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होली पर बिखरेगी परंपराओं के रंगों की छटा

Mon, 21 Mar 2016 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 21 Mar 2016 11:23 PM IST
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Holi festival will make with various colours
होली - फोटो : अमर उजाला

शहर से लेकर गांव तक होली का सुरूर छा गया है। होलिका दहन के बाद रंग खेलने व मिलन की तैयारी अंतिम दौर में है। सभी अपने अंदाज में त्यौहार मनाने की कवायद में जुटे हैं। रंग-गुलाल के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने वाले इस पर्व में परंपराओं की रस्में भी निभाई जाती हैं।

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ग्रामीण अंचलों में होलिहारों की टोली ढोल-मंजीरे की धुन पर फाग गायन करती है। आधुनिक दौर में युवा डीजे की धुन पर थिरकते हैं। होलिका दहन का आयोजन शहर के लालबाग, नई बस्ती, होली नगर, तरीनपुर, प्रेम नगर, विजय लक्ष्मी नगर इत्यादि प्रमुख स्थानों पर किया जाता है।
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यहां मोहल्लों के युवा चंदे से होलिका दहन का इंतजाम करते हैं। होलिका दहन वाले स्थान पर आकर्षक सजावट की जाती है। शुभ मुहूर्त पर महिलाएं एकत्र होकर विधि-विधान से पूजन करती हैं जिसके बाद होलिका दहन की रस्म निभाई जाती है।
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शहर के होली नगर में होलिका दहन का भव्य आयोजन किया जाता है। चौराहे पर होलिका लगाई जाती है। मोहल्ले के युवा यहां पर सारा इंतजाम करते हैं। साफ-सफाई कर इस स्थान को आकर्षक तरीके से सजाया जाता है। शुभ मुहूर्त पर मोहल्ले भर के लोग जमा होते हैं। महिलाएं होली के गीत गाती हैं। विधिवत पूजन के बाद होलिका दहन किया जाता है।

होली खेले रघुवीरा, अवध मा होली खेले रघुवीरा... और ‘उड़ जाओ रे सुआ जहं बेरी घनी... सरीखे गीत सांझ ढलते ही कमलापुर कस्बे में गूंज उठते हैं। होरिहार यहां ढोल-मंजीरे की धुन पर फाग गायन करते हैं। होलिका दहन के लिए लकड़ी व कंडे भी एकत्र करना होरिहारों की जिम्मेदारी है।

गंगा-जमुनी तहजीब को खुद में समेट रखने वाले सीतापुर में होली का रंग मुस्लिम समाज पर भी चढ़ता है। ग्रामीण अंचलों तक में तमाम मुस्लिम वर्ग के लोग होली का त्यौहार मनाते हैं। इमरान व आफाक के अनुसार रंग-गुलाल खेलने से लेकर मिलन तक में वे सभी पूरे उत्साह से शरीक होते हैं।

पंडित धनंजय मिश्र बताते हैं, कि 22/23 मार्च की रात्रि 3:18 बजे तक भद्रा पक्ष है। इसके बाद भद्रा समाप्त हो जाएगा। इसलिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 3:18 बजे के बाद है। होलिका दहन का मुहूर्त सूर्यादय होने के पहले तक रहेगा। 23 मार्च को दिन के 4:07 बजे तक पूर्णिमा है। इसके बाद परेवा लग जाएगा।


काशी की परंपरा के अनुसार रंग भरी होली 23 मार्च को होगी। परंपरा के अनुसार मिलन परेवा के दिन होता है। 23 मार्च को शाम 4:07 बजे के बाद परेवा लग जाने से मिलन भी हो जाएगा। होलिका दहन के लिए नरसिंह व प्रहलाद का ध्यान करते हुए नए अन्न की बालियां, कंडे से पूजन करने के बाद अग्नि भगवान को गुझिया का भोग लगाया जाएगा।

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