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डेंगू के गंभीर मरीजों का जिले में इलाज नहीं
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सीतापुर। जिले में डेंगू का प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमा इसके लिए बिल्कुल गंभीर नहीं हैं। डेंगू का जिले में केवल प्राथमिक स्तर का ही इलाज संभव है। अगर मरीज की हालत गंभीर होती है तो उसे प्लेटलेट्स चढ़ाने की ब्लॅड बैंक में कोई सुविधा नहीं है। जिला अस्पताल के अलावा जिले के किसी भी सीएचसी/पीएचसी पर जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों की जान पर आफत आ जाती है।
अक्तूबर व नवंबर माह में डेंगू के मामले बढ़ते जा रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है इस बदलते मौसम में डेंगू बढने की अधिक संभावना रहती है। जिला अस्पताल के लैब टेक्नीशियन राजाराम का कहना है अगस्त, सितंबर व अक्तूबर माह में 44 मामले डेंगू के आ चुके हैं। अब रोजाना दो से तीन मामले आ रहे हैं। ऐसे में अब डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है। लेकिन जिले में डेंगू की जांच के लिए केवल जिला अस्पताल में ही सुविधा है। इसके अलावा जिले के किसी भी सीएचसी/पीएचसी पर जांच की कोई सुविधा नहीं हैं। हालांकि जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए मेडिकल ए वार्ड में अलग से एक वार्ड बना दिया गया हैं। इसमें केवल तीन बेड हैं। लेकिन इस समय वह भी खाली है।
जिले में डेंगू का केवल प्राथमिक स्तर पर ही इलाज संभव है। अगर मरीज की हालत गंभीर होती है तो डेंगू मरीजों के लिए प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता होती हैं। लेकिन ब्लॅड बैंक में प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं है। ऐसे में मरीज को रेफर करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता हैं। इसी वजह से कई बार डेंगू मरीजों की जान चली जाती हैं।
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डेंगू की जांच के लिए एलाइजा टेस्ट किया जाता हैं। लेकिन जिला अस्पताल में ही इसकी सुविधा हैं। ऐसे में अगर कोई मरीज रेउसा का है तो वह 80 किलोमीटर दूर चलकर सीतापुर आए तभी वह इसकी जांच करवा सकता है। अधिक दूरी होने के कारण लोग बाहर की पैथालॉजी से जांच करवाते हैं। यह जांच करीब एक हजार रुपये में होती हैं। मरीज मोहित व रोहित ने बताया अगर सीएचसी/पीएचसी पर जांच की सुविधा हो जाए तो बहुत सहूलियत मिलेंगी। अधिक खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।
सीएमएस डॉ. एके अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू की जांच व इलाज की पूरी व्यवस्था है। मरीजों के लिए वार्ड भी आरक्षित कर दिया गया हैं। प्लेटलेट्स चढ़ाने की सुविधा इस समय अस्पताल में नहीं हैं। इसकी जानकारी शासन को कई बार दी जा चुकी हैं।
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अक्तूबर व नवंबर माह में डेंगू के मामले बढ़ते जा रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है इस बदलते मौसम में डेंगू बढने की अधिक संभावना रहती है। जिला अस्पताल के लैब टेक्नीशियन राजाराम का कहना है अगस्त, सितंबर व अक्तूबर माह में 44 मामले डेंगू के आ चुके हैं। अब रोजाना दो से तीन मामले आ रहे हैं। ऐसे में अब डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है। लेकिन जिले में डेंगू की जांच के लिए केवल जिला अस्पताल में ही सुविधा है। इसके अलावा जिले के किसी भी सीएचसी/पीएचसी पर जांच की कोई सुविधा नहीं हैं। हालांकि जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए मेडिकल ए वार्ड में अलग से एक वार्ड बना दिया गया हैं। इसमें केवल तीन बेड हैं। लेकिन इस समय वह भी खाली है।
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जिले में डेंगू का केवल प्राथमिक स्तर पर ही इलाज संभव है। अगर मरीज की हालत गंभीर होती है तो डेंगू मरीजों के लिए प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता होती हैं। लेकिन ब्लॅड बैंक में प्लेटलेट्स की सुविधा नहीं है। ऐसे में मरीज को रेफर करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता हैं। इसी वजह से कई बार डेंगू मरीजों की जान चली जाती हैं।
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डेंगू की जांच के लिए एलाइजा टेस्ट किया जाता हैं। लेकिन जिला अस्पताल में ही इसकी सुविधा हैं। ऐसे में अगर कोई मरीज रेउसा का है तो वह 80 किलोमीटर दूर चलकर सीतापुर आए तभी वह इसकी जांच करवा सकता है। अधिक दूरी होने के कारण लोग बाहर की पैथालॉजी से जांच करवाते हैं। यह जांच करीब एक हजार रुपये में होती हैं। मरीज मोहित व रोहित ने बताया अगर सीएचसी/पीएचसी पर जांच की सुविधा हो जाए तो बहुत सहूलियत मिलेंगी। अधिक खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।
सीएमएस डॉ. एके अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू की जांच व इलाज की पूरी व्यवस्था है। मरीजों के लिए वार्ड भी आरक्षित कर दिया गया हैं। प्लेटलेट्स चढ़ाने की सुविधा इस समय अस्पताल में नहीं हैं। इसकी जानकारी शासन को कई बार दी जा चुकी हैं।