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किसी के पास दो तो किसी को 10 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी
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रामपुर मथुरा/सीतापुर। विकासखंड में 79 ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए ग्राम पंचायत अधिकारियों की तैनाती में खेल कर दिया गया है। किसी को 10 ग्राम पंचायतें दी गईं तो किसी को दो ग्राम पंचायतें ही मिली है। इससे लोगों को ग्राम पंचायत अधिकारी ढूंढे ही नहीं मिलेंगे। शिकायतों के निस्तारण के लिए लोग भटकने को मजबूर होंगे। इसे लेकर लोगों में आक्रोश है।
पूरे विकास क्षेत्र की 79 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी 15 ग्राम पंचायत अधिकारियों पर है। इस लिहाज से प्रत्येक ग्राम सचिव पर कम से कम पांच से छह ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी देने की खंड विकास अधिकारी की मजबूरी है। वर्तमान में ग्राम सचिवों के कार्य क्षेत्रों में किये गए बदलावों पर नजर डाले तो सेक्रेटरी अभय मौर्य के पास 10, रक्षित कुमार के पास आठ, दिलीप सिंह, आशीष कुमार व संतोष कुमार के पास सात-सात, मेहुल कुमार व मनोज कुमार के पास छह-छह, संजीव गुप्ता व शशिकांत तिवारी के पास पांच-पांच, भीखूराम, नरेंद्र कुमार व शीलम के पास चार-चार, आलोक कुमार के पास तीन व रोहिणी शुक्ला के पास महज दो ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी दी गई है।
इतनी बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों का बिना किसी नियम के आवंटन करने से ग्राम पंचायत अधिकारियों में ही आक्रोश है। जब एक-एक सचिव के पास 10-10 ग्राम पंचायतें होंगी तो लोगों को अपने काम करवाने में दिक्कतें आएंगी। यही स्थिति खंड विकास अधिकारी व ब्लॉक के मनरेगा कार्यों के लिए नियुक्त एपीओ की है।
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इस ब्लॉक में दोनों महत्वपूर्ण पद पर स्थायी रूप से कोई भी अधिकारी तैनात न होने से करीब एक वर्ष से विकास कार्य प्रभावित चल रहे हैं। यहां अतिरिक्त प्रभारी के रूप में बिसवां के ही बीडीओ ऐश्वर्य यादव व एपीओ तैनात है। दो ब्लॉकों की जिम्मेदारी होने के कारण पूरे सप्ताह कहीं भी समय नहीं दे पाते है। इससे आये दिन फरियादी इन दोनों अफसरों को तलाशते रहते है।
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पूरे विकास क्षेत्र की 79 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी 15 ग्राम पंचायत अधिकारियों पर है। इस लिहाज से प्रत्येक ग्राम सचिव पर कम से कम पांच से छह ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी देने की खंड विकास अधिकारी की मजबूरी है। वर्तमान में ग्राम सचिवों के कार्य क्षेत्रों में किये गए बदलावों पर नजर डाले तो सेक्रेटरी अभय मौर्य के पास 10, रक्षित कुमार के पास आठ, दिलीप सिंह, आशीष कुमार व संतोष कुमार के पास सात-सात, मेहुल कुमार व मनोज कुमार के पास छह-छह, संजीव गुप्ता व शशिकांत तिवारी के पास पांच-पांच, भीखूराम, नरेंद्र कुमार व शीलम के पास चार-चार, आलोक कुमार के पास तीन व रोहिणी शुक्ला के पास महज दो ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी दी गई है।
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इतनी बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों का बिना किसी नियम के आवंटन करने से ग्राम पंचायत अधिकारियों में ही आक्रोश है। जब एक-एक सचिव के पास 10-10 ग्राम पंचायतें होंगी तो लोगों को अपने काम करवाने में दिक्कतें आएंगी। यही स्थिति खंड विकास अधिकारी व ब्लॉक के मनरेगा कार्यों के लिए नियुक्त एपीओ की है।
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इस ब्लॉक में दोनों महत्वपूर्ण पद पर स्थायी रूप से कोई भी अधिकारी तैनात न होने से करीब एक वर्ष से विकास कार्य प्रभावित चल रहे हैं। यहां अतिरिक्त प्रभारी के रूप में बिसवां के ही बीडीओ ऐश्वर्य यादव व एपीओ तैनात है। दो ब्लॉकों की जिम्मेदारी होने के कारण पूरे सप्ताह कहीं भी समय नहीं दे पाते है। इससे आये दिन फरियादी इन दोनों अफसरों को तलाशते रहते है।