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शारदा में उफान से जटपुरवा के दो आशियानों पर कटान का खतरा
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रेउसा (सीतापुर)। गांजरी इलाके में शारदा व घाघरा का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा। उफनाई शारदा नदी ने जटपुरवा गांव को निशाने पर ले लिया है। गुरुवार को जटपुरवा से महज 30 फीट दूरी पर शारदा हिलोरे मार रही है। यहां के दो आशियानों पर कटान का खतरा मंडराने से ग्रामीण सहमे हुए हैं।
उधर, घाघरा के तेज बहाव में पांच बीघा खेती योग्य जमीन समा गई। कई किसानों के खेतों का अस्तित्व संकट में है। बैराजों से हर रोज छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से एक बार फिर नदियां उफान पर हैं। इससे तटीय क्षेत्र के बाशिंदे सहमे हुए हैं।
जिले के गांजरी इलाके से होकर बहने वाली शारदा व घाघरा नदियों का जलस्तर बुधवार को स्थिर होने से ग्रामीणों को राहत मिली थी। गुरुवार का दिन तटीय क्षेत्र के बाशिंदो के लिए मुसीबत का पैगाम लेकर आया। बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से नदियों का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है।
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उफनाई शारदा ने जटपुरवा गांव को निशाने पर ले लिया है। पानी का तेज बहाव जटपुरवा से महज 30 फीट की दूरी पर बह रहा है। इस गांव में रहने वाले मंझिले और मुबारक के आशियानों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है। शारदा का रौद्र रूप देख जटपुरवा के तकरीबन एक सैकड़ा परिवार दहशत में हैं।
उधर, परमेश्वरपुरवा निवासी साधू की तीन बीघा और फौजदार की दो बीघा खेत घाघरा में समा गए। बुधई समेत कई किसानों की जमीनें घाघरा की बेकाबू लहरों के निशाने पर हैं। नदियों में उफान से संभावित बाढ़ को लेकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदे भयभीत हैं।
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उधर, घाघरा के तेज बहाव में पांच बीघा खेती योग्य जमीन समा गई। कई किसानों के खेतों का अस्तित्व संकट में है। बैराजों से हर रोज छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से एक बार फिर नदियां उफान पर हैं। इससे तटीय क्षेत्र के बाशिंदे सहमे हुए हैं।
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जिले के गांजरी इलाके से होकर बहने वाली शारदा व घाघरा नदियों का जलस्तर बुधवार को स्थिर होने से ग्रामीणों को राहत मिली थी। गुरुवार का दिन तटीय क्षेत्र के बाशिंदो के लिए मुसीबत का पैगाम लेकर आया। बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी से नदियों का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है।
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उफनाई शारदा ने जटपुरवा गांव को निशाने पर ले लिया है। पानी का तेज बहाव जटपुरवा से महज 30 फीट की दूरी पर बह रहा है। इस गांव में रहने वाले मंझिले और मुबारक के आशियानों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है। शारदा का रौद्र रूप देख जटपुरवा के तकरीबन एक सैकड़ा परिवार दहशत में हैं।
उधर, परमेश्वरपुरवा निवासी साधू की तीन बीघा और फौजदार की दो बीघा खेत घाघरा में समा गए। बुधई समेत कई किसानों की जमीनें घाघरा की बेकाबू लहरों के निशाने पर हैं। नदियों में उफान से संभावित बाढ़ को लेकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदे भयभीत हैं।