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Sitapur News: धान की अच्छी पैदावार के लिए अपनाएं वैज्ञानिकों की सलाह
Sat, 18 Jul 2026 11:54 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 18 Jul 2026 11:54 PM IST
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सीतापुर। धान की फसल से बेहतर उत्पादन लेने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के वैज्ञानिकों ने किसानों को महत्वपूर्ण टिप्स दिए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर किसान समय पर और सही तरीके से खेती करें तो पैदावार में 20 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है।
केवीके कटिया के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने बताया कि धान की रोपाई के बाद शुरुआती 15 दिन फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। रोपाई के सात से 10 दिन बाद पहली बार नाइट्रोजन युक्त खाद डालें। इसके लिए प्रति एकड़ 20 से 25 किलो यूरिया का छिड़काव फायदेमंद रहेगा। इससे पौधों की जड़ें मजबूत होंगी और कल्ले अधिक निकलेंगे। वैज्ञानिकों ने खरपतवार नियंत्रण पर भी जोर दिया। रोपाई के 15 से 20 दिन के अंदर खेत में निराई-गुड़ाई या खरपतवारनाशी का प्रयोग करें। इससे खाद और पानी का पूरा लाभ फसल को मिलेगा। पानी की व्यवस्था के संबंध में सलाह दी गई कि रोपाई के बाद दो से तीन सेंटीमीटर तक खेत में पानी रखें और हर चार से पांच दिन में पानी बदलते रहें। कीट और रोगों से बचाव के लिए खेत का नियमित निरीक्षण करें। पत्ती लपेटने वाले कीट या भूरा माहू दिखने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही दवा का छिड़काव करें। वैज्ञानिकों ने कहा कि संतुलित उर्वरक, समय पर सिंचाई और रोग नियंत्रण के साथ-साथ प्रमाणित बीज का उपयोग भी अच्छी पैदावार की कुंजी है। किसानों से अपील की गई है कि वे वैज्ञानिक सलाह का पालन कर इस खरीफ सीजन में अधिक उत्पादन प्राप्त करें।
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केवीके कटिया के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने बताया कि धान की रोपाई के बाद शुरुआती 15 दिन फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। रोपाई के सात से 10 दिन बाद पहली बार नाइट्रोजन युक्त खाद डालें। इसके लिए प्रति एकड़ 20 से 25 किलो यूरिया का छिड़काव फायदेमंद रहेगा। इससे पौधों की जड़ें मजबूत होंगी और कल्ले अधिक निकलेंगे। वैज्ञानिकों ने खरपतवार नियंत्रण पर भी जोर दिया। रोपाई के 15 से 20 दिन के अंदर खेत में निराई-गुड़ाई या खरपतवारनाशी का प्रयोग करें। इससे खाद और पानी का पूरा लाभ फसल को मिलेगा। पानी की व्यवस्था के संबंध में सलाह दी गई कि रोपाई के बाद दो से तीन सेंटीमीटर तक खेत में पानी रखें और हर चार से पांच दिन में पानी बदलते रहें। कीट और रोगों से बचाव के लिए खेत का नियमित निरीक्षण करें। पत्ती लपेटने वाले कीट या भूरा माहू दिखने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही दवा का छिड़काव करें। वैज्ञानिकों ने कहा कि संतुलित उर्वरक, समय पर सिंचाई और रोग नियंत्रण के साथ-साथ प्रमाणित बीज का उपयोग भी अच्छी पैदावार की कुंजी है। किसानों से अपील की गई है कि वे वैज्ञानिक सलाह का पालन कर इस खरीफ सीजन में अधिक उत्पादन प्राप्त करें।
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