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Sitapur News: ज्येष्ठ का पहला बड़ा मंगल आज, जगह-जगह लगेंगे भंडारे
Mon, 27 May 2024 09:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 27 May 2024 09:41 PM IST
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सीतापुर/नैमिषारण्य। ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगल को जिलेभर में भक्त बजरंगबली की स्तुति में लीन रहेंगे। हनुमान मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। आज जगह-जगह भंडारा भी लगेगा। सोमवार को हनुमान मंदिरों में साफ-सफाई के बाद सजावट की गई।
ज्येष्ठ माह को पुण्य का माह भी कहा गया है। बजरंग बली को समर्पित इस माह में उनकी विशेष पूजा होती है। इस बार ज्येष्ठ माह में चार मंगलवार पड़ेंगे। शहर के जेल रोड स्थित बड़ा हनुमान मंदिर, मालगोदाम के पास का चांदी वाला हनुमान मंदिर, घंटाघर स्थित छोटा हनुमान मंदिर, बस स्टेशन के हनुमान मंदिर में सुबह से भक्तों का तांता लगेगा। इस मौके पर कई जगह भंडारा भी होगा।
नैमिष के हनुमान गढ़ी और मेंहदीपुर सालासर, अयोध्या समेत अन्य मंदिरों को फूलों से सजाया जा रहा है। मान्यता है, कि ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला प्रत्येक मंगल बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहलाता है। इस माह के बड़े मंगल पर विधि विधान से बजरंग बली की पूजा अर्चना करने से साधक को प्रत्येक कष्ट और बाधा से मुक्ति मिलती है।
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बजरंग बाण का होगा पाठ
नैमिषारण्य में गोमती के तट पर विराजित दक्षिणेश्वर हनुमानजी महाराज के प्राचीन स्थान को हनुमान गढ़ी के नाम से जाना जाता है। ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगल को यहां प्रातः काल से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। श्रद्धालु यहां सुंदर कांड, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण का पाठ किया जाता है। श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। मान्यता है, कि दक्षिण मुखी हनुमान के दर्शन मात्र से अनिष्टकारी गृह शांत हो जाते हैं।
प्रात: काल हनुमानजी महाराज काे चढ़ाया जाएगा चोला
नैमिषारण्य की हनुमान गढ़ी में बजरंगबली की विहंगम खड़ी प्रतिमा है। महंत बजरंग दास ने बताया कि पूरे मंदिर प्रांगण को सुगंधित फूलों से सजाया जा रहा है। मंगल को प्रात: काल हनुमानजी महाराज काे चोला चढ़ाया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए भोजन, प्रसादी शरबत की व्यवस्था की जाएगी।
राम-लक्ष्मण के साथ इसी स्थान पर पाताल से बाहर आए थे हनुमान
महंत ने बताया कि यह स्थान प्रभु श्रीराम-लक्ष्मण व हनुमान की पावन चरण रज से सुशोभित है। त्रेता में जब भगवान राम ने रावण का वध किया था, तब पातालपुरी का राजा उसका भाई अहिरावण प्रतिशोध लेने के लिए प्रभु राम-लक्ष्मण का अपहरण कर पातालपुरी ले गया था। तब हनुमान ने पाताल लोक में अहिरावण का वध कर राम-लक्ष्मण को अपने दोनों कंधों पर बैठाकर इसी स्थान पर पाताल से बाहर आए थे। यहां कुछ देर तक विश्राम के बाद लंका की ओर प्रस्थान किया था।
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ज्येष्ठ माह को पुण्य का माह भी कहा गया है। बजरंग बली को समर्पित इस माह में उनकी विशेष पूजा होती है। इस बार ज्येष्ठ माह में चार मंगलवार पड़ेंगे। शहर के जेल रोड स्थित बड़ा हनुमान मंदिर, मालगोदाम के पास का चांदी वाला हनुमान मंदिर, घंटाघर स्थित छोटा हनुमान मंदिर, बस स्टेशन के हनुमान मंदिर में सुबह से भक्तों का तांता लगेगा। इस मौके पर कई जगह भंडारा भी होगा।
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नैमिष के हनुमान गढ़ी और मेंहदीपुर सालासर, अयोध्या समेत अन्य मंदिरों को फूलों से सजाया जा रहा है। मान्यता है, कि ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला प्रत्येक मंगल बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहलाता है। इस माह के बड़े मंगल पर विधि विधान से बजरंग बली की पूजा अर्चना करने से साधक को प्रत्येक कष्ट और बाधा से मुक्ति मिलती है।
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बजरंग बाण का होगा पाठ
नैमिषारण्य में गोमती के तट पर विराजित दक्षिणेश्वर हनुमानजी महाराज के प्राचीन स्थान को हनुमान गढ़ी के नाम से जाना जाता है। ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगल को यहां प्रातः काल से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। श्रद्धालु यहां सुंदर कांड, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण का पाठ किया जाता है। श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। मान्यता है, कि दक्षिण मुखी हनुमान के दर्शन मात्र से अनिष्टकारी गृह शांत हो जाते हैं।
प्रात: काल हनुमानजी महाराज काे चढ़ाया जाएगा चोला
नैमिषारण्य की हनुमान गढ़ी में बजरंगबली की विहंगम खड़ी प्रतिमा है। महंत बजरंग दास ने बताया कि पूरे मंदिर प्रांगण को सुगंधित फूलों से सजाया जा रहा है। मंगल को प्रात: काल हनुमानजी महाराज काे चोला चढ़ाया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए भोजन, प्रसादी शरबत की व्यवस्था की जाएगी।
राम-लक्ष्मण के साथ इसी स्थान पर पाताल से बाहर आए थे हनुमान
महंत ने बताया कि यह स्थान प्रभु श्रीराम-लक्ष्मण व हनुमान की पावन चरण रज से सुशोभित है। त्रेता में जब भगवान राम ने रावण का वध किया था, तब पातालपुरी का राजा उसका भाई अहिरावण प्रतिशोध लेने के लिए प्रभु राम-लक्ष्मण का अपहरण कर पातालपुरी ले गया था। तब हनुमान ने पाताल लोक में अहिरावण का वध कर राम-लक्ष्मण को अपने दोनों कंधों पर बैठाकर इसी स्थान पर पाताल से बाहर आए थे। यहां कुछ देर तक विश्राम के बाद लंका की ओर प्रस्थान किया था।