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550 मतदान केंद्रों पर बवाल की आशंका, पुलिस अलर्ट
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सीओ के साथ बैठक करते पुलिस अधीक्षक आरपी सिंह। (संवाद)
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण की सूची जारी होते ही पुलिस अलर्ट हो गई है। मतदान केंद्रों से लेकर बूथों की संख्या को अंतिम रूप दिया जा चुका है। पुलिस ने पिछले चुनाव और कुछ सालों में हुई घटनाओं के आधार पर जिले के संवेदनशील, अतिसंवेदनशील और अतिसंवेदनशील प्लस मतदान केंद्रों की सूची तैयार कर ली है। इसमें अभी कुछ बदलाव होने की भी गुंजाइश है। सूची में करीब 586 मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां बवाल की आशंका हो सकती है। ऐसे में इन मतदान केंद्रों पर पुलिस की पैनी नजर है।
पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। बुधवार को आरक्षण की अनंतिम सूची भी प्रकाशित हो चुकी है। इसी के साथ ही चुनावी हलचल तेज हो गई है। पुलिस प्रशासन ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। जिले में इस बार 1858 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, इसमें 835 केंद्र सामान्य हैं। 437 संवेदनशील, 358 अति संवेदनशील हैं। जबकि 228 अति संवेदनशील प्लस केंद्र हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि 835 सामान्य और 437 अतिसंवेदनशील केंद्रों पर लॉ एंड आर्डर की कोई बड़ी दिक्कत नहीं है।
दोनों मिलाकर करीब 1272 केंद्र है, जो फिलहाल सामान्य हैं, लेकिन 358 अति संवेदनशील और 228 अति संवेदनशील प्लस मिलाकर करीब 586 केंद्र हैं, जहां पर पुलिस प्रशासन को चुनाव में बवाल होने की आशंका है। ऐसे में डीएम विशाल भारद्वाज, एसपी आरपी सिंह ने एसडीएम, सीओ और थानेदारों को इन मतदान केंद्रों पर नजर रखने और पुराने विवादों को कम करने के लिए जिम्मेदारी सौंप दी है।
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इस आधार पर चिह्नित हुए बवाल वाले मतदान केंद्र
-पंचायत चुनाव, उपचुनाव में हिंसा हुई हो या फिर हत्या की गई हो।
-लोगों के बीच रंजिश चल रही हो या फिर और विवाद हुए हो।
-अधिकतम अपराधी गांव में रहते हों, गुंडा-माफिया हों गांव में।
-गरीब व्यक्तियों को कोई वोट डालने से मना करता हो।
-चुनाव में पैैसे और शराब का प्रलोभन दिया गया हो।
प्रत्याशी से लेकर समर्थकों तक के जमा होंगे असलहे
पंचायत चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस का सबसे अधिक फोकस असलहा जमा कराने पर रहेगा। खासकर वे लोग जो चुनाव लड़ रहे हैं या फिर उनके कट्टर समर्थक हैं। ऐसे समर्थकों को पुलिस चिह्नित करने की कार्रवाई तेज करेगी। एएसपी साउथ एनपी सिंह ने बताया कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों से लेकर उनके समर्थकों के अलावा सभी के असलहे जमा कराने की कार्रवाई को पुलिस तेज करेगी, जिससे चुनाव में कोई समस्या न खड़ी हो। पिछले पांच साल के दरम्यान हत्या, लूट, डकैती, गुंडा एक्ट, चोरी आदि के मामलों के आरोपियों पर पुलिस प्रशासन की कड़ी नजर है। अफसरों का कहना है कि इनसे चुनाव में हिंसा की आशंका बनी हुई है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।
कम हो सकती है मतदान केंद्रों की संख्या
चुनाव आयोग के आदेश पर एसडीएम की अध्यक्षता में गठित टीम ने जिले के बवाल वाले मतदान केंद्रों को चिह्नित किया है। इस कमेटी में सीओ, तहसीलदार, बीडीओ, एसओ को शामिल किया गया था। अगर किसी पुराने विवाद की वजह से इस बार भी विवाद की आशंका है तो उस मामले को निपटाया जाएगा, जिन पर बवाल करने और कराने की आशंका है, उन्हें चेतावनी दी जाएगी। नहीं मानने पर जेल और जिला बदर किया जाएगा। ऐसे में पुलिस प्रशासन को उम्मीद है कि हस्तक्षेप के बाद बवाल की आशंका वाले मतदान केंद्रों की संख्या कम हो सकती है।
जिले में मतदान केंद्र और बूथों को बनाने की कार्रवाई हो चुकी है। पांच साल पुराने विवादों और चुनाव में हुई घटनाओं को ध्यान में रखते हुए अति संवेदनशील और अति संवेदनशील प्लस मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इन पर पुलिस प्रशासन की कड़ी नजर है। अभी बैठकें कर विवादों को सुलझाया जाएगा, इससे ऐसे मतदान केंद्रों की संख्या कम हो सकती है।
- एनपी सिंह, एएसपी साउथ
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पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। बुधवार को आरक्षण की अनंतिम सूची भी प्रकाशित हो चुकी है। इसी के साथ ही चुनावी हलचल तेज हो गई है। पुलिस प्रशासन ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। जिले में इस बार 1858 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, इसमें 835 केंद्र सामान्य हैं। 437 संवेदनशील, 358 अति संवेदनशील हैं। जबकि 228 अति संवेदनशील प्लस केंद्र हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि 835 सामान्य और 437 अतिसंवेदनशील केंद्रों पर लॉ एंड आर्डर की कोई बड़ी दिक्कत नहीं है।
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दोनों मिलाकर करीब 1272 केंद्र है, जो फिलहाल सामान्य हैं, लेकिन 358 अति संवेदनशील और 228 अति संवेदनशील प्लस मिलाकर करीब 586 केंद्र हैं, जहां पर पुलिस प्रशासन को चुनाव में बवाल होने की आशंका है। ऐसे में डीएम विशाल भारद्वाज, एसपी आरपी सिंह ने एसडीएम, सीओ और थानेदारों को इन मतदान केंद्रों पर नजर रखने और पुराने विवादों को कम करने के लिए जिम्मेदारी सौंप दी है।
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इस आधार पर चिह्नित हुए बवाल वाले मतदान केंद्र
-पंचायत चुनाव, उपचुनाव में हिंसा हुई हो या फिर हत्या की गई हो।
-लोगों के बीच रंजिश चल रही हो या फिर और विवाद हुए हो।
-अधिकतम अपराधी गांव में रहते हों, गुंडा-माफिया हों गांव में।
-गरीब व्यक्तियों को कोई वोट डालने से मना करता हो।
-चुनाव में पैैसे और शराब का प्रलोभन दिया गया हो।
प्रत्याशी से लेकर समर्थकों तक के जमा होंगे असलहे
पंचायत चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस का सबसे अधिक फोकस असलहा जमा कराने पर रहेगा। खासकर वे लोग जो चुनाव लड़ रहे हैं या फिर उनके कट्टर समर्थक हैं। ऐसे समर्थकों को पुलिस चिह्नित करने की कार्रवाई तेज करेगी। एएसपी साउथ एनपी सिंह ने बताया कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों से लेकर उनके समर्थकों के अलावा सभी के असलहे जमा कराने की कार्रवाई को पुलिस तेज करेगी, जिससे चुनाव में कोई समस्या न खड़ी हो। पिछले पांच साल के दरम्यान हत्या, लूट, डकैती, गुंडा एक्ट, चोरी आदि के मामलों के आरोपियों पर पुलिस प्रशासन की कड़ी नजर है। अफसरों का कहना है कि इनसे चुनाव में हिंसा की आशंका बनी हुई है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।
कम हो सकती है मतदान केंद्रों की संख्या
चुनाव आयोग के आदेश पर एसडीएम की अध्यक्षता में गठित टीम ने जिले के बवाल वाले मतदान केंद्रों को चिह्नित किया है। इस कमेटी में सीओ, तहसीलदार, बीडीओ, एसओ को शामिल किया गया था। अगर किसी पुराने विवाद की वजह से इस बार भी विवाद की आशंका है तो उस मामले को निपटाया जाएगा, जिन पर बवाल करने और कराने की आशंका है, उन्हें चेतावनी दी जाएगी। नहीं मानने पर जेल और जिला बदर किया जाएगा। ऐसे में पुलिस प्रशासन को उम्मीद है कि हस्तक्षेप के बाद बवाल की आशंका वाले मतदान केंद्रों की संख्या कम हो सकती है।
जिले में मतदान केंद्र और बूथों को बनाने की कार्रवाई हो चुकी है। पांच साल पुराने विवादों और चुनाव में हुई घटनाओं को ध्यान में रखते हुए अति संवेदनशील और अति संवेदनशील प्लस मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इन पर पुलिस प्रशासन की कड़ी नजर है। अभी बैठकें कर विवादों को सुलझाया जाएगा, इससे ऐसे मतदान केंद्रों की संख्या कम हो सकती है।
- एनपी सिंह, एएसपी साउथ