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Sitapur News: सरयू में कटान से नदी में समा रहे आशियाने
Mon, 10 Jul 2023 06:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 10 Jul 2023 06:36 PM IST
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नदी के निशाने पर शंकरपुरवा, एक और मकान कटा
सरयू का पानी घटने के बाद भी नहीं थम रही कटान
फोटो-21 से 23
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर मथुरा/सीतापुर। बाढ़ से पहले तराई इलाके में कटान तबाही मचाने लगी है। बेकाबू लहरें एक के बाद एक आशियाने निगलती जा रही हैं। सोमवार को सरयू का जलस्तर 10 सेमी. और घट गया, लेकिन कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। शंकरपुरवा में एक और मकान नदी में समा गया।
पिछले दो दिनों में दो आशियाने कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। प्रशासनिक अफसर सिर्फ निरीक्षण और पीड़ितों को आश्वासन देने तक सीमित हैं। उधर, बैराजों से फिर दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। सोमवार को सरयू नदी का जलस्तर 117.90 मीटर दर्ज किया गया। रविवार की अपेक्षा सोमवार को 10 सेंटीमीटर की और कमी आई है। इसके बाद भी ग्रामीणों को राहत नहीं मिल रही है। दरअसल, सरयू की लहरें लगातार कटान कर रही हैं। कटान रोकने के लिए लगाई गई बांस की बाड़ कारगर साबित नहीं हो रही है। सरयू की तलहटी में बसा शंकरपुरवा गांव लहरों के निशाने पर है। रविवार को यहां के हरी का मकान नदी में समा गया था। इसके बाद अब रामचंद्र का मकान भी कटान की भेंट चढ़ गया। इससे ग्रामीणों में दहशत है। बाबाकुटी निवासी फेरे ने बताया कि रात से नदी का पानी कम हो रहा है, पानी नदी के अंदर ही बह रहा है। इसके बाद भी कटान जारी है। शंकरपुरवा निवासी ललसा ने बताया कि नदी लगातार कटान कर रही है। आने वाले दिनों में कटान तेज होने की संभावना है।
शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट महमूदाबाद की नायब तहसीलदार प्रीति सिंह ने सोमवार को कटान प्रभावित शंकरपुरवा का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि शंकरपुरवा में हरि तथा रामचंद्र के मकान नदी में समाहित हो गए हैं। रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेज दी जाएगी। वहीं, सोमवार को तीनों बैराजों से 2 लाख 1 हजार 550 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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बाक्स
किस बैराज से छोड़ा गया कितना पानी
घाघरा बैराज- 91466 क्यूसेक
शारदा बैराज- 68147 क्यूसेक बनबसा बैराज- 41937 क्यूसेक
बाक्स
नावें तैयार करने में जुटे कारीगर
बिसवां तहसील क्षेत्र के ब्लॉक रेउसा अंतर्गत संभावित बाढ़ के मद्देनजर कारीगर नाव बनाने में जुट गए हैं। खुरवालिया निवासी संजय अपनी दुकान में नाव बना रहे थे। संजय ने बताया कि बाढ़ आने पर नाव ही आवागमन का जरिया बनती हैं। हर साल 10 से 12 नावें बिक जाती हैं। इसलिए नाव तैयार कर रहे हैं। वहीं, सरयू का पानी तटवर्ती पासिनपुरवा, गार्गी पुरवा, नगीना पुरवा, मरेली, दर्जिन रेती आदि गांवों से महज 100 मीटर दूर बह रहा है। तेज हवा के झोंकों से उठती लहरों को देख ग्रामीण भयभीत हैं। स्टड भी पानी में डूबने लगे हैं। बिसवां तहसीलदार अविचल प्रताप सिंह ने बताया अभी बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। फिर भी तटीय क्षेत्र में नजर रखी जा रही है।
बाक्स
रेनकट बढ़ा सकते मुश्किलें
सीतापुर-बहराइच हाईवे से मारूबेहड़ संपर्क मार्ग, प्रेम नगर चौराहे पासिन पुरवा संपर्क मार्ग के किनारे खतरनाक रेनकट हो गए हैं। अभी तक इन रेनकट को भरा नहीं गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रेनकट भरे नहीं गए तो बाढ़ आने पर सड़क कट सकती है। ऐसे में कई गांवों का अवागमन ठप हो सकता है।
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सरयू का पानी घटने के बाद भी नहीं थम रही कटान
फोटो-21 से 23
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर मथुरा/सीतापुर। बाढ़ से पहले तराई इलाके में कटान तबाही मचाने लगी है। बेकाबू लहरें एक के बाद एक आशियाने निगलती जा रही हैं। सोमवार को सरयू का जलस्तर 10 सेमी. और घट गया, लेकिन कटान थमने का नाम नहीं ले रही है। शंकरपुरवा में एक और मकान नदी में समा गया।
पिछले दो दिनों में दो आशियाने कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। प्रशासनिक अफसर सिर्फ निरीक्षण और पीड़ितों को आश्वासन देने तक सीमित हैं। उधर, बैराजों से फिर दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। सोमवार को सरयू नदी का जलस्तर 117.90 मीटर दर्ज किया गया। रविवार की अपेक्षा सोमवार को 10 सेंटीमीटर की और कमी आई है। इसके बाद भी ग्रामीणों को राहत नहीं मिल रही है। दरअसल, सरयू की लहरें लगातार कटान कर रही हैं। कटान रोकने के लिए लगाई गई बांस की बाड़ कारगर साबित नहीं हो रही है। सरयू की तलहटी में बसा शंकरपुरवा गांव लहरों के निशाने पर है। रविवार को यहां के हरी का मकान नदी में समा गया था। इसके बाद अब रामचंद्र का मकान भी कटान की भेंट चढ़ गया। इससे ग्रामीणों में दहशत है। बाबाकुटी निवासी फेरे ने बताया कि रात से नदी का पानी कम हो रहा है, पानी नदी के अंदर ही बह रहा है। इसके बाद भी कटान जारी है। शंकरपुरवा निवासी ललसा ने बताया कि नदी लगातार कटान कर रही है। आने वाले दिनों में कटान तेज होने की संभावना है।
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शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट महमूदाबाद की नायब तहसीलदार प्रीति सिंह ने सोमवार को कटान प्रभावित शंकरपुरवा का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि शंकरपुरवा में हरि तथा रामचंद्र के मकान नदी में समाहित हो गए हैं। रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेज दी जाएगी। वहीं, सोमवार को तीनों बैराजों से 2 लाख 1 हजार 550 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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किस बैराज से छोड़ा गया कितना पानी
घाघरा बैराज- 91466 क्यूसेक
शारदा बैराज- 68147 क्यूसेक बनबसा बैराज- 41937 क्यूसेक
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नावें तैयार करने में जुटे कारीगर
बिसवां तहसील क्षेत्र के ब्लॉक रेउसा अंतर्गत संभावित बाढ़ के मद्देनजर कारीगर नाव बनाने में जुट गए हैं। खुरवालिया निवासी संजय अपनी दुकान में नाव बना रहे थे। संजय ने बताया कि बाढ़ आने पर नाव ही आवागमन का जरिया बनती हैं। हर साल 10 से 12 नावें बिक जाती हैं। इसलिए नाव तैयार कर रहे हैं। वहीं, सरयू का पानी तटवर्ती पासिनपुरवा, गार्गी पुरवा, नगीना पुरवा, मरेली, दर्जिन रेती आदि गांवों से महज 100 मीटर दूर बह रहा है। तेज हवा के झोंकों से उठती लहरों को देख ग्रामीण भयभीत हैं। स्टड भी पानी में डूबने लगे हैं। बिसवां तहसीलदार अविचल प्रताप सिंह ने बताया अभी बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। फिर भी तटीय क्षेत्र में नजर रखी जा रही है।
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रेनकट बढ़ा सकते मुश्किलें
सीतापुर-बहराइच हाईवे से मारूबेहड़ संपर्क मार्ग, प्रेम नगर चौराहे पासिन पुरवा संपर्क मार्ग के किनारे खतरनाक रेनकट हो गए हैं। अभी तक इन रेनकट को भरा नहीं गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रेनकट भरे नहीं गए तो बाढ़ आने पर सड़क कट सकती है। ऐसे में कई गांवों का अवागमन ठप हो सकता है।