसे घटोत्कक्ष कहा जाता था।
घाटोत्कक्ष से बर्बरीक पुत्र हुआ। इन दोनों को अपनी वीरता और शक्तियों के लिए जाना जाता था। जब कौरव और पांडवों के बीच युद्ध होना था, तब बर्बरीक ने युद्ध देखने का निर्णय लिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने जब उनसे पूछा वो युद्ध में किसकी तरफ हैं, तो उन्होंने कहा था कि जो पक्ष हारेगा वो उसकी ओर से लड़ेंगे। भगवान श्रीकृष्ण युद्ध का परिणाम जानते थे। उन्हें डर था कि कहीं पांडवों के लिए उल्टा न पड़ जाए। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को रोकने के लिए दान मांगा। दान में उन्होंने उनसे शीश मांग लिया।
दान में बर्बरीक ने उनको अपना शीश दे दिया, लेकिन आखिर तक युद्ध देखने की इच्छा जाहिर की। श्रीकृष्ण ने इच्छा स्वीकार करते हुए उनका सिर युद्ध वाली जगह एक पहाड़ी पर रख दिया। युद्ध के बाद पांडव आपस में बात करने लगे कि जीत का श्रेय किसे जाता है। तब बर्बरीक ने कहा कि उन्हें जीत भगवान श्रीकृष्ण की वजह से मिली है। श्रीकृष्ण इस बलिदान से प्रसन्न हुए और उन्होंने बर्बरीक को कलियुग में खाटू श्याम के नाम से पूजे जाने का वरदान दिया।
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घाटोत्कक्ष से बर्बरीक पुत्र हुआ। इन दोनों को अपनी वीरता और शक्तियों के लिए जाना जाता था। जब कौरव और पांडवों के बीच युद्ध होना था, तब बर्बरीक ने युद्ध देखने का निर्णय लिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने जब उनसे पूछा वो युद्ध में किसकी तरफ हैं, तो उन्होंने कहा था कि जो पक्ष हारेगा वो उसकी ओर से लड़ेंगे। भगवान श्रीकृष्ण युद्ध का परिणाम जानते थे। उन्हें डर था कि कहीं पांडवों के लिए उल्टा न पड़ जाए। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को रोकने के लिए दान मांगा। दान में उन्होंने उनसे शीश मांग लिया।
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दान में बर्बरीक ने उनको अपना शीश दे दिया, लेकिन आखिर तक युद्ध देखने की इच्छा जाहिर की। श्रीकृष्ण ने इच्छा स्वीकार करते हुए उनका सिर युद्ध वाली जगह एक पहाड़ी पर रख दिया। युद्ध के बाद पांडव आपस में बात करने लगे कि जीत का श्रेय किसे जाता है। तब बर्बरीक ने कहा कि उन्हें जीत भगवान श्रीकृष्ण की वजह से मिली है। श्रीकृष्ण इस बलिदान से प्रसन्न हुए और उन्होंने बर्बरीक को कलियुग में खाटू श्याम के नाम से पूजे जाने का वरदान दिया।
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