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Sitapur News: जाला रोग आम की फसल को कर रहा बर्बाद
Sun, 03 Nov 2024 08:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 03 Nov 2024 08:31 PM IST
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औरंगाबाद(सीतापुर)। क्षेत्र में आम के बागवान इस समय बेहद परेशान हैं। आम के बागों में जाला रोग लग रहा है। यह फसल की बर्बाद कर रहा है। किसान कई तरह के कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं लेकिन इससे वह निजात नहीं पा रहे हैं।
औरंगाबाद सहित संदना, रामगढ़, नैमिष, भानपुर, भैरमपुर, अनोगी, हसनगंज, रहिमाबाद, हथिया, कल्ली, कोरौना, आंट, जमुनापुर आदि इलाके में आम के बाग है। हजारों किसानों की आजीविका आम की फसल पर ही निर्भर है। क्षेत्र के अधिकतर बागों को जाला रोग ने अपनी चपेट में ले लिया है।
आम के सीजन में इलाके के बागों से बड़े पैमाने पर आम की सप्लाई महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, पंजाब, बंगाल, दिल्ली सहित देश के तमाम हिस्सों में की जाती है। बीते एक माह से क्षेत्र के बागों में जाला कीट तेजी के साथ बढ़ रहा है।
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ये कीट पेड़ों के कल्लों को अपने द्वारा छोड़े गए जाले से लपेट कर गुच्छे नुमा बना कर तेजी से उसका रस चूस कर सुखा रहा है। जिसका असर आने वाली आम की फसल की पैदावार पर पड़ने का अंदेशा है। इस समय बागवान पेड़ों पर फैले जाला कीट को मारने के लिए तरह-तरह के कीटनाशकों का छिड़काव तेजी के साथ कर रहे हैं।
नहीं हो रहा असर
बागवान असगर ने बताया कि आम के पेड़ों पर लगे जाला कीट द्वारा पेड़ों के कल्ले का रस चूस लेने के कारण पेड़ के कल्ले सूख रहे हैं जिससे पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। कीटनाशकों की सही जानकारी न होने के कारण बागवानों को इस कीट को मारने में दिक्कतें आ रही हैं। वहीं कल्लो के नष्ट हो जाने से बौर नहीं आने की आशंका बढ़ गई है। बागवान जावेद बेग ने बताया कि इस समय आम के पेड़ों पर जाला कीट के अलावा कटर कीट का प्रकोप बागों में देखा जा सकता है। कटर कीट नए कोपलों को काट रहा है। बागवान रामनाथ, शाहनवाज, सलीम कुरैशी, मोबीन बेग आदि ने बताया जानकारी के अभाव में अधिकतर बागवान कीटनाशक बेचने वाले दुकानदारों द्वारा बताई दवाओं का ही प्रयोग करते है। जो अक्सर बेअसर साबित होती है।
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औरंगाबाद सहित संदना, रामगढ़, नैमिष, भानपुर, भैरमपुर, अनोगी, हसनगंज, रहिमाबाद, हथिया, कल्ली, कोरौना, आंट, जमुनापुर आदि इलाके में आम के बाग है। हजारों किसानों की आजीविका आम की फसल पर ही निर्भर है। क्षेत्र के अधिकतर बागों को जाला रोग ने अपनी चपेट में ले लिया है।
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आम के सीजन में इलाके के बागों से बड़े पैमाने पर आम की सप्लाई महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, पंजाब, बंगाल, दिल्ली सहित देश के तमाम हिस्सों में की जाती है। बीते एक माह से क्षेत्र के बागों में जाला कीट तेजी के साथ बढ़ रहा है।
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ये कीट पेड़ों के कल्लों को अपने द्वारा छोड़े गए जाले से लपेट कर गुच्छे नुमा बना कर तेजी से उसका रस चूस कर सुखा रहा है। जिसका असर आने वाली आम की फसल की पैदावार पर पड़ने का अंदेशा है। इस समय बागवान पेड़ों पर फैले जाला कीट को मारने के लिए तरह-तरह के कीटनाशकों का छिड़काव तेजी के साथ कर रहे हैं।
नहीं हो रहा असर
बागवान असगर ने बताया कि आम के पेड़ों पर लगे जाला कीट द्वारा पेड़ों के कल्ले का रस चूस लेने के कारण पेड़ के कल्ले सूख रहे हैं जिससे पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। कीटनाशकों की सही जानकारी न होने के कारण बागवानों को इस कीट को मारने में दिक्कतें आ रही हैं। वहीं कल्लो के नष्ट हो जाने से बौर नहीं आने की आशंका बढ़ गई है। बागवान जावेद बेग ने बताया कि इस समय आम के पेड़ों पर जाला कीट के अलावा कटर कीट का प्रकोप बागों में देखा जा सकता है। कटर कीट नए कोपलों को काट रहा है। बागवान रामनाथ, शाहनवाज, सलीम कुरैशी, मोबीन बेग आदि ने बताया जानकारी के अभाव में अधिकतर बागवान कीटनाशक बेचने वाले दुकानदारों द्वारा बताई दवाओं का ही प्रयोग करते है। जो अक्सर बेअसर साबित होती है।