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जटपुरवा के दो परिवारों ने किया पलायन
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रेउसा (सीतापुर)। घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर स्थिर होने के बाद भी तटीय क्षेत्र के बाशिंदों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। गुरुवार को जटपुरवा गांव के महज 10 मीटर दूर लहरें हिलोरे मारती रहीं। गांव के दस मकान कटान के मुहाने पर आ गए हैं। बाढ़ का खतरा देख दो परिवार गृहस्थी समेटकर पलायन कर गए हैं। कई गांवों के संपर्क मार्ग जलमग्न हैं।
करीब 50 बीघा और खेती वाली जमीन कटान की भेंट चढ़ गई है। बैराजों से गुरुवार को फिर डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बाढ़ का खतरा देख तटवर्ती गांवों के लोग दहशत में हैं। पिछले तीन दिनों से होने वाली भारी बारिश और बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे बड़े पैमाने पर पानी से घाघरा व शारदा नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का क्रम जारी है।
नदियों के दायरे से निकलकर पानी का तेज बहाव आबादी का रुख कर चुका है। फौजदार पुरवा, चौकी पुरवा, लोधन पुरवा, दुर्गा पुरवा, कोनी, मरेली, परमेश्वरपुरवा आदि गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन दुश्वार हो गया है। सबसे अधिक खतरा जटपुरवा गांव पर मंडरा रहा है।
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यहां से महज 10 मीटर की दूरी पर पानी पहुंचने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। बाढ़ के साथ दस मकानों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है। घबराए मुरसुद्दीन और शरीफ के परिवार गृहस्थी समेटकर पलायन कर गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक नदियों का जलस्तर स्थिर होने के बाद भी खतरा टला नहीं है।
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करीब 50 बीघा और खेती वाली जमीन कटान की भेंट चढ़ गई है। बैराजों से गुरुवार को फिर डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बाढ़ का खतरा देख तटवर्ती गांवों के लोग दहशत में हैं। पिछले तीन दिनों से होने वाली भारी बारिश और बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे बड़े पैमाने पर पानी से घाघरा व शारदा नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का क्रम जारी है।
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नदियों के दायरे से निकलकर पानी का तेज बहाव आबादी का रुख कर चुका है। फौजदार पुरवा, चौकी पुरवा, लोधन पुरवा, दुर्गा पुरवा, कोनी, मरेली, परमेश्वरपुरवा आदि गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन दुश्वार हो गया है। सबसे अधिक खतरा जटपुरवा गांव पर मंडरा रहा है।
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यहां से महज 10 मीटर की दूरी पर पानी पहुंचने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। बाढ़ के साथ दस मकानों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है। घबराए मुरसुद्दीन और शरीफ के परिवार गृहस्थी समेटकर पलायन कर गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक नदियों का जलस्तर स्थिर होने के बाद भी खतरा टला नहीं है।