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रिजल्ट से आहत छात्रा ने नहर में लगाई छलांग

Sun, 19 Jun 2022 11:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jun 2022 11:45 PM IST
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Hurt by the result, the student jumped in the canal
महमूदाबाद इलाके में छात्रा के नहर में कूदने के बाद जांच पड़ताल करती पुलिस। - संवाद - फोटो : SITAPUR
महमूदाबाद (सीतापुर)। कोतवाली इलाके की रहने वाली एक छात्रा ने परीक्षा में कम अंक आने पर नहर में छलांग लगा दी। छात्रा टॉप करना चाहती थी लेकिन कम अंक आने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी। रविवार सुबह उसका बैग और चप्पल नहर के पास मिले। छात्रा के बैग से एक सुइसाइड नोट भी मिला है। छात्रा का अभी तक पता नहीं चला है। पुलिस गोताखोरों की मदद से छात्रा की तलाश करने में जुटी हुई है।
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कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मीरानगर निवासी गरिमा वर्मा (17) ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी। शनिवार को इंटरमीडिएट का रिजल्ट आया था। जिसमें उसने 81 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। गरिमा के पिता गिरीश कुमार वर्मा ने बताया कि गरिमा टॉप करना चाहती थी लेकिन जब उसने रिजल्ट देखा तो वह काफी परेशान थी। रविवार सुबह करीब 8.30 बजे कोचिंग गई हुए थी। करीब 10.30 बजे सूचना मिली कि नहर के किनारे गरिमा की साइकिल व बैग मिला है। आननफानन में उनका पूरा परिवार घटनास्थल पर पहुंच गया।
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इंस्पेक्टर विजयेंद्र सिंह ने गोताखोरों की मदद से छात्रा की तलाश शुरू कर दी। इंस्पेक्टर ने बताया कि छात्रा की साइकिल बैग और चप्पल मिले हैं। उसके पास से एक सुइसाइड नोट भी मिला है। जिसमें कम अंक आने की बात का भी जिक्र है।
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एक ही स्कूल में पढ़ते थे भाई-बहन
छात्रा के पिता ने बताया कि उनकी तीन संतान हैं, जिनमें दो बेटियां और एक बेटा है। उनकी बड़ी बेटी प्रतिष्ठा वर्मा पुलिस विभाग में आरक्षी पद पर कर्नलगंज में तैनात है। गरिमा उससे छोटी थी। वह सीता इंटर कॉलेज में इंटरमीडिएट की पढ़ाई कला वर्ग से कर रही थी। इसी विद्यालय में उसका भाई सौरभ भी पढ़ता है। इस बार सौरभ ने हाईस्कूल की परीक्षा दी थी और अच्छे नंबरों से पास हुआ।
सॉरी मम्मी-पापा, मैं इस रिजल्ट के साथ नहीं जी पाऊंगी
छात्रा के पास से जो सुइसाइड नोट मिला है, उसमें भी उसने परिणाम से आहत होने की बात कही है। नोट में लिखा है कि विद्यार्थी जीवन से तंग होकर खुदकुशी कर रही हूं। सॉरी मम्मी, सॉरी पापा, मुझे पता है ये गलत है, पर मै क्या करूं.. मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है। मैं इस रिजल्ट के साथ नहीं जी पाऊंगी। इसके बारे में सोच-सोच कर हर रोज मरेंगे हर पल मरेंगे। हम नहीं जी सकते हैं।
बच्चों को समझाएं अभिभावक
जिला अस्पताल के मनोरोग चिकित्सक डॉ. प्रियांशू अग्रवाल ने बताया कि अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों को समझाएं कि अंक कम आने से उसकी कुशलता में कमी नहीं आती है। अगर बच्चों का स्वभाव में कुछ भी बदलाव दिखे, जैसे उनका बच्चा अचानक गुमसुम हो तो वह तुरंत ही उससे बात करें।

उनको एक दोस्त की तरह समझाएं। छात्र भी परिणाम देखने के बाद ऐसे कदम बिल्कुल न उठाएं। अगर आपके रिजल्ट में नंबर आपकी अपेक्षा से कम आते है तो आप अपनी कुशलता को कम न आके। भविष्य में कई ऐसे मौके मिलते है जब वह अपनी कुशलता को दिखा सकते हैं। ऐसा कदम उठाने से उनके पूरे परिवार को जिंदगी भर का दंश झेलना पड़ सकता है।
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