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सरकारी भवनों में नहीं हो रहा जल संचय
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
Updated Sun, 05 Jul 2015 12:09 AM IST
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वर्षा जल संचय को लेकर शासन भले ही गंभीर है, लेकिन जिले में जल संचयन के लिए कागजी घोड़े ही दौड़ाए जा रहे हैं। तालाबों में पानी भराने के लिए पत्रावलियां इधर से उधर दौड़ाई जा रही हैं। हकीकत में तालाबों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। नए बने सरकारी भवनों में जल संचय नहीं किया जा रहा है।
शासन की ओर से मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के जरिए जल संचयन के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत 30 जून तक तालाबों के चिन्हीकरण, खुदाई व उनमें पानी भरवाने का काम करना था। इसके अलावा झीलों, पोखरों, प्राकृतिक जल स्रोतों के जीर्णोद्घार व सौन्दर्यीकरण के साथ इनमें वर्षा का जल संचयन करना है।
इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में जल बचाओ समिति गठित की गई है। समिति में सीडीओ के साथ ही डीडीओ को नोडल अफसर बनाया गया है। मनरेगा, जल निगम, लघु सिंचाई, पर्यावरण आदि विभागों को इसमें शामिल किया गया है। लेकिन शासन की यह महत्वाकांक्षी योजना यहां दम तोड़ती नजर आ रही है।
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कागजी रस्म अदायगी के अलावा बारिश का जल संचयन करने को अफसर कोई कवायद करते नहीं दिख रहे हैं। प्रशासन की ओर से जल संचयन को लेकर कोई जागरूकता कार्यक्रम भी नहीं चलाया गया।
7702 में से भरवाए गए महज 1398 तालाब
मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के तहत जिले के सभी ब्लॉकों में 1282 तालाब खुदाई के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें 1167 का आगणन बनाकर 391 तालाबों की खुदाई शुरू की गई है। वहीं 1329 ग्राम पंचायतों के 7702 तालाबों में से महज 1398 ही भरवाए गए हैं।
जल ग्राम में मजरा सिकन्दरपुर चयनित
शासन ने प्रत्येक जिले में एक जल ग्राम चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत पानी के संकट से जूझ रहे एक गांव का चयन कर वहां पानी की उपलब्धता का पर्याप्त इंतजाम करना है। प्रशासन ने मछरेहटा ब्लाक की ग्राम पंचायत कन्धरिया के मजरा सिकन्दरपुर का चयन जल ग्राम के रूप में किया है।
जल स्रोतों को बनाया जा रहा उपयोगी
जल संचय को लेकर प्रशासन गंभीर है। शासन के निर्देश के क्रम में तालाबों की खुदाई का कार्य तेजी से हो रहा है। वहीं अन्य जल स्रोतों को भी जल संचय के लिए संरक्षित कर उन्हें उपयोगी बनाया जा रहा है।
-डीके दोहरे, नोडल अफसर जल बचाओ समिति
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शासन की ओर से मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के जरिए जल संचयन के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत 30 जून तक तालाबों के चिन्हीकरण, खुदाई व उनमें पानी भरवाने का काम करना था। इसके अलावा झीलों, पोखरों, प्राकृतिक जल स्रोतों के जीर्णोद्घार व सौन्दर्यीकरण के साथ इनमें वर्षा का जल संचयन करना है।
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इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में जल बचाओ समिति गठित की गई है। समिति में सीडीओ के साथ ही डीडीओ को नोडल अफसर बनाया गया है। मनरेगा, जल निगम, लघु सिंचाई, पर्यावरण आदि विभागों को इसमें शामिल किया गया है। लेकिन शासन की यह महत्वाकांक्षी योजना यहां दम तोड़ती नजर आ रही है।
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कागजी रस्म अदायगी के अलावा बारिश का जल संचयन करने को अफसर कोई कवायद करते नहीं दिख रहे हैं। प्रशासन की ओर से जल संचयन को लेकर कोई जागरूकता कार्यक्रम भी नहीं चलाया गया।
7702 में से भरवाए गए महज 1398 तालाब
मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के तहत जिले के सभी ब्लॉकों में 1282 तालाब खुदाई के लिए चिन्हित किए गए हैं। इनमें 1167 का आगणन बनाकर 391 तालाबों की खुदाई शुरू की गई है। वहीं 1329 ग्राम पंचायतों के 7702 तालाबों में से महज 1398 ही भरवाए गए हैं।
जल ग्राम में मजरा सिकन्दरपुर चयनित
शासन ने प्रत्येक जिले में एक जल ग्राम चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत पानी के संकट से जूझ रहे एक गांव का चयन कर वहां पानी की उपलब्धता का पर्याप्त इंतजाम करना है। प्रशासन ने मछरेहटा ब्लाक की ग्राम पंचायत कन्धरिया के मजरा सिकन्दरपुर का चयन जल ग्राम के रूप में किया है।
जल स्रोतों को बनाया जा रहा उपयोगी
जल संचय को लेकर प्रशासन गंभीर है। शासन के निर्देश के क्रम में तालाबों की खुदाई का कार्य तेजी से हो रहा है। वहीं अन्य जल स्रोतों को भी जल संचय के लिए संरक्षित कर उन्हें उपयोगी बनाया जा रहा है।
-डीके दोहरे, नोडल अफसर जल बचाओ समिति