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जय बालाजी सरकार, कर दो कोरोना का संहार
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सीतापुर। जिले में शहर के साथ ही ग्रामीण अंचल में ज्येष्ठ माह के पहले मंगलवार की धूम रही। मंदिरों में भगवान हनुमान की मूर्तियों को सजाया गया। भक्तों ने महावीर का पूजन-अर्चन करके देश-दुनिया को कोरोना महामारी से मुक्त करने की मन्नत मांगी। पूजन-अर्चन का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
पुजारियों ने कोविड प्रोटोकॉल के पालन को लेकर विशेष ख्याल रखा। गर्भ गृह में एक समय में चार से पांच लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई। कई मंदिरों पर भक्तों के हाथ सैनिटाइज कराए गए। ज्येष्ठ के पहले मंगल को लेकर भोर से ही भक्तों में उत्साह का संचार हो गया। स्नान-ध्यान करके भक्त पुष्प और फूल लेकर मंदिरों के लिए चल दिए। भक्तों ने मंदिरों की सफाई करके भगवान महावीर का भव्य श्रंगार किया।
फूल-माला से मंदिरों को भी सजाया गया। सजे-धजे मंदिरों की अनुपम छटा देखते ही बनी। भक्तों ने धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करके प्रभु का पूजन किया और दुनिया से महामारी मिटाने का वर मांगा। भगवान के दर्शनार्थ भक्त देर शाम तक मंदिरों में हाजिरी लगाई। इस दौरान लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते दिखे।
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शहर के छोटा हनुमान मंदिर, बड़ा हनुमान मंदिर, हनुमान मंदिर आंख अस्पताल रोड, नैपालापुर हनुमान मंदिर, हनुमान गढ़ी नैमिषारण्य के साथ ही जिले के अन्य मंदिरों में ज्येष्ठ का पहला मंगल उत्साह के साथ मनाया गया। यहां भक्तों की भीड़ उमड़ी। इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ भक्तों ने पहल की और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लाइन लगवाई और हाथ भी सैनिटाइज कराए।
...और खिल उठे मालियों के चेहरे
लॉकडाउन में मंदिरों के कपाट बंद थे। उधर, मांगलिक आयोजन भी सीमित थे। ऐसे में फूलों की बिक्री नहीं हो रही थी। मंगलवार को दिन उनके लिए दोहरी खुशियां लेकर आया। एक तो अनलॉक खुला दूसरे ज्येष्ठ का पहला मंगल था। भक्तों ने प्रभु को अर्पित करने के लिए खूब फूल-माला खरीदी। अच्छी बिक्री से मालियों के चेहरे खिल उठे। प्रसाद विक्रेता भी खुश दिखे। जेल रोड स्थित बड़ा हनुमान मंदिर पर प्रसाद बेच रहे कल्लू ने कहा कि करीब दो महीने के बाद तराजू पकड़ने का मौका मिला है। बहुत अच्छा लग रहा है।
दोपहर में नहीं बंद हुए कपाट
यूं तो सयन के लिए दोपहर में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन ज्येष्ठ के पहले मंगल को इस परंपरा का निर्वहन नहीं किया गया। भक्तों के दर्शन के लिए दोपहर में मंदिरों के कपाट खुले रहे। सुबह बारिश होने के चलते जो भक्त मंदिर नहीं जा सके थे, उन्होंने दोपहर में मत्था टेका।
बारिश के चलते सड़कों पर हुआ जलभराव आवागमन में बाधक रहा। शहर के जंगलीनाथ मंदिर पर रवी मिश्रा ने भंडारे का आयोजन किया। शहर कई अन्य मंदिरों पर भक्तों ने भंडारे आयोजित कराके श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया।
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पुजारियों ने कोविड प्रोटोकॉल के पालन को लेकर विशेष ख्याल रखा। गर्भ गृह में एक समय में चार से पांच लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई। कई मंदिरों पर भक्तों के हाथ सैनिटाइज कराए गए। ज्येष्ठ के पहले मंगल को लेकर भोर से ही भक्तों में उत्साह का संचार हो गया। स्नान-ध्यान करके भक्त पुष्प और फूल लेकर मंदिरों के लिए चल दिए। भक्तों ने मंदिरों की सफाई करके भगवान महावीर का भव्य श्रंगार किया।
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फूल-माला से मंदिरों को भी सजाया गया। सजे-धजे मंदिरों की अनुपम छटा देखते ही बनी। भक्तों ने धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करके प्रभु का पूजन किया और दुनिया से महामारी मिटाने का वर मांगा। भगवान के दर्शनार्थ भक्त देर शाम तक मंदिरों में हाजिरी लगाई। इस दौरान लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते दिखे।
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शहर के छोटा हनुमान मंदिर, बड़ा हनुमान मंदिर, हनुमान मंदिर आंख अस्पताल रोड, नैपालापुर हनुमान मंदिर, हनुमान गढ़ी नैमिषारण्य के साथ ही जिले के अन्य मंदिरों में ज्येष्ठ का पहला मंगल उत्साह के साथ मनाया गया। यहां भक्तों की भीड़ उमड़ी। इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ भक्तों ने पहल की और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लाइन लगवाई और हाथ भी सैनिटाइज कराए।
...और खिल उठे मालियों के चेहरे
लॉकडाउन में मंदिरों के कपाट बंद थे। उधर, मांगलिक आयोजन भी सीमित थे। ऐसे में फूलों की बिक्री नहीं हो रही थी। मंगलवार को दिन उनके लिए दोहरी खुशियां लेकर आया। एक तो अनलॉक खुला दूसरे ज्येष्ठ का पहला मंगल था। भक्तों ने प्रभु को अर्पित करने के लिए खूब फूल-माला खरीदी। अच्छी बिक्री से मालियों के चेहरे खिल उठे। प्रसाद विक्रेता भी खुश दिखे। जेल रोड स्थित बड़ा हनुमान मंदिर पर प्रसाद बेच रहे कल्लू ने कहा कि करीब दो महीने के बाद तराजू पकड़ने का मौका मिला है। बहुत अच्छा लग रहा है।
दोपहर में नहीं बंद हुए कपाट
यूं तो सयन के लिए दोपहर में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन ज्येष्ठ के पहले मंगल को इस परंपरा का निर्वहन नहीं किया गया। भक्तों के दर्शन के लिए दोपहर में मंदिरों के कपाट खुले रहे। सुबह बारिश होने के चलते जो भक्त मंदिर नहीं जा सके थे, उन्होंने दोपहर में मत्था टेका।
बारिश के चलते सड़कों पर हुआ जलभराव आवागमन में बाधक रहा। शहर के जंगलीनाथ मंदिर पर रवी मिश्रा ने भंडारे का आयोजन किया। शहर कई अन्य मंदिरों पर भक्तों ने भंडारे आयोजित कराके श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया।